
शालबाताना घाटी में कभी था मंगल ग्रह पर महासागर होने का प्रमाण
२ जेठ, काठमाडौं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के ‘मार्स एक्सप्रेस’ मिशन ने मंगल ग्रह के भूमध्यरेखा के निकट स्थित एक विशाल घाटी की तस्वीर जारी की है। इस तस्वीर ने लाल ग्रह के जलजीवन और ज्वालामुखीय इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। लगभग १,३०० किलोमीटर लंबी ‘शालबाताना घाटी’ नामक इस क्षेत्र ने अरबों वर्ष पहले मंगल ग्रह पर विशाल बाढ़ और महासागर के होने के मजबूत प्रमाण प्रस्तुत किए हैं, वैज्ञानिकों ने बताया।
वैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग ३.५ अरब वर्ष पहले जमीन के नीचे का पानी अचानक सतह पर निकलने से हुई भीषण बाढ़ ने इस घाटी का निर्माण किया। इस घाटी की चौड़ाई लगभग १० किलोमीटर और गहराई ५०० मीटर से अधिक है। इस क्षेत्र में देखे गए गहरे खड्ड और बहते पानी द्वारा बने घुमावदार आकारों से संकेत मिलता है कि मंगल ग्रह कभी वर्तमान से कहीं अधिक गर्म और नमीपूर्ण था।
अंतरिक्ष यान द्वारा खींची गई नयी तस्वीर में ‘केओटिक टेरेन’ नामक भूगर्भीय संरचना दिखाई दे रही है। माना जाता है कि जमीन के नीचे जमाए गए बर्फ के पिघलने से ऊपर की सतह धंस गई और यह आकृति बनी। घाटी के कुछ भागों में काले और नीले रंग के चिन्ह भी दिखे हैं, जो ज्वालामुखीय राख माने जाते हैं, जिसे बाद में मंगल ग्रह की हवा ने वहां जमा किया है, यह वैज्ञानिकों की राय है।
इस क्षेत्र में ज्वालामुखी से निकली लावा द्वारा बने समतल मैदान और प्राचीन क्रेटर भी स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। शालबाताना घाटी के अंत में स्थित ‘क्राइसे प्लानिटिया’ क्षेत्र मंगल ग्रह की सबसे निचली इलाक़ों में से एक है। कई प्राचीन जलमार्ग यहीं समाप्त होते हैं, इसलिए वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि यहाँ कभी एक विशाल महासागर भी था। यदि यह तथ्य प्रमाणित होता है, तो मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाओं संबंधी शोध में एक नया आयाम जुड़ जाएगा।
सन् २००३ में प्रक्षेपित ‘मार्स एक्सप्रेस’ यान बीते दो दशकों से मंगल ग्रह की सतह को निकट से अन्वेषण करता आ रहा है। इस यान में लगे ‘हाई रेजोल्यूशन स्टेरियो कैमरा’ द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों ने मंगल ग्रह के भूगर्भीय विकास को समझने में वैश्विक वैज्ञानिकों की सहायता की है।