
जोखिम में फंसे बच्चों के संरक्षण की जिम्मेदारी प्रदेश और स्थानीय सरकारों को सौंपी जाएगी
समाचार सारांश
स्रोत द्वारा तैयार किया गया। सम्पादकीय समीक्षा की गई।
- महिला, बालबालिका, लैंगिक तथा यौनिक अल्पसंख्यक और सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय ने बालबालिका संबंधी अधिनियम २०७५ में संशोधन के लिए विधेयक का मसौदा तैयार किया है।
- बाल सुधार गृह में रखे गए बच्चों के 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर किए गए अपराधों पर सामान्य फौजदारी कानून लागू न होने का प्रावधान अधिनियम में सम्मिलित करने का प्रस्ताव है।
- संघीय ढांचे के तहत बच्चों की अस्थायी संरक्षण सेवा प्रदेश सरकार और स्थानीय स्तर को देने की व्यवस्था प्रस्तावित विधेयक में रखी गई है।
3 जेठ, काठमांडू। बालबालिका संबंधी अधिनियम २०७५ में संशोधन किया जा रहा है। महिला, बालबालिका, लैंगिक तथा यौनिक अल्पसंख्यक और सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय ने अधिनियम संशोधन विधेयक का मसौदा तैयार कर इसे आगे बढ़ाया है।
बाल सुधार गृह में रहने वाले बच्चों द्वारा 18 वर्ष की आयु पार करने के बाद सुधार गृह के अंदर किए गए अपराधों पर सामान्य फौजदारी कानून न लागू होने से बच्चों का नकारात्मक मनोबल बढ़ा है, जिसे दूर करने के लिए मंत्रालय ने अधिनियम संशोधित करने की योजना बनाई है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुसार बाल न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए बच्चों द्वारा किए गए अपराधों पर सजाओं को कम करने जैसे प्रावधानों को भी प्रस्तावित विधेयक में रखा गया है।
विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले और जोखिम में पड़े बच्चों के अस्थायी संरक्षण की जिम्मेदारी संघीय ढांचे के तहत प्रदेश सरकार और स्थानीय स्तर को देने को उपयुक्त माना गया है, जिसके अनुसार यह व्यवस्था की जा रही है, मंत्रालय ने बताया।
बाल सुधार गृह के अंदर मानवाधिकार हनन, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, आगजनी और सुधार गृह से भागने की प्रवृत्तियों को रोकने के उद्देश्य से भी प्रस्तावित विधेयक में प्रावधान शामिल किया गया है।
प्रस्तावित विधेयक अधिनियम बनने के बाद बाल सुधार गृहों के संचालन और प्रबंधन में प्रभावशीलता आने की उम्मीद मंत्रालय को है।