
‘हेलिकॉप्टर से दबे लोगों को उठाकर निकाला गया’
७ चैत, खोटाङ। भूपू युके लाहुरे डाकमणि राई की पत्नी मनलक्ष्मी की यूके में गत फागुन ७ तारीख को मृत्यु हुई। परिवार की सहमति अनुसार मनलक्ष्मी का शव गाँव ही ले जाकर अंतिम संस्कार करने के लिए डाकमणि अपने बच्चों और रिश्तेदारों के साथ गाँव आ रहे थे।
गाँव में दाजुभाइ, पड़ोसी और करीब के रिश्तेदारों को अंतिम संस्कार के लिए हेलिकॉप्टर से आने की खबर थी। डाकमणि का गाँव खोटाङ के केपिलासगढी गाउँपालिका-२ खार्ताम्छा स्थित बालाबेसी है। वे इसी चैत ४ तारीख को अपने बच्चों के साथ हेलिकॉप्टर से घर के पास उतरने की तैयारी कर रहे थे।
डाकमणि के घर के नजदीक खेत की जमीन पर हेलिकॉप्टर उतारने के लिए सफेद अक्षरों में अंग्रेजी ‘H’ लिखा गया था। दिन के करीब १२ बजने वाले थे कि हेलिकॉप्टर की आवाज सुनाई देने लगी। रिश्तेदार और पड़ोसी हेलिकॉप्टर उतरने वाली जगह के आस-पास जमा हो गए।
उड़ रहा हेलिकॉप्टर धीरे-धीरे करीब आ रहा था। एयर डायनेस्टिक का हेलिकॉप्टर अपने पंखे से धूल उड़ाने लगा, जिससे कई स्थानीय लोग पीछे हट गए। कुछ लोग धूल को रोकते हुए मोबाइल से वीडियो और फोटो लेने लगे।
धूल उड़ाते हुए जमीन पर उतर चुका हेलिकॉप्टर अचानक अपनी पुंछ ऊपर उठा कर खाई में गिर गया। निचली जमीन पर उतारने वाला हेलिकॉप्टर ऊपरी खेत में पहुंच कर क्षतिग्रस्त हो गया। खेत के किनारे आने के बाद जब इसे थोड़ा दीवार की ओर स्थानांतरित करने की कोशिश की गई, तो वह उड़ गया, जैसे प्रत्यक्षदर्शी प्रकाश राई ने बताया।
हेलिकॉप्टर के पायलट थे खोटाङ के दिक्तेल रुपाकोट मझुवागढी नगरपालिका-३ बाम्राङ निवासी सविन थापा। डाकमणि, उनके बेटा बालकुमार राई, बेटी लक्ष्मी राई, रिश्तेदार समला राई और पास्टर काजीबहादुर राई यात्री के रूप में सवार थे।
हालांकि दुर्घटना गंभीर थी, काजीबहादुर को छोड़ सभी सुरक्षित निकले। ललितपुर निवासी काजीबहादुर को दबे हुए हालात में बाहर निकाला गया था।
हेलिकॉप्टर में आग नहीं लगी, जिससे पायलट और सभी यात्रियों की जान बची, यह जानकारी खार्ताम्छा के वडाध्यक्ष मिलन राई ने दी। पायलट थापा ने तुरंत इंजन बंद कर दिया था, इसलिए हेलिकॉप्टर में आग नहीं लगी।
मनलक्ष्मी के शव को हेलिकॉप्टर से ही गाँव ले जाने का प्रबंध था, लेकिन कफिन हेलिकॉप्टर में नहीं फिट हुआ। इसलिए कफिन को एम्बुलेंस द्वारा गाँव ले जाने की व्यवस्था कर मृतक के परिवार वाले हेलिकॉप्टर में सवार हुए।
सुबह ११ बजकर ५१ मिनट थे। अपनी आंखों के सामने अनहोनी दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्शी बने स्थानीय लोग। उड़ते हुए हेलिकॉप्टर का पंखा पट्मेरो के पेड़ से टकराकर टूट गया। उसके बाद हेलिकॉप्टर उल्टा पलटा और वहीं अटका रहा।
डाकमणि के परिवार को इंतजार कर रहे पड़ोसी बिखर गए। घटना स्थल पर रोने-बिलखने और चिचियाने की आवाज शुरू हो गई। पायलट थापा, डाकमणि, उनके बेटे बालकुमार, बेटी लक्ष्मी और रिश्तेदार समला राई ने सीट बेल्ट खोलकर आसानी से बाहर निकले।
दबे हुए पास्टर काजीबहादुर को चिल्लाते हुए करीब १५-२० लोगों ने क्षतिग्रस्त हेलिकॉप्टर उठाकर बाहर निकाला। ‘हम सब बेहोशी की हालत में थे। उस स्थिति में हेलिकॉप्टर फटने का खतरा था, लेकिन लोगों को बचाने के लिए हमने हेलिकॉप्टर उठाया,’ राई ने बताया, ‘साइलेंसर के हिस्से से धुआं निकल रहा था। पायलट ने इंजन बंद कर दिया था, इसलिए आग नहीं लगी।’ हेलिकॉप्टर को फिलहाल तिरपाल से ढंककर रखा गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में हेलिकॉप्टर खेत की डिल पर उतरा था। हेलिकॉप्टर को ‘H’ साइन वाले स्थान पर ले जाने के प्रयास में दुर्घटना हुई, ऐसा स्थानीय लोग अनुमान लगाते हैं।
दुर्घटना में घायल पास्टर राई और पायलट थापा को तुरंत दूसरे हेलिकॉप्टर से काठमाडौँ ले जाया गया। दुर्घटना ग्रस्त डाकमणि के परिवार ने मनलक्ष्मी का अंतिम संस्कार कर दिया है।