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१५ वर्ष पहले सऊदी में हुई दुर्घटना ने मृगेन्द्र को देश वापसी से रोका

११ आसार, काठमांडू। विमानस्थल पर प्रवेश कर देश वापस लौटने वाली उड़ान में बैठ पाना विदेश रोजगार गए श्रमिकों के लिए खुशी का अवसर होता है। सऊदी अरब पहुंचे सप्तरी के सुरूंगा नगरपालिका-४ के मृगेन्द्र कुमार मंडल के लिए भी वह खुशी का दिन करीब था। दो साल की कड़ी मेहनत के बाद परिवार से मिलने की उम्मीद उन्हें काफी थी। लेकिन, जब विमानस्थल के काउंटर पर उनके पासपोर्ट का स्कैन किया गया, तो कर्मचारी की एक बात ने उनकी उम्मीदों को ठेस पहुंचाई। ‘‘आप पर यात्रा प्रतिबंध है, नेपाल नहीं जा सकते,’’ विमानस्थल के कर्मचारी की यह बात सुनकर उनका स्वदेश लौटने और परिवार के साथ खुशी बांटने का सपना अधूरा रह गया। अब उनका जीवन ही बदल चुका है। कुछ समय वे सड़क पर, तो कुछ समय मस्जिद के कोनों में बिताते हैं।

वह दुर्घटना जिसने १५ वर्षों बाद उनके जीवन को उलट दिया १५ साल पहले मृगेन्द्र सऊदी में जेल गए थे। चालक के रूप में काम करने वाले वे सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे थे। लेकिन एक दिन वे एक सड़क दुर्घटना के शिकार हो गए। दुर्भाग्यवश इस दुर्घटना में एक जॉर्डन नागरिक की मृत्यु हो गई। सऊदी स्थित रफा अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए ६ साल की जेल सजा सुनाई। ६ साल की कैद पूरी करने के बाद कंपनी ने उनका ‘फाइनल एक्जिट’ टिकट जारी किया और वे २०१८ में नेपाल लौटे। नेपाल लौट कर ५-६ वर्ष तक गांव में मजदूरी की। लेकिन गरीबी फिर उन्हें परेशान करने लगी। कर्ज और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण उन्हें फिर विदेश जाना पड़ा।

साल २०२३ मई में वह फिर सऊदी गए। इस बार नई कंपनी में दो साल ईमानदारी से ड्राइवर का कार्य किया। कंपनी के साथ समझौते के पूरा होने पर खुशी-खुशी अपना सामान लेकर विमानस्थल पहुंचे लेकिन पासपोर्ट सौंपते ही झटका लगा। सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोकते हुए कहा, ‘‘आप पर यात्रा प्रतिबंध है, नेपाल नहीं जा सकते।’’ १५ साल पुराने दुर्घटना की सजा मृगेन्द्र पहले पूरी कर चुके थे। लेकिन अदालत ने उक्त मामले को पुनर्जीवित करते हुए उन्हें ३ लाख ३० हजार सऊदी रियाल (करीब १ करोड़ ३३ लाख नेपाली रुपए) ‘ब्लड मनी’ (क्षतिपूर्ति) की जरिमाना लगाई है। यह रकम न चुकाने तक वे Nepal लौट नहीं सकते और सऊदी से बाहर नहीं जा सकते।

प्रतिबंध की जानकारी मिलने पर मृगेन्द्र न्याय और उद्धार की उम्मीद लेकर नेपाली दूतावास पहुंचे। दूतावास से सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन अपेक्षित सहायता न मिलने पर वे निराश हैं। ‘‘दूतावास में जाकर घर लौटने न पाने की स्थिति में भोजन और रहने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया, लेकिन कर्मचारी बोले कि कोई सुविधा नहीं है और दरवाजा बंद कर दिया,’’ उन्होंने बताया। वकील रखकर मामला लड़ने के लिए सहायता मांगने पर भी दूतावास ने समर्थन नहीं दिया, जिससे वे हताश हो गए। ‘‘अगर मुकदमा लड़ने के लिए पैसा होता, तो दूतावास की मदद की जरूरत नहीं पड़ती,’’ वे कहते हैं। अदालत या संबंधित प्राधिकरण ने इस जुर्माने से संबंधित कोई आधिकारिक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराया है। दूतावास की कानूनी व कूटनीतिक पहल न करने के कारण वे असहाय हैं। वह इस वक्त सऊदी की सड़कों पर भीख मांगते और मस्जिद की ठंडी ज़मीन पर सोते हुए अपना जीवन बिताते हैं। कुछ नेपाली उनके साथ अन्याय भी कर रहे हैं और एम्बेसी के नाम पर कुछ रकम लेकर काम कराने का झांसा देते हैं, उन्होंने बताया। सप्तरी में उनका परिवार मृगेन्द्र की हालत से व्यथित है। परिवार ने सरकार, विदेश मंत्रालय और संबंधित संस्थाओं से तत्काल उद्धार व जीवन रक्षा की मांग की है।

दूतावास ने कहा: मामले की जांच चल रही है सऊदी के रियाद स्थित नेपाली राजदूतावास ने बताया कि उनके मामले की जांच जारी है। १५ साल पहले की घटना को लेकर सऊदी संबंधित प्राधिकरणों द्वारा जांच की जा रही है। दूतावास के श्रम काउंसलर कविराज उप्रेती ने कहा, ‘‘१५ साल पुराना मामला है, ६ साल की जेल सजा भुगत चुके हैं। स्पष्ट जानकारी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू करेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘काम के लिए पुनः सऊदी आकर वापस जाने के क्रम में विमानस्थल पर रोका गया है और ब्लड मनी अदा करनी होगी। हम मामले को अच्छे से समझकर आवश्यक कदम उठाएंगे।’’

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