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नेप्का गाँव में त्रासदीपूर्ण रात की घटना

९ जेठ, हुम्ला। जेठ ५ की रात ११ बजे चंखेली गाउँपालिका–५ के नेप्का गाँव में एक भयंकर तूफान शुरू हुआ। इसके बाद तेज बारिश होने लगी। कुछ ही समय में ऊपर से मिट्टी और कीचड़ की बाढ़ गिरने लगी। गाँव के लोग कुछ सहमे, कुछ चिल्लाए। सभी ने अचानक खुद को असहाय महसूस किया। ‘उस तूफान और कीचड़ की बाढ़ ने ६० किलोवाट की लघु जलविद्युत परियोजना को भी बंद करवा दिया। अंधेरी रात में सभी बेहद भयभीत थे,’ चंखेली–५ के वडाध्यक्ष हर्कधन तामाङ ने याद करते हुए कहा, ‘सबने बाहर मौजूद अपने रिश्तेदारों को फोन कर अपनी जान-माल के खतरे की खबर दे दी थी।’ वह रात नेप्का गाँव में त्रासदीपूर्ण रूप से बीती।
‘मेरी भेड़गोठ बह गई, लेकिन शुक्र है कि भेड़ों और बकरियों को कोई नुकसान नहीं हुआ,’ वडाध्यक्ष हर्कधन ने बताया, ‘लेकिन धनसिंह तामाङ के गोठ टूटने से ५३ भेड़-बकरी दब गए।’ गाँव के डांफे आधारभूत विद्यालय को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। पत्थर और मिट्टी से बने दो भवनों के चार कमरे टूट गए हैं। विद्यालय के सात कंप्यूटर, दो लैपटॉप और फर्नीचर भी नुकसान में हैं। गाँव की पेयजल व्यवस्था के लिए बनाए गए ५ हजार लीटर क्षमता वाले टंकी को भी क्षति हुई है। पुलिस के अनुसार, गाँव के ७५ घरों में से ४५ घरों की कृषि योग्य जमीन और फसल की लेदो मिट्टी में दबकर नष्ट हो गई है।
सात घंटे पैदल यात्रा कर नेप्का पहुंचे पुलिस दल के अनुसार, मेल्छाम पुलिस चौकी ने असई नन्दबहादुर शाही के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम परिचालित की थी। असई शाही ने कहा कि उनकी टीम सात घंटे पैदल चलकर नेप्का पहुंची। घटना के बाद जिला सदरमुकाम सिमकोट से प्रमुख जिल्ला अधिकारी टेककुमार रेग्मी की टीम निरीक्षण के लिए हेलिकॉप्टर से पहुँची थी। उनके साथ जिला पुलिस प्रमुख डीएसपी शंकर खड़खा, सशस्त्र पुलिस के डीएसपी पुष्करबहादुर सिंह और नेपाली सेना के मेजर हरिबाबु श्रेष्ठ भी मौजूद थे। लेकिन, स्थानीय लोगों ने पुलिस और सिडीओ टीम पर किसी भी राहत सामग्री के बिना वापस लौट जाने की शिकायत की है। चार दिन बीत जाने के बाद भी बाढ़ प्रभावितों ने सरकार से किसी भी प्रकार की राहत न मिलने की बात कही है।

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