
सरकार द्वि-दर वाले भ्याट लागू करने की तैयारी में, विशेषज्ञों ने कहा यह गलत दिशा में कदम है
समाचार सारांश
- सरकार ने पिछले तीन दशकों से चल रहे एकल दर मूल्य वर्धित कर (भ्याट) को द्वि-दर प्रणाली में बदलने का गृहकार्य शुरू किया है।
- अर्थमंत्री डॉ. सुवर्णिम वाग्ले के निर्देशानुसार, भ्याट की ऊपरी दर 13 प्रतिशत रखते हुए 4 या 5 प्रतिशत की निचली दर जोड़ने की तैयारी हो रही है।
- कर विशेषज्ञों ने द्वि-दर भ्याट प्रणाली को कर प्रशासन के खर्च और चोरी बढ़ाने वाला बताया और योजना की आलोचना की है।
12 ज्येष्ठ, काठमांडू – मूल्य वर्धित कर (भ्याट) लागू होने के तीन दशकों बाद सरकार ने इसमें व्यापक सुधार कर द्वि-दर प्रणाली लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। अर्थ मंत्रालय के एक उच्च स्तरीय सूत्र के अनुसार फिलहाल एकल दर पर लागू भ्याट को दो दरों में बांटने की योजना बनाई गई है।
अर्थमंत्री डॉ. सुवर्णिम वाग्ले की इच्छा के अनुरूप मंत्रालय और आंतरिक राजस्व विभाग इस तैयारी में लगे हैं। नेपाल में भ्याट साल 2054 मंसिर 1 से लागू हुआ था। इससे पहले बिक्री कर, होटल कर, मनोरंजन कर और ठेका कर जैसे कई कर हटाकर भ्याट प्रारंभ हुआ।
शुरुआत में भ्याट 10% दर पर था, लेकिन माओवादी संघर्ष के कारण सरकार को राजस्व में कमी आई तो साल 2061 माघ से इसे 3% बढ़ाकर 13% किया गया।
नेपाल में भ्याट हमेशा एकल दर पर लागू होता रहा है, लेकिन अब इसे संशोधित कर दो दरों में व्यवस्थित किया जाएगा, यह मंत्रालय की पुष्टि है। मंत्री वाग्ले के आग्रह पर एक कार्यदल भी गठित हुआ है जो द्वि-दर भ्याट के प्रभाव और चुनौतियों का अध्ययन कर रहा है।
कार्यदल ने भ्याट की ऊपरी दर को 13% पर स्थिर रखते हुए 4 या 5% की निचली दर जोड़ने की सिफारिश की है।
वर्तमान में भ्याट माफी सूची में जिन वस्तुओं को छूट मिली है, उन्हें 4 या 5 प्रतिशत की न्यून दर में लाने के लिए कार्य प्रगति पर है। अर्थमंत्री वाग्ले ने आंतरिक राजस्व विभाग से पूछा तो विभाग ने द्वि-दर प्रणाली लागू करने में सक्षम होने का जवाब दिया।
इसके बाद मंत्री ने इस पहल को लागू करने के आदेश दिए।
‘नेपाल में भ्याट तीन दशक तक एकल दर पर ही लागू था जो सकारात्मक था। शुरुआत में खाद्य पदार्थों जैसे कई वस्तुओं को छूट थी, बाद में यह सूची बढ़ी और भ्याट प्रणाली में विकृति आई,’ मंत्रालय के सूत्र कहते हैं, ‘अब सूची संकुचित कर न्यूनतम दर (4-5%) पर कर लगाने की व्यवस्था हो रही है।’
इसी तरह, मूल्य वर्धन के बावजूद उन वस्तुओं और क्षेत्रों पर भी भ्याट लगाया जाएगा जिन्हें पहले छूट थी।
दो दरें लागू करने के बाद सरकार करदाताओं को धनवापसी की प्रक्रिया व्यवस्थित करने में जुट गई है। ‘जब करदाता विवरण दर्ज कर कर जमा करेगा, तब तत्काल रिफंड राशि खाते में जमा करने का निर्देश अर्थमंत्री ने दिया है,’ सूत्र ने बताया।
अब तक कर संधारण के तौर पर जो राशि बकाया रहती थी, वह भविष्य के करों में समायोजित होती थी, जिससे समस्याएं होती थीं। अभी यह व्यवस्था सुधारी जाएगी।
कर अविभाजित वस्तुओं पर 4 या 5 प्रतिशत भ्याट लागू करने से मूल्य वृद्धि की आशंका कम है। एक कर प्रशासक ने कहा, ‘जहाँ कर छूट प्राप्त थी वहां लागत बढ़ी थी लेकिन अब भ्याट छूट क्षेत्र में आते ही खरीदी पर चुकाए गए कर की वापसी होगी, इसलिए लागत में खास फर्क नहीं पड़ेगा।’
अर्थ मंत्रालय के अनुसार द्वि-दर प्रणाली पर चर्चा हुई है लेकिन अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। राजसंस्था पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने और प्रधानमंत्री बालेन शाह से परामर्श के बाद अर्थमंत्री वाग्ले निर्णय लेना चाहेंगे।

हालांकि कर विशेषज्ञ और पूर्व कर अधिकारी इस द्वि-दर वाले भ्याट को सरकार व करदाताओं दोनों के लिए महंगा और कर चोरी बढ़ाने वाला बताते हैं। अर्थशास्त्री डॉ. रूप खड्का के अनुसार दुनियाभर के अधिकांश देशों में एकल दर भ्याट लागू है और नेपाल को भी इस दिशा में ही आगे बढ़ना चाहिए।
डा. खड्का ने कहा, ‘भारत ने भी बहुदर जीएसटी शुरू किया था लेकिन अब एकल दर की ओर लौट रहा है। न्यूजीलैंड जैसे उदाहरणमूलक देशों में भी एकल दर है। हमें एकल दर की निरंतरता बनाए रखनी चाहिए।’
पूर्व आंतरिक राजस्व विभाग के महानिर्देशक दिर्घराज मैन्साली ने कहा कि दो दरों से प्रशासनिक बोझ और जांच बढ़ेगी। ‘अभी भ्याट छूट सूची बहुत लंबी है, इसे छोटा करना अच्छा होगा लेकिन दो दर लागू करने से कर पालन की लागत और कर चुहावट बढ़ सकती है,’ उन्होंने कहा।
एक अन्य पूर्व महानिर्देशक ने भी कहा कि द्वि-दर से विकृति बढ़ेगी और लॉबिंग के कारण कर छूट में इजाफा होगा, इसलिए सुधार को सावधानी से आगे बढ़ाना आवश्यक है।
प्राइवेट सेक्टर लंबे समय से बहुदर भ्याट की मांग कर रहा है। कुछ वस्तुओं पर 13 प्रतिशत से कम दर लगाने का सुझाव भी उन्हीं का है।
लेकिन पूर्व महानिर्देशकों का तर्क है, ‘दो दरों वाला सिस्टम होने पर प्रतिस्पर्धा के कारण उच्च दर वाला पक्ष दर घटाने की कोशिश करेगा जिससे विकृतियां बढ़ेंगी।’
साथ ही, पर्याप्त तैयारी नहीं होने पर बजट के जरिए द्वि-दर लागू करना सही नहीं होगा। प्रणाली, वर्गीकरण, क्रेडिट व्यवस्था और खाते रखने की व्यवस्था को व्यवस्थित करना जरूरी है, वे कहते हैं।
निजी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और महंगी सब्जियों पर भी भ्याट लागू करने की तैयारी
सरकार निजी क्षेत्र में उपलब्ध शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, महंगी सब्जियां, फलफूल, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर भी भ्याट लगाने की तैयारी कर रही है। इन क्षेत्रों में निचली दर वाले भ्याट लगाने पर चर्चा चल रही है।
‘यदि द्वि-दर प्रणाली लागू हुई तो इन वस्तुओं और सेवाओं पर कम दर का कर लगेगा, यदि एकल दर बनी रही तो ये वस्तुएं 13 प्रतिशत की दर से कराधान के दायरे में आएंगी,’ सूत्र ने बताया।
आर्थिक मंत्रालय के अनुसार वे भ्याट माफी सूची में कटौती के पक्ष में हैं, इसलिए अधिकांश छूट प्राप्त वस्तुओं और सेवाओं पर कर लगना तय दिखता है।
लेकिन खाद्यान्न, दाल, चावल, सब्जी, मछली, ताजा मांस, वित्तीय सेवाएं, बीमा, दूध, खाद, नमक, सार्वजनिक परिवहन और सरकारी सेवाओं पर भ्याट छूट जारी रहेगी।
50 लाख मूल्य कारोबार करने वालों के लिए थ्रेशोल्ड बढ़ाने की तैयारी
वर्तमान में 50 लाख से अधिक मूल्य का कारोबार करने वाले व्यवसायी भ्याट में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। सेवाओं या वस्तु-सेवाओं में मासिक 30 लाख से अधिक कारोबार करने वालों को भी पंजीकरण जरूरी होगा। इस थ्रेशोल्ड को बढ़ाने की योजना बनी है।
‘यह तय नहीं हुआ है कि इसे कितना बढ़ाया जाएगा, लेकिन बढ़ाने की तैयारी है,’ सूत्र ने कहा।
थ्रेशोल्ड 75 लाख से 1 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है।
फिलहाल जिन वस्तुओं और सेवाओं को भ्याट छूट मिली है
1. मूलभूत कृषि उत्पाद
खाद्यान्न: चावल, मक्का, गेहूं, कुटकी, फापर, जौ जैसे अप्रसंस्कृत अनाज, कर्णाली क्षेत्र की स्थानीय कृषि और इनके आटे।
दालें: अप्रसंस्कृत और प्राथमिक रूप से संसाधित दालें, चना, केराउ, मसूर, मूंग और भटमास।
सब्ज़ी और फल: ताजा साग-सब्ज़ी, आलू, प्याज़, लहसुन, टमाटर और ताजा फल (जो पैकिंग या ब्रांड नाम वाली नहीं हैं)।
2. जीव-जंतु एवं उनसे प्राप्त वस्तुएं
जीवित पशु: गाय, भैंस, बकरी, सूअर, मुर्गी, हंस, बतख और सिलीकरम (रेशमी कीड़ा)।
मांस और मछली: ताजा, ठंडा या जमे हुए मांस और मछली।
दुग्ध उत्पाद: असंसाधित ताजा दूध (पाश्चुरीकृत दूध और ब्रांडेड दूध उत्पादों को छोड़कर)।
3. कृषि सामग्री और उपकरण
खाद और बीज: रासायनिक, जैविक, कम्पोस्ट खाद और कृषि योग्य प्रमाणित बीज।
कृषि उपकरण: ट्रैक्टर (निर्धारित हॉर्सपावर तक), थ्रेसर, हाथ से चलने वाले ट्रैक्टर, खुरपी, कोदालो, हंसिया और हल जैसे परंपरागत व आधुनिक कृषि यंत्र।
कीटनाशक: जैविक और रासायनिक कृषि कीटनाशक।
4. मूल आवश्यक वस्तुएं
खाने का नमक: आयोडीनयुक्त या सामान्य नमक।
पेयजल: पाइपलाइन या नल द्वारा आपूर्ति किया गया उपयोगी पानी (जार और बोतलबंद मिनरल वाटर अलग)।
ईंधन: घरेलू उपयोग के लिए लकड़ी और कोयला।
5. चिकित्सा उपचार और स्वास्थ्य सेवाएं
मानव चिकित्सा सेवाएं: अस्पताल, क्लिनिक या स्वास्थ्य केंद्र की जांच, शल्यक्रिया और उपचार सेवाएं।
औषधि और टीके: नेपाल सरकार की राष्ट्रीय औषधि सूची में शामिल दवाएं, आयुर्वेदिक औषधियां, टीके और गर्भ निरोधक उपकरण।
अपाहिज सहायता उपकरण: अपंग व्यक्ति के लिए व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग, श्वास सहायक, दृष्टिहीनों के लिए छड़ी और ब्रेल सामग्री।
6. शिक्षा, पुस्तकें और मुद्रित सामग्रियां
शैक्षिक सेवाएं: स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदान की जाने वाली नियमित शिक्षा, परीक्षाएं और शैक्षिक सहायता।
पुस्तकें: शैक्षिक, साहित्यिक, वैज्ञानिक या किसी भी विधा की मुद्रित पुस्तकें, पाठ्यपुस्तक और चित्रकथा।
अखबार पत्रिकाएं: दैनिक, साप्ताहिक या आवधिक प्रकाशित समाचार पत्र और मैगज़ीन।
7. परिवहन और ढुलाई सेवाएं
सार्वजनिक यात्री परिवहन: बस, मिनीबस, माइक्रोबस, टेम्पो और टैक्सी जैसी यात्री सेवाओं का किराया (केबल कार को छोड़कर)।
ढुलाई सेवाएं: कृषि वस्तुओं और आवश्यक सामग्री की ढुलाई सेवाएं।
8. वित्तीय, बीमा और सरकारी सेवाएं
बैंकिंग सेवाएं: ऋण ब्याज, जमाशुदा और नेशनल बैंक द्वारा जारी वित्तीय लेनदेन।
बीमा: जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम।
सरकारी डाक सेवाएं: नेपाल सरकार का डाक सेवा, टिकट और मनी आर्डर।
9. अचल संपत्ति और विद्युत सेवाएं
घरजगह का कारोबार: आवासीय मकान और जमीन की खरीद-बिक्री तथा मकान किराया (व्यावसायिक भवन को छोड़कर)।
विद्युत सेवा: नेपाल विद्युत प्राधिकरण या अनुमोदित संस्था द्वारा गृह और औद्योगिक क्षेत्रों को बिजली आपूर्ति।
10. सांस्कृतिक और सार्वजनिक सेवाएं
प्रवेश शुल्क: सार्वजनिक पुस्तकालय, संग्रहालय, चिड़ियाघर, राष्ट्रीय उद्यान और वनस्पति उद्यान में प्रवेश शुल्क।
कला और संस्कृति: स्वदेशी हस्तशिल्प, मूर्तिकला, चित्रकला और गैर-लाभकारी सांस्कृतिक कार्यक्रम।