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अर्घाखाँची में हुए विकास के बावजूद जनसंख्या में गिरावट

समाचार के अनुसार, पिछले १० वर्षों में अर्घाखाँची की जनसंख्या २० हजार से अधिक की कमी के साथ १ लाख ७७ हजार ८६ हो गई है। तीव्र आव्रजन के कारण अर्घाखाँची में पिछले एक दशक में ७,३६२ हेक्टेयर खेती योग्य जमीन वीरान हो गई है। पिछले पाँच वर्षों में ५,०८२ परिवारों के लगभग २५,००० लोग अर्घाखाँची छोड़कर अन्य स्थानों पर बस गए हैं। २९ जेठ, Kathmandu।

पहले गांव में मोटर मार्ग नहीं थे। बुटवल तक जाकर ढाकर में नमक-तेल लाना पड़ता था। घर-घर में पीने के पानी की नलिकाएं नहीं थीं। पंढेरा पानी लाकर पीना पड़ता था। लेकिन आज गांवों में पक्की सड़कों का निर्माण हो चुका है। घर-घर पेयजल सुविधा मौजूद है। बिजली और इंटरनेट की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। इतने विकास और सुविधाओं के बावजूद अर्घाखाँची के गांवों में लोग दिन पर दिन कम होते जा रहे हैं।

शीतगंगा नगरपालिका–११ छाप में कुछ वर्ष पहले ४५ परिवार रहते थे। अब वहां सभी घर खाली हैं। सन्धिखर्क नगरपालिका–९ गौचौर में भी गांव खाली हो चुका है। अर्घा राजस्थल मावि के शिक्षक छविलाल चुंदारी के अनुसार, गांव से अधिक आव्रजन के कारण विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है। ५५० विद्यार्थी पढ़ने वाली इस मावि में अब केवल २०० विद्यार्थी बचे हैं।

अर्घाखाँची में धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं। नगरपालिका प्रमुख कृष्णप्रसाद श्रेष्ठ के अनुसार, पर्यटन के साथ-साथ कृषि आधारित उद्यम और जैविक उत्पादन युवाओं को गांव में रोके रखने में सहायक हो सकते हैं। अर्घाखाँची वर्तमान में परिवर्तन के महत्वपूर्ण मोड़ पर है। आव्रजन का मुख्य कारण रोजगार की कमी, कृषि में जोखिम और सामाजिक सेवाओं की खराब गुणवत्ता है।

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