बाल बच्चों की शारीरिक गतिविधियाँ स्वास्थ्य और खुशी में योगदान देती हैं
विश्वभर बाल बच्चे पहले की तुलना में कम सक्रिय हो रहे हैं, जो उनकी स्वास्थ्य पर दीर्घकालीन प्रभाव डाल सकता है। हर १० में से एक बच्चा और किशोर मोटापे की समस्या से जूझ रहा है। लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहना, तनाव, भोजन की गुणवत्ता, और खेल-कूद में घटती भागीदारी को इस स्थिति में अहम कारण माना जाता है।
खुशी की बात यह है कि बच्चों को निष्क्रियता से दूर कर सक्रिय बनाने के लिए कई उपाय खोजे गए हैं, जो उन्हें वर्तमान और भविष्य में सहारा देंगे। बच्चों को रोजाना कम से कम ६० मिनट शारीरिक गतिविधि करने की सलाह दी जाती है, लेकिन अधिकांश बच्चे इसे भी पूरा नहीं करते।
एक अध्ययन में ७१२ द्वितीय विश्व युद्ध के पूर्व सैनिकों की शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान दिया गया। इनमें जो लोग माध्यमिक स्तर पर खेल-कूद में भाग लेते थे, वे वृद्धावस्था में भी सक्रिय पाए गए। खेलों में सक्रिय रहने वाले लोगों को चिकित्सकीय सेवाओं पर कम निर्भर रहना पड़ता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ रोड आइलैंड के प्रोफेसर निकोल लोगन के अनुसार, “शारीरिक व्यायाम किशोरावस्था में उनके संज्ञानात्मक कार्यों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।” इसलिए, बच्चों और किशोरों में शारीरिक गतिविधि बढ़ाने तथा लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को कम करने पर शोधकर्ताओं ने विशेष ध्यान दिया है।