
शैक्षिक अनुसंधान में योगदान बढ़ाने के लिए शिक्षा बजट बढ़ाने का सुझाव विशेषज्ञों ने दिया
द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालयों को शैक्षिक अनुसंधान के लिए बजट का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। त्रिभुवन विश्वविद्यालय के डॉ. डिल्लीराज शर्मा ने निजी क्षेत्र के साथ सहयोग करके अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की बात कही। सम्मेलन में भाग लेने वाले अर्थशास्त्रियों ने नेपाल में शैक्षिक अनुसंधान को प्राथमिकता देने तथा सरकार को नीति निर्माण में बौद्धिक सहयोग प्रदान करने की बात कही। १ जेठ, काठमांडू।
विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालयों को शैक्षिक अनुसंधान में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए शिक्षा बजट आवंटित करने की आवश्यकता पर बल दिया। द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, जो ललितपुर के कुमारीपाटी में मेगा कॉलेज में आयोजित हुआ था, में प्रतिभागियों ने गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए सरकारी निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में नेपाल, भारत, बांग्लादेश समेत कई देशों के अर्थशास्त्री उपस्थित थे।
त्रिभुवन विश्वविद्यालय प्रबंधन संकाय के पूर्व डीन प्रोफेसर डॉ. डिल्लीराज शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालयों को निजी क्षेत्र के साथ मिलकर शैक्षिक अनुसंधान को बढ़ावा देना चाहिए। डॉ. शर्मा ने कहा कि नेपाल में तौर-तरीकों में निवेश हुआ है, लेकिन खोज, अनुसंधान और नवीनता को प्राथमिकता न देने पर चिंता व्यक्त की। ‘सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कुशल प्रबंधन क्षमता अत्यावश्यक है। वैश्विक सोच को स्थानीय स्तर पर विस्तारित करना होगा। इसके लिए सरकार को शैक्षिक अनुसंधान को प्राथमिकता देनी होगी,’ उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में बजट वृद्धि करके ही वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम जनशक्ति का उत्पादन संभव है। भारत के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय प्रबंधन संकाय के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. हरेन्द्रकुमार सिंह ने कहा कि सफल शासन के लिए प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है। डॉ. सिंह ने विश्व अर्थव्यवस्था के उदाहरण देते हुए कहा कि शक्तिशाली राष्ट्रों ने अनुसंधान में निवेश करके अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए हैं।
उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के बीच शैक्षिक क्षेत्र में पर्याप्त सहयोग नहीं है, इसलिए राजनीतिक व सांस्कृतिक संबंधों के समान शैक्षिक संबंधों को भी मजबूत करना आवश्यक है। मधेश विश्वविद्यालय प्रबंधन संकाय के डीन डॉ. अंजयकुमार मिश्र ने कहा कि प्रौद्योगिकी के विकास के साथ अनुसंधान में आने वाली चुनौतियों को नेपाल के अर्थशास्त्री पार कर सकते हैं। संघीय संसद के महासचिव पद्मप्रसाद पांडे ने कहा कि अर्थशास्त्री किसी भी देश के सहयोगी शक्ति होते हैं।
उन्होंने कहा कि नेपाल में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से देश के कानून और नीति निर्माण में सहायता मिलेगी। आयोजक मेगा कॉलेज, कुमारीपाटी के प्राचार्य डॉ. घनश्यामप्रसाद साह ने कहा कि द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत शोधपत्र, अनुसंधान निष्कर्ष और विमर्श राष्ट्रीय नीति निर्माण में महत्वपूर्ण सहयोग देंगे। नेपाल कमर्श एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. दीपेन्द्र कुमार चौधरी ने कहा कि नेपाल के शैक्षिक अनुसंधानकर्ता विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था तथा समसामयिक विषयों पर किए अध्ययन विश्वस्तरीय हैं। सम्मेलन के निष्कर्ष से सरकार को नीति निर्माण में बौद्धिक सहयोग मिलेगा, यह चौधरी का मानना है। शनिवार तक चलने वाले इस सम्मेलन में नेपाल के अधिकांश विश्वविद्यालयों के प्रबंधन संकाय के प्राध्यापक, शोधकर्ता और व्यापार, वाणिज्य, प्रौद्योगिकी एवं कानून के विद्यार्थी शामिल हैं।