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विशेषबाट किन थुनिए, सर्वोच्चले कसरी छाड्यो ? – Online Khabar

विशेष न्यायालय ने क्यों रखा हिरासत में और सर्वोच्च न्यायालय ने कैसे छोड़ा?

सर्वोच्च न्यायालय ने भूमि आयोग के पदाधिकारी नियुक्ति और कर्मचारी स्थानांतरण में रिश्वत लेने के आरोप वाले पूर्वमंत्री राजकुमार गुप्त को 50 लाख रुपए के जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया है। विशेष न्यायालय के आदेश को पलटते हुए सर्वोच्च ने रिश्वत लेने का कोई सबूत न मिलने के कारण गुप्त को हिरासत में न रखने का निर्णय सुनाया है। सर्वोच्च ने विशेष अदालत अधिनियम, 2059 की धारा 7(घ) के तहत गुप्त से 50 लाख रुपए जमानत लेने एवं मामले की न्यायिक जाँच के लिए छोड़ने का आदेश दिया है। 6 जेठ, काठमांडू।

सर्वोच्च न्यायालय ने भूमि आयोग के पदाधिकारी नियुक्ति तथा कर्मचारी स्थानांतरण में रिश्वत लेने के आरोप वाले पूर्वमंत्री राजकुमार गुप्त को 50 लाख रुपए की जमानत पर छोड़ने का निर्देश दिया है। विशेष न्यायालय के आदेश को उलटते हुए सर्वोच्च ने उन्हें हिरासत में रखने के बजाय जमानत पर रिहा किया है। न्यायाधीश शारंगा सुवेदी और सुनिलकुमार पोखरेल की पीठ ने जारी आदेश में रिश्वत लेने के कोई प्रमाण न मिलने को आधार बनाकर उन्हें जमानत पर रिहा किया है।

पूर्वमंत्री राजकुमार गुप्ता और रञ्जिता श्रेष्ठ सहित अन्य के विरुद्ध रिश्वत लेने के आरोप में दायर मुकदमे में गुप्त के खाते में 32 जेठ 2081 तक बार-बार धनराशि जमा और निकासी होने का दावा किया गया था। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न तथ्यों को आधार बनाकर गुप्त को हिरासत में रखने की आवश्यकता न होने का निष्कर्ष निकाला है। कास्की के खमबहादुर पुन को भूमि आयोग कास्की में नियुक्त किए जाने का कोई प्रमाण नहीं मिला, ऐसा सर्वोच्च का निष्कर्ष है।

विशेष न्यायालय ने 16 पौष 2082 को भ्रष्टाचार के मुकदमे में फंसे पूर्वमंत्री राजकुमार गुप्त को हिरासत में रखने का आदेश दिया था। विशेष न्यायालय ने सात आधार प्रस्तुत किए थे। उन्होंने मंत्री के विरुद्ध आई शिकायत और ऑडियो संवाद की स्क्रिप्ट को रिश्वत सौदे का आधार मानकर हिरासत में भेजा था। अदालत ने हालांकि भ्रष्टाचार के राशि बरामद न होने के कारण आरोपी को हिरासत में रखने की जरूरत न होने का आदेश दिया था।

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