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प्रकाश सपुत, सुहाना थापा अभिनित ‘उडि जाऊँ भने म पंक्षी होइन’ लाई लोभलाग्दो भ्यूज

प्रकाश सपुत और सुहाना थापा अभिनित ‘उड़ि जाऊँ भने म पंक्षी होइन’ गीत ने यूट्यूब पर 11 लाख व्यूज पार किए

फिल्म ‘परालको आगो’ का गीत ‘उड़ि जाऊँ भने म पंक्षी होइन’ यूट्यूब पर 6 दिनों में 11 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। इस गीत में प्रकाश सपुत और सुहाना थापा ने अभिनय किया है और इसने सोशल मीडिया पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। पुराना कालजयी गीत पुनः एरेन्ज कर सार्वजनिक किया गया है, जिसका नृत्य निर्देशन रामजी लामिछाने ने किया है।

काठमांडू। फिल्म ‘परालको आगो’ में शामिल गीत ‘उड़ि जाऊँ भने म पंक्षी होइन’ यूट्यूब पर ज़बरदस्त व्यूज हासिल कर रहा है। रील्स और टिकटक पर भी इस गीत पर आधारित सैकड़ों वीडियो बनाए जा रहे हैं, जो बड़ी चुनौती के रूप में देखे जा रहे हैं। अरुणा लामाको लोकप्रिय कालजयी गीत को पुनः एरेन्ज कर इस सप्ताह जारी किया गया यह गीत मात्र 6 दिनों में 11 लाख से अधिक बार देखा गया है। गीत को प्रतिदिन लगभग 2 लाख व्यूज मिल रहे हैं, जिसे निर्माता पक्ष ने सूचना दी है।

एक टिप्पणीकार ने अभिनेत्री थापा की प्रशंसा करते हुए सुहाना द्वारा पहनी गई पोशाक की भी तारीफ की है। एक अन्य ने दोनों कलाकारों की प्रशंसा करते हुए खुद को उनका फैन बताया। “सुहाना थापा और प्रकाश सपुत के फैन यहां आएं” उन्होंने लिखा। एक अन्य टिप्पणी में अभिनेत्री की सराहना करते हुए पूछा गया, “जितना भी सुनूं उतना सुनते रहने का मन करता है, यह कैसा संगीत हो सकता है?”

45 वर्ष पहले बनी फिल्म ‘परालको आगो’ के रिलीज़ के समय भी यह गीत अत्यधिक लोकप्रिय था। इसकी मधुरता और संदर्भ को आज भी दर्शक और श्रोतागण बेहद पसंद कर रहे हैं। निर्माता सुशील पोखरेल गीत की लोकप्रियता से उत्साहित हैं। उन्होंने 11 लाख से ज्यादा बार देखे जाने की जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर खुशी साझा की है। पुराना गीत पुनः रिकॉर्ड कर फिर से प्रस्तुत करने पर संगीतकार शांति ठटाल भी उत्साहित नजर आती हैं।

इस गीत में निशु शर्मा का स्वर है और अरेंज विनोद भुजेल द्वारा किया गया है। गुरुप्रसाद मैनाली की अमर कृति ‘परालको आगो’ से प्रेरित इस फिल्म में सौगात मल्ल, सिर्जना अधिकारी, किशोर भण्डारी, ज्याक श्रेष्ठ, सरिता भण्डारी, रेणु न्यौपाने और मन्जिला बानियाँ ने अभिनय किया है। हरिओम सिने मेकर्स प्रालिको बैनर तले निर्मित इस फिल्म की पटकथा और संवाद सुशील देवकोटाले लिखे हैं, जबकि निर्देशन लक्ष्मण सुनार ने किया है।

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