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मुख्यमंत्री शाह ने संसदीय दल के एकजुट होने का संदेश देने का संकल्प व्यक्त किया

१९ जेठ, धनगढी। सुदूरपश्चिम प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलबहादुर शाह के प्रति नेपाली कांग्रेस के कुछ सांसद असंतुष्ट थे। उन्होंने शाह को दल के नेता और मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए मोर्चाबंदी करते हुए मंगलवार को संसदीय दल कार्यालय में अविश्वास प्रस्ताव दायर किया। १८ सांसदों में से ९ ने शाह को दल के नेता पद से हटाने के निर्णय तथा अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। प्रकाश देउवा अमेरिका में मौजूद थे इसलिए उन्हें शामिल किए बिना १७ सदस्यों में से बहुमत का दावा करते हुए ९ सांसदों ने यह निर्णय लिया और शाह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दायर किया। हटाने वाले पक्ष ने पार्टी केंद्र को भी इस निर्णय की जानकारी दी और मंगलवार को सभामुख भीमबहादुर भंडारी से मिलकर इस विषय पर सूचित किया।

पहली नजर में मुख्यमंत्री शाह के खिलाफ सांसदों की यह पहल एकदम ताज़ा लगती है, लेकिन इसके पीछे पुरानी पृष्ठभूमि है, ऐसा नेताओं का कहना है। असंतुष्ट सांसद लम्बे समय से शाह को पदमुक्त करने की कोशिश कर रहे थे। डम्मरी महराबाहेक आठ अन्य सांसद पहले ही शाह को हटाने के लिए हस्ताक्षर कर चुके थे। महर के भी तैयार होते ही हटाने वाले पक्ष का बहुमत पूरा होने का दावा किया गया। हालांकि, मंगलवार को ही शाह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दायर करने के लिए हस्ताक्षर करने वाली महर ने वापसी करते हुए अपने हस्ताक्षर वापस ले लिए। महर द्वारा हस्ताक्षर वापस लेने के बाद मुख्यमंत्री शाह ने तुरंत राहत की साँस ली।

कांग्रेस के प्रतिनिधि मंत्री और अपने समर्थक सांसदों की उपस्थिति में शाह ने मुख्यमंत्री एवं मंत्रिमंडल कार्यालय में पत्रकार सम्मेलन किया। सम्मेलन में उन्होंने संसदीय दल को एकजुट करके आगे बढ़ने का संकल्प जताया। महर को भी संलग्न करते हुए शाह ने अपने खिलाफ हस्ताक्षर करने वाले सांसदों के प्रति सौम्य शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, ‘कुछ साथियों में असंतुष्टियां हो सकती हैं, लेकिन मैं हमेशा उन समस्याओं को सुलझाने के लिए खुला रहा हूँ। फिलहाल नीति एवं कार्यक्रम तैयार हो चुका है और बजट निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। हमारे बीच कोई भी मतभेद नहीं होगा। हम एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे।’ शाह ने कहा, ‘जल्द ही दल की बैठक बुलाकर संसदीय दल के एकजुट होने का संदेश दिया जाएगा। दल के व्यवस्थाओं में साथियों के बीच सहमति-असहमति बनी रहती है।’

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