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उच्च अदालतको आदेशले रवि लामिछानेको मुद्दामा के असर पर्छ ?

उच्च न्यायालय के आदेश से रवि लामिछाने के मामले पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

पोखरा उच्च न्यायालय ने जिला अदालत कास्की के आदेश को उलटते हुए रवि लामिछाने के खिलाफ मामले में संशोधन की अर्जी पर सुनवाई रोकने से मना कर दिया है। महा न्यायाधिवक्ता सविता भण्डारी ने सरकारी वकीलों को रवि लामिछाने के खिलाफ संपत्ति शुद्धिकरण और संगठित अपराध के आरोप वापिस लेने की अनुमति दी थी। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिला अदालत कास्की मामले में संशोधन अर्जी पर सुनवाई कर फैसला करेगी, जिससे लामिछाने के सांसद पद निलंबन की बाध्यता खत्म हो सकती है।

३ जेष्ठ, काठमांडू। पोखरा उच्च न्यायालय की पीठ ने गुरुवार को रवि लामिछाने के खिलाफ मामला संशोधन की अर्जी पर सुनवाई रोकने से इनकार करते हुए आदेश जारी किया है। न्यायाधीश डॉ. रत्नबहादुर बागचन्द और मेरिना श्रेष्ठ की पीठ ने जिला अदालत कास्की के फैसले को पलट दिया है। उच्च न्यायालय के आदेश के साथ ही जिला सरकारी वकील कार्यालय द्वारा मामले में संशोधन के लिए प्रस्तुत अर्जी पर सुनवाई का मार्ग खुल गया है। यदि अर्जी स्वीकार हुई तो लामिछाने के खिलाफ संगठित अपराध और संपत्ति शुद्धिकरण के आरोप वापस लिए जाएंगे।

महा न्यायाधिवक्ता के निर्देशानुसार सरकारी वकीलों को रवि लामिछाने के खिलाफ संपत्ति शुद्धिकरण और संगठित अपराध के आरोप संशोधित करने की अनुमति मिली थी। इस क्रम में सर्वोच्च न्यायालय में तीन रिट याचिकाएं दायर की गई हैं। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जिला अदालत कास्की से प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद बाकी कार्य किए जाएंगे।

अगली सुनवाई में सरकारी वकील संपत्ति शुद्धिकरण और संगठित अपराध के आरोप वापस लेने के विषय पर बहस करेंगे। यदि जिला अदालत कास्की इसे मंजूर करती है तो रवि लामिछाने पर केवल सहकारी ठगी का मामला शेष रहेगा।

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