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सुनसरी-मोरङ सिंचाई परियोजना की 111 बीघा भूमि पर अतिक्रमण, 2733 संरचनाएँ बनीं

सुनसरी–मोरङ सिंचाई परियोजना की 111 बीघा 5 कट्ठा 3 धुर भूमि अतिक्रमण में आकर 2,733 घर, भवन, मंदिर और आश्रम बनाए गए हैं। परियोजना प्रशासन को पत्राचार कर अतिक्रमित भूमि और संरचनाओं को हटाने तथा कानून के अनुसार कार्रवाई और संरक्षण के लिए सहयोग मांगा है। वर्ष 2072 में कुछ भूमि खाली कराई गई थी, लेकिन पूरी तरह से खाली न होने के कारण लगभग 20 दिन पहले पुनः जिला प्रशासन को पत्र लिखकर अतिक्रमित भूमि खाली करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

सुनसरी के उत्तरी क्षेत्र में स्थित बराहक्षेत्र नगरपालिका (कोशी का नया पुल) से लेकर दक्षिण चतरा इंटेक तक और मोरङ के बुधनगर तक 53 किलोमीटर लंबे मुख्य नहर, 203 किलोमीटर लंबी 19 शाखा और उपशाखा नहरें तथा 234 किलोमीटर लंबी छोटी शाखा नहरों के डिल और आसपास की भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर भौतिक संरचनाएँ निर्मित की गई हैं, परियोजना ने यह जानकारी दी है। परियोजना के वरिष्ठ डिविजनल इंजीनियर तेज रिजाल द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है कि भूमि अतिक्रमण से सिंचाई सुविधाओं को नुकसान होगा, अतः अतिक्रम करने वालों के खिलाफ प्रचलित कानून के तहत कार्रवाई की जाए और कॉलोनी, चतरा मूल नहर तथा शाखा-प्रशाखा नहर प्रणालियों के संरक्षण के लिए सहायता करें।

परियोजना ने विशेष रूप से सिंचाई प्रणाली की प्रभावशीलता बनाए रखने और सरकारी संपत्ति के संरक्षण के लिए सुनसरी और मोरङ जिलों के प्रशासनिक कार्यालयों से आवश्यक पहल और सहजीकरण की अपेक्षा जताई है, ऐसा परियोजना के निपटान निदेशक मनोहरकुमार साह ने बताया। उक्त पत्र जलस्रोत तथा सिंचाई विभाग, जावलाखेल को भी प्रस्तुत किया गया है।

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