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दुई दिनको वर्षाले किसानलाई राहत – Online Khabar

दो दिन की बारिश से महोत्तरी के किसानों को मिली राहत

समाचार सारांश

  • महोत्तरी के किसानों को शुक्रवार और शनिवार को हुई बारिश से खेती के कामों में आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।
  • हाल की बारिश ने वैशाखी तरकारी की कलियों और पौधों को ओला (ओइला) से बचाया, जिससे किसान शुभनारायण ठाकुर को राहत मिली है।
  • जिले की 71 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन में से केवल 20 प्रतिशत ही सिंचाई के अंतर्गत है, शेष आकाशीय बारिश पर निर्भर है।

9 चैत्र, महोत्तरी। सर्दियों में बारिश न होने से निराशाओं का सामना कर रहे महोत्तरी के किसान अब दो दिन की बारिश से राहत महसूस कर रहे हैं।

शुक्रवार और शनिवार को हुई बारिश से जमीन में पर्याप्त नमी बनी है, जिससे खेती के कामों को गति मिलने की उम्मीद है और किसान खुश हैं।

स्थानीय किसान शुभनारायण ठाकुर ने बताया कि पिछली बारिश ने पहले पानी की कमी के कारण पीली पड़ रही फसलों के लिए अमृत का काम किया है। उन्होंने कहा, “जमीन सूख रही थी, खेती योग्य हालत नहीं थी, वैशाखी तरकारी की कलियां और पौधे मुरझा रहे थे। पिछली बारिश ने बड़ी राहत दी है।”

बारिश के बाद तरकारी की कलियां एक दिन में ही सुधारित दिखने लगीं और दो दिन बाद रविवार को मौसम साफ होने से खेती के काम करने में आसानी हुई।

उन्होंने बताया कि पिछली बारिश ने खेतों की फसल को पर्याप्त नमी दी है और अब खरीफ धान तथा अन्य फसलें लगाने के लिए जमीन जोतना संभव होगा।

बर्दिबास-7 मनहरिपुर के 30 वर्षीय किसान निरबहादुर खत्री ने कहा, “पानी नहीं होने से गन्ने के पौधे सूख रहे थे, बारिश के बाद काफी राहत मिली है। अब खरीफ धान, मक्का, कोदो और जुनेलो जैसी फसलें लगाने के लिए खेत जोतना शुरू किया जाएगा।”

पिछली बारिश ने आम, लीची और कटहर जैसे गर्मियों के फल-पौधों को भी बहुत राहत दी है।

फूल और फलियों को प्रभावित करने वाले मधुमा रोग के साफ होने के बाद अब इसका उपचार प्रभावी होगा, बर्दिबास-5 चेरुका 70 वर्षीय फल-फूल किसान होतराज घिमिरे ने बताया।

फल-फूल के पौधों की जड़ों में पर्याप्त नमी होने से पौधे फलदायी बनेंगे और रोग का संक्रमण कम होगा, यह अनुभव किसानों ने साझा किया है।

गत शुक्रवार शाम को आई तेज हवा से फसलों को थोड़ी ही क्षति पहुंची है।

विशेष रूप से मक्का के बाल-फसल को हवाई तूफान ने गिराया है और वैशाखी तरकारियों की कलियां भी कुछ स्थानों पर टूट गई हैं। खेतिहर किसानों का कहना है कि बारिश शुरू होते ही हवा बंद हो गई जिससे बड़ी क्षति नहीं हुई। शुक्रवार शाम से शनिवार तक हुई बारिश से खेतों में थोड़े समय के लिए नमी बनी रहने की उम्मीद है।

इस बार सर्दियों में पानी न मिलने से बढ़ी गर्मी की तीव्रता को पिछली बारिश ने कम कर दिया है। फसल अनुकूल मौसम और ठंडे माहौल के कारण किसानों के कामों में सुविधा हुई है।

आने वाले कुछ महीनों में खेती-किसानी में व्यस्त रहने वाले किसान समय-समय पर अनुकूल बारिश की कामना करते हैं। अच्छी बारिश से उत्पादन बेहतर होगा, बर्दिबास-6 कृष्णपुर के 65 वर्षीय किसान रघु काफ्ले ने कहा।

जिले में कुल 71 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन है, लेकिन केवल 10 प्रतिशत ही सिंचाई की सुविधा प्राप्त है। अधिकांश किसान और निवेशक कुओं, नलों, ट्यूबवेल और बोरिंग के जरिए सिंचाई कर रहे हैं।

लंबे समय तक पानी नहीं मिलने के कारण ये वैकल्पिक सिंचाई स्रोत जल्दी सूख जाते हैं और किसान परेशान हैं। कृषि ज्ञान केंद्र महोत्तरी के अनुसार लगभग 20 प्रतिशत ही जमीन सिंचित है। शेष 80 प्रतिशत जमीन आकाशीय बारिश पर निर्भर है।

इसलिए किसानों को फसल बोने और संरक्षण के लिए बारिश का इंतजार करना पड़ता है।

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