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सूर्य की अत्याधिक गर्मी से टूटता जा रहा रहस्यमयी क्षुद्रग्रह मिला

वैज्ञानिकों ने सूर्य की अत्याधिक गर्मी के कारण एक रहस्यमयी क्षुद्रग्रह के धीरे-धीरे टूटने का सबूत पाया है। कनाडा, जापान, कैलिफोर्निया और यूरोप के स्वचालित ‘ऑल-स्काई कैमरा’ नेटवर्क द्वारा संकलित लाखों डेटा का विश्लेषण कर २८२ उल्कापिंडों से बना एक नया समूह पहचाना गया है। इस समूह का संबंध सूर्य के निकट क्षयीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे एक अज्ञात क्षुद्रग्रह से है। अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाले छोटे चट्टानी कण घर्षण के कारण अत्याधिक गर्म होकर चमकीली रेखा बनाते हुए गुजरते हैं, जिन्हें सामान्य भाषा में ‘तारा गिरना’ या वैज्ञानिक रूप से ‘उल्कापिंड’ कहा जाता है।

अधिकांश उल्कापिंड बर्फ और धूल से बने पुच्छर तारों (केतुओं) से उत्पन्न होते हैं, जबकि क्षुद्रग्रह सामान्यत: शुष्क और चट्टानी होते हैं। यदि कोई क्षुद्रग्रह सूर्य की तीव्र गर्मी, उच्च वेग और टक्कर के प्रभाव से सक्रिय हो जाए, तो वह अपनी सतह से धूल और चट्टान के टुकड़े अंतरिक्ष में छोड़ने लगता है। ये फैल कर एक उल्काधारा बनाते हैं, और जब पृथ्वी इस मार्ग से गुजरती है तो उल्कावर्षा होती है। ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित ताजा अध्ययन के अनुसार, मिली २८२ उल्कापिंडों का मार्ग अत्यधिक चरम है, जो पृथ्वी की कक्षा से लगभग पाँच गुना सूर्य के नजदीक है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य की अत्याधिक गर्मी से इस क्षुद्रग्रह की सतह पर दरारें पड़ गई हैं, जिससे अंदर के गैस बाहर निकल रही हैं और पूरा आकाशीय पिंड धीरे-धीरे धूल के कणों में परिवर्तित हो रहा है। इस सक्रियता के कारण इसे ‘रॉक-क्मेट’ (चट्टानी पुच्छर तारा) कहा गया है। इससे पहले यह सक्रियता केवल प्रसिद्ध ‘३२०० फेटन’ क्षुद्रग्रह पर देखी गई थी, जिससे हर वर्ष दिसंबर में ‘जेमिनिड’ उल्कावर्षा होती है। अब तक इस उल्कावर्षा के मुख्य क्षुद्रग्रह की स्थिति और सही पहचाना नहीं जा सका है।

ऐसे क्षुद्रग्रह सूर्य के निकट होने और प्रकाश के तीव्र चमक के कारण सामान्य दूरबीनों से देखना कठिन होता है। बावजूद इसके उल्कापिंडों के अध्ययन से सामान्य दूरबीनों में न दिखने वाले छिपे और संभावित खतरनाक क्षुद्रग्रहों का पता लगाया जा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, २०२७ में नासा के ‘नियो सर्वेयर’ मिशन के प्रक्षेपण से इस रहस्य को सुलझाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। यह अंतरिक्ष यान खास तौर पर सूर्य के निकट यात्रा करने और पृथ्वी के लिए संभावित खतरनाक अंधकारमय क्षुद्रग्रहों की खोज के लिए डिजाइन किया गया है। यह खोज न केवल सौरमंडल के विकास को समझने में बल्कि भविष्य में पृथ्वी को संभावित आकाशीय टकरावों से बचाने वाली ‘प्लैनेटरी डिफेंस’ तैयारी में सफलता का मार्ग खोलेगी।

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