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सर्वोच्च ने कहा– प्रधानन्यायाधीश के खिलाफ रिट अब औचित्यहीन है

सर्वोच्च अदालत ने प्रधानन्यायाधीश डा. मनोजकुमार शर्मा के नाम सिफारिश किए जाने के विषय में दायर रिट निवेदन को औचित्यहीन करार दिया है। न्यायाधीश मेघराज पोखरेल की इजलास ने प्रस्तावित प्रधानन्यायाधीश की संसदीय सुनवाई पूर्ण होने के कारण अदालत प्रशासन के दरपीठ आदेश को करते हुए स्वीकार किया।

वरिष्ठ वकील दिनेश त्रिपाठी और अधिवक्ता डा. प्रेमराज सिलवाल ने संवैधानिक परिषद के निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च में रिट दायर करने का प्रयास किया था। ११ जेठ, काठमाडौं। सर्वोच्च ने डा. मनोजकुमार शर्मा को प्रधानन्यायाधीश के रूप में सिफारिश करने वाले संवैधानिक परिषद के निर्णय के विरुद्ध दायर रिट को अब औचित्यहीन माना है।

वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी और अधिवक्ता डा. प्रेमराज सिलवाल द्वारा अलग-अलग दाखिल रिट निवेदनों को सर्वोच्च अदालत प्रशासन ने दरपीठ आदेश जारी करके खारिज कर दिया था। इस दरपीठ आदेश के खिलाफ नियुक्ति की सुनवाई के बाद न्यायाधीश मेघराज पोखरेल की इजलास ने अदालत प्रशासन के दरपीठ आदेश को स्वाभाविक तथा उचित ठहराया है।

संवैधानिक परिषद द्वारा सिफारिश किए गए प्रस्तावित प्रधानन्यायाधीश डा. शर्मा ने संसदीय सुनवाई पूरी कर ली है और प्रधानन्यायाधीश के रूप में नियुक्ति भी हो चुकी है, इसलिए सर्वोच्च अदालत ने रिट निवेदन को ‘औचित्यहीन’ घोषित किया है। न्यायाधीश पोखरेल की इजलास ने जारी आदेश में कहा है, ‘परिणामस्वरूप, निवेदक द्वारा पहले की प्रक्रिया की चुनौती देने की आवश्यकता समाप्त हो चुकी है और वर्तमान बदलाव को चुनौती देना निरर्थक है। अतः प्रस्तुत रिट दायर कर प्रक्रिया को अवरुद्ध करना उचित नहीं होगा। रजिस्ट्रार के दरपीठ आदेश को रद्द किया जाता है। कृपया विधि के अनुरूप कार्य करें।’

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