विश्व शांति और करुणा के लिए यात्रा करता एक कुत्ता
समाचार सारांश
- विश्व शांति के संदेशवाहक ‘पीस डॉग’ अलोका लुम्बिनी होते हुए काठमांडू पहुंचा है।
- वियतनामी भिक्षु पन्याकर के साथ नेपाल आया अलोका स्वयम्भु परिक्रमा करेगा और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से मुलाकात का कार्यक्रम है।
- भारत की सड़क पर बेसहारा हालत में पाया गया यह कुत्ता अमेरिका में 2300 मील की पैदल यात्रा पूरी कर चर्चित हुआ था।
मध्याह्न था। तेज धूप थी। स्वयम्भु की ऊंचाई पर ठंडी हवा के साथ रंग-बिरंगे लुङ्गी लहरा रहे थे। उसी समय आनंदकुटी विहार की सीढ़ियां चढ़ते हुए एक कुत्ता दिखाई दिया। उसके गले में एक स्कार्फ बंधा था जिस पर लिखा था – अलोका : पीस एम्बेसडर।
यह वही कुत्ता था, जो विश्व शांति और करुणा का संदेशवाहक बना है।
यह वही कुत्ता था, जो अमेरिका में 19 बौद्ध भिक्षुओं के साथ 2300 मील लंबी पैदल यात्रा (वॉक फॉर पीस) में भाग ले चुका है।

यह वही कुत्ता था, जो भारत की सड़कों पर बेसहारा जीवन बिता रहा था।
कभी अपने लिए एक वक्त का खाना और सुरक्षित आश्रय खोजते भटकने वाला यह कुत्ता अब ‘सेलिब्रिटी’ बन चुका है।

अलोका, द पीस डॉग। आज यही उपनाम से पूरे विश्व में उसे पहचाना जाता है। बौद्ध भिक्षुओं के साथ विश्व यात्रा कर रहा यह कुत्ता आज लुम्बिनी से बुद्ध एयर के जहाज से काठमांडू उतरा है। बुद्ध एयर ने सोशल मीडिया पर उसकी उड़ान पर स्वागत करते हुए खुशी जताई।

भिक्षुओं के समूह के साथ अलोका विमानतल से बौद्ध विहार होते हुए आनंदकुटी में विश्राम कर रहा था। फिर मध्याह्न में स्वयम्भु पहुंचा। भक्तों की लंबी कतार के बीच स्वयम्भु का फेरा लगा। उसके बाद राष्ट्रपति भवन की ओर रवाना हुआ।

इस गतिशील यात्रा में वह शांत और सौम्य नजर आ रहा था। सिर्फ तस्वीरें खिंचवाने के लिए नहीं, बल्कि उसे छूने के लिए भी वहां उत्सुक लोगों की भीड़ थी।
अलोका कौन था? उसने भिक्षु संगत कैसे पाई? विश्व शांति की यात्रा पर कैसे निकला? यह सिलसिला समझाने से पहले उसकी वर्तमान यात्रा की जानकारी लेते हैं।

एक सप्ताह से भारत भ्रमण पर रहे वियतनामी भिक्षु पन्याकर के साथ अलोका कल लुम्बिनी पहुंचा था। वह सुनौली होते हुए लुम्बिनी पहुँचे। वहां अखंड शांति द्वीप से मायादेवी मंदिर तक उन्हें पीस वॉक करना था। मायादेवी मंदिर में उनका भव्य स्वागत किया गया।

आज काठमांडू पंहुचने के बाद वह बौद्ध, स्वयम्भु की परिक्रमा करेगा और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से मुलाकात करेगा, फिर कल भारत वापस जाएगा।
अब अलोका की कहानी पर लौटते हैं
अलोका की कहानी भारत से शुरू होती है। उस समय अलोका लगभग 4 साल का था। जब बौद्ध भिक्षु पैदल यात्रा कर रहे थे, तो यह कुत्ता स्वेच्छा से उनके समूह में शामिल हो गया। अलोका को प्रशिक्षित नहीं किया गया था, न ही उसे कोई डांटा। उसने खुद ही भिक्षुओं के संगत को चुना था।
तस्वीरें : आर्यन धिमाल।