पासपोर्ट खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप, 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
8 असार, काठमांडू। अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने पासपोर्ट विभाग के महानिदेशक तीर्थराज अर्याल समेत 18 व्यक्तियों के खिलाफ पासपोर्ट खरीद के ठेके में भ्रष्टाचार करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा दर्ज किए गए लोगों में अर्याल के कर्मचारी, ठेकेदार कंपनियां, उनके विदेशी प्रतिनिधि और दो नेपाली एजेंट शामिल हैं। अख्तियार ने पासपोर्ट खरीद में 10 अरब 13 करोड़ नेपाली रुपैयाँ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। इस बहुचर्चित मामले में पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा की पत्नी एवं पूर्व विदेश मंत्री डॉ. आरजु देउवा राणो का नाम भी जुड़ा था। लेकिन अख्तियार ने उनके खिलाफ उल्लेख नहीं करते हुए कहा है कि ‘पूर्व प्रधानमंत्री समेत अन्य कर्मचारियों के खिलाफ अलग से जांच करनी होगी।’
अख्तियार ने महानिदेशक अर्याल के साथ-साथ पासपोर्ट विभाग के आईटी निदेशक सुनील कुमार केसी, शत्रुध्वन प्रसाद शर्मा पोखरेल, निदेशक रविंद्र राजभण्डारी, लेखा अधिकृत तुलसी प्रसाद आचार्य, कंप्यूटर इंजीनियर विपिन प्रसाई, शाखा अधिकृत सोमेश थापा, परराष्ट्र मंत्रालय के कानून उपसचिव राजाराम दाहाल, पुष्करराज नेपाल और लेखा उपसचिव भेष प्रसाद भुर्तेल के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। इन पर 10 अरब 13 करोड़ रुपये की हर्जाना मांगा गया है। अख्तियार ने पासपोर्ट छपाई के ठेकेदार कंपनी म्यूलबैर और उसके दो विदेशी प्रतिनिधि तथा नेपाली एजेंट मनिंद्रराज मल्ल के खिलाफ 1 अरब 90 करोड़ रुपये की हर्जाना राशि माँगी है। ठेका पाने वाली दूसरी कंपनी भेरिडोज, उसके दो विदेशी प्रतिनिधि और नेपाली एजेंट सिद्धार्थ थापा पर 8 अरब 22 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है।
अख्तियार का आरोप है कि दो कंपनियों और पासपोर्ट विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत, योजना तथा संलग्नता के आधार पर ठेका प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। बोली उद्देश्य के नियमों में परिवर्तन किया गया, स्वीकृत शर्तों और मानकों के विपरीत निविदा का मूल्यांकन हुआ। कानूनी नियम तोड़ते हुए तकनीकी और आर्थिक मूल्यांकन कर गलत निर्णय लिया गया, इसके बावजूद उन्हें आंशिक भुगतान भी किया गया, यह भी अख्तियार का आरोप है। पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री बालेन शाह के सलाहकार समूह ने अख्तियार प्रमुख प्रेम कुमार राय समेत सभी पदाधिकारियों को बुलाकर पासपोर्ट ठेका में अनियमितताओं के विषय में पूछताछ तथा चर्चा की थी। उस दौरान पासपोर्ट विभाग के कई अधिकारियों से भी प्रधानमंत्री कार्यालय में पूछताछ हुई। प्रधानमंत्री के सलाहकार समूह ने समय पर जांच न होने पर अख्तियार के अधिकारियों पर आक्रोश जताया था। प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई इस चर्चा के बाद पासपोर्ट विभाग के महानिदेशक तीर्थराज अर्याल समेत अन्य को गिरफ्तार कर अख्तियार ने जांच तेज़ कर दी।