
नीतिगत स्थायित्व की आवश्यकता – महालेखा परीक्षक का कार्यालय
महालेखा परीक्षक के कार्यालय ने नेपाल के कर प्रणाली में नीतिगत स्थायित्व की कमी को स्पष्ट रूप से उजागर किया है। इसने कर प्रणाली को पूर्वानुमानीय बनाने हेतु दीर्घकालीन कर नीति संरचना विकसित करने का सुझाव दिया है। कर प्रशासन को डिजिटल और तथ्यांक आधारित प्रणाली में रूपांतरित कर विवाद समाधान प्रक्रिया को तीव्र और निष्पक्ष बनाने का भी आग्रह किया गया है। ३ जेठ, काठमाडौं।
महालेखा परीक्षक ने अपनी ६३वीं वार्षिक रिपोर्ट में नेपालको कर प्रणाली में नीतिगत स्थायित्व की अनुपस्थिति पर प्रकाश डाला है। सरकार को लगभग एक दर्जन सुझाव देते हुए महालेखा ने आर्थिक नियमावली के माध्यम से कर दरों में बार-बार बदलाव करने की प्रथा समाप्त करने की बात कही है। कर प्रणाली को पूर्वानुमानीय और नीतिगत स्थिरता बनाए रखने के लिए दीर्घकालीन या मध्यमकालीन कर नीति संरचना विकसित करने की आवश्यकता बताई है।
महालेखा ने कर प्रणाली को निवेश के लिए अनुकूल बनाते हुए उद्यमशीलता और उत्पादन वृद्धि को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ अनुसंधान, विकास एवं प्रौद्योगिकी में निवेश को प्रोत्साहित करने वाली कर नीतिगत संरचना विकसित करने का सुझाव दिया है। बहुस्तरीय और जटिल छूटयुक्त कर संरचना की समीक्षा कर सरल, व्यापक और अनुपातपरक कर प्रणाली स्थापित करने का भी परामर्श दिया है। मूल्यवर्धित कर प्रणाली को प्रभावी बनाने हेतु इलेक्ट्रॉनिक बिलिंग को प्रोत्साहित करने और कर रिफंड प्रणाली को स्वचालित एवं पारदर्शी बनाने का सुझाव महालेखा ने दिया है।