Skip to main content

आयोग द्वारा लिए गए ३१ मिनट के रिकॉर्डेड बयान में ओली ने कहा- मैंने बयान नहीं दिया

समाचार सारांश

सम्पादकीय समीक्षा किया गया।

  • पूर्वप्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि उन्होंने बयान नहीं दिया, जबकि आयोग के पूर्व सदस्य विज्ञानराज शर्मां ने इसका खंडन किया है।
  • आयोग के कर्मचारी भक्तपुर स्थित ओली के आवास पर जाकर ३१ मिनट का रिकॉर्डेड बयान लिए।
  • ओली का यह ऑडियो रिकॉर्ड और रिपोर्ट पूर्व न्यायाधीश प्रेमराज कार्की की समिति तक पहुंच चुकी है।

२० जेठ, काठमाडौं। ‘मैंने उस समय कहा था कि आयोग में बयान नहीं दूंगा। मैंने बयान नहीं दिया, पर आयोग ने बयान दिया बताया। मैं इस मामले में ज्यादा विवाद में नहीं जाना चाहता। आयोग ने मुझे प्रश्नपत्र भेजा था, मैं उसे स्वीकार नहीं किया, समझा भी नहीं।’

‘मैं इस आयोग को मान्यता नहीं देता, मैंने पत्र भेज कर कहा कि मैं पत्र स्वीकार नहीं करता। उन्होंने बिना यह बात बताए बयान दिया बताया। आयोग ने अपनी इज्जत के लिए ऐसा किया होगा, इसमें मेरी कोई बात नहीं है। मैंने बयान नहीं दिया।’

बुधवार को एमाले के संगठन विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पूर्वप्रधानमंत्री और एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने गौरीबहादुर कार्की नेतृत्व वाले जांच आयोग में बयान न देने का जिक्र किया।

२१ फागुन के चुनाव में झापा-५ से हारने के बाद पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम में आए ओली ने कहा कि कार्की आयोग में उन्होंने बयान नहीं दिया।

‘यदि बयान नहीं दिया होता तो वे कैसे लिखित रिपोर्ट में कहते कि उन्होंने ये कहा, वो कहा?’, आयोग के सदस्य और प्रवक्ता पूर्व एआईजी विज्ञानराज शर्मा ने कहा, ‘उनका रिकॉर्डेड बयान मौजूद है। उन्होंने जो कहा, वह यह है, लेकिन अंत में दोहरे अर्थ में अपनी बात यह कह कर खत्म की कि यह मेरा बयान नहीं है। मेरा कहना यह है।’

जांच आयोग में कार्यरत एक सुरक्षा कर्मी के अनुसार, आयोग ने एक कर्मचारी भेज कर पूर्व प्रधानमंत्री ओली का बयान लिया था।

बयान लेने के बाद कर्मचारी ने आयोग के अध्यक्ष और अन्य दो सदस्यों को सिंहदरवार से आने-जाने तक की सभी घटनाओं की जानकारी दी थी।

उन्होंने ३१ मिनट के ऑडियो रिकॉर्ड और चार पृष्ठ की रिपोर्ट आयोग को सौंपी।

सभी दस्तावेजों को आयोग ने तत्कालीन सरकार को सौंपा था। ऑडियो और रिपोर्ट अब पूर्व न्यायाधीश प्रेमराज कार्की के नेतृत्व वाली समिति के पास है।

प्रेमराज कार्की की समिति भदौ २३ की घटना में सुरक्षा कर्मी पर कार्रवाई के विषय में अध्ययन कर रही है।

‘मैं बयान क्यों दूं?’

२० पुस २०८२, लगभग मध्यान्ह। सफेद गाड़ी सिंहदरवार के गेट से अंदर आई और पुरानी प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने रुकी।

जेनजी आंदोलन के दमन के जाँच के लिए गठित आयोग से एक कर्मचारी झोली लेकर उस गाड़ी में बैठा। गाड़ी गुण्डु स्थित ओली के निवास के बाहर रुकी जहाँ सुरक्षा कर्मियों ने गाड़ी की तलाशी ली। कोड पूछे जाने पर चालक ने कोड बताकर प्रवेश कराया गया।

आयोग के कर्मचारी तीन वक्त निवास में रुके। एक सहयोगी महिला ने बताया कि ‘ओली भोजन कर रहे हैं, कृपया प्रतीक्षा करें’। कुछ देर इंतजार के बाद ओली मिले और कहा कि वह आयोग के काम से अवगत हैं।

उन्होंने आयोग अध्यक्ष गौरीबहादुर कार्की, सदस्य विशेष्वर भण्डारी और विज्ञानराज शर्मा के बारे में विस्तार से जानकारी ली।

ओली ने कहा कि ‘आयोग के पूर्व एआईजी विज्ञानराज शर्मा स्वयं उनके प्रति पूर्वाग्रही हैं और इसका उन्हें जानकारी नहीं थी’।

आयोग के अन्य पदाधिकारियों से उनकी कोई व्यक्तिगत समस्या नहीं थी, लेकिन अध्यक्ष कार्की की पूर्वधारणा के कारण रिपोर्ट पूर्वाग्रही हो सकती है।

आयोग के कर्मचारी बताते हैं कि बयान से पहले ओली ने कार्की की न्यायाधीश के तौर पर बार-बार प्रशंसा की।

उस वक्त पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक भक्तपुर के कटुंजे में थे। उनका बयान और लिखित जवाब वे आयोग में देने से पहले ओली के पास पहुंचाए गए।

बयान शुरू होने से पहले ओली ने कहा कि ‘मुझसे किसी ने पूछा नहीं, मेरा नाम भी नहीं आया। मुझे बयान क्यों देना पड़े?’ उन्होंने लंबा वक्तव्य भी दिया।

ओली ने कहा कि ‘रमेश लेखक का बयान आ जाने के बाद और मेरा नाम न पूछे जाने के कारण पहले निर्णय लिया कि पूर्व प्रधानमंत्री का बयान नहीं लेना है। बाद में थोड़ा पूछ-ताछ भी हो सकती थी।’

जब ओली ज्यादा बात करने लगे तो कर्मचारी ने कहा, ‘मैं आयोग का कर्मचारी हूं। आप जवाब नहीं देंगे तो मैं रिपोर्ट बना दूंगा।’

फिर बताया, ‘मैं रिपोर्ट आयोग को सौंपूंगा और वह समय सीमा में रिपोर्ट न देने का दावा नहीं कर सकता।’

‘आइफोन पर्याप्त नहीं, दूसरा लाओ’

बयान से इंकार के बाद ओली नरम हुए और ५-७ पृष्ठ का लिखित कागज दिया।

कर्मचारी ने रेकॉर्डर निकालने को कहा तो शुरुआत में ओली असमर्थ थे लेकिन फिर रेकॉर्डेड बयान देने राजी हुए।

आयोग ने 60-70 सवाल पूछे, लेकिन ओली ने केवल अपनी बात रखने में रुचि दिखाई।

ओली ने कहा कि ‘बयान का रिकॉर्ड खुद के पास भी होना चाहिए’। उन्होंने एक सहयोगी महिला से दूसरा मोबाइल लाने को कहा।

जब बताया गया कि आईफोन आ गया है, उन्होंने कहा ‘आईफोन भरोसेमंद नहीं है, डाटा पूरी तरह कॉपी हो सकता है, दूसरा लाओ’। फिर दूसरा सेट लिया गया और रिकॉर्डिंग की गई।

बयान लेने वाले कर्मचारी ने खुद को आयोग का कहलाते हुए कहा, ‘मैं मौखिक और रिकॉर्डेड बयान लूंगा, आप तैयार हैं?’

ओली ने एकतरफा अपनी बात रखी और अंत में कर्मचारी ने कहा, ‘मैंने आपकी अनुमति से बयान रिकॉर्ड किया।’

विदाई के दौरान ओली ने कहा, ‘आपको छोड़ने वाली गाड़ी आप तक पहुंचा देगी।’

ओली और कर्मचारी के बातचीत के दौरान निवास के चालक ने मास्क लगाया था और कर्मचारी को प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर छोड़ दिया था। कर्मचारी ने ऑडियो रिकॉर्ड, कुछ कागजात और चार पृष्ठ की रिपोर्ट आयोग को सौंप दी थी।

‘बयान दिया बताया गया’

जेनजी आंदोलन के दौरान भदौ २३ को हुई घटना में गृह मंत्रालय जवाबदेह होने के बावजूद प्रधानमंत्री की भूमिका नहीं थी, ऐसा ओली ने कहा था।

‘पीड़ितों को बचाने के लिए पीएम ने निर्देश दिया था। मेरी संपत्ति जलाई गई, मेरे पास के दूसरे निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा,’ – ओली ने आयोग को कहा।

‘तेह्रथुम के एक ही आगजनी वाला घर मेरा है। इन सभी पर आयोग ने जांच-पड़ताल की या नहीं?’

बुधवार के कार्यक्रम में ओली ने कहा कि कार्की ने कहा ‘कुछ को दंडित करना होगा’, इसलिए उनकी आयोग बनी।

‘इसलिए कार्की के नेतृत्व में आयोग बना। उन्होंने एक ही बात बोली कि कुछ को दंडित किया जाए।’

ओली ने कहा, ‘मैंने कहा बयान नहीं दूंगा। मैंने बयान नहीं दिया, लेकिन आयोग ने बयान दिया बताया। मैं इस विवाद में नहीं जाना चाहता।’

जवाफ लेख्नुहोस्

तपाईँको इमेल ठेगाना प्रकाशित गरिने छैन। अनिवार्य फिल्डहरूमा * चिन्ह लगाइएको छ