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पाँच वर्षों की दीर्घकालीन सोच के साथ मौद्रिक नीति बनाने का सुझाव

समाचार सारांश

  • अर्थशास्त्री और बैंकिंग विशेषज्ञों ने मौद्रिक नीति कम से कम पाँच वर्षों की दीर्घकालीन सोच के आधार पर बनाने पर जोर दिया है, न कि केवल अल्पकालिक अवधि के लिए।
  • पूर्वसचिव डॉ. सुरेन्द्र अर्याल ने मौद्रिक नीति को वार्षिक चक्र तक सीमित न रखकर सरकार और नेपाल राष्ट्र बैंक के कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए बनाना चाहिए, यह विचार प्रदर्शित किया।
  • नेपाल राष्ट्र बैंक के कार्यकारी निदेशक मुक्तिनाथ सापकोटाले कहा कि कोविड काल की पुनःकर्जा सुविधा अस्थायी थी, इसलिए इसे स्थायी रूप से जारी रखना सम्भव नहीं है।

१४ आसार, काठमांडू। आगामी वित्तीय वर्ष २०८३/८४ की मौद्रिक नीति को केवल अल्पकालिक न रखकर कम से कम पाँच वर्षों की दीर्घकालीन सोच के आधार पर लाने पर अर्थशास्त्री और बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने बल दिया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिरता बनाए रखते हुए बजट से समन्वित और स्पष्ट दीर्घकालीन नीति आवश्यक है।

नेपाल आर्थिक पत्रकार संघ (नाफिज) द्वारा रविवार को आयोजित ‘‘मौद्रिक नीति का क्षितिज और डिजिटल बाधा ढांचा’’ विषयक पैनल चर्चा में बोलते हुए संघीय संसद के पूर्वसचिव डॉ. सुरेन्द्र अर्याल ने कहा कि सरकार ने जो बजट प्रस्तुत किया है, वह क्रांतिकारी नहीं है, इसलिए मौद्रिक नीति से ज्यादा उम्मीद रखना उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति को केवल वार्षिक चक्र तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि सरकार और नेपाल राष्ट्र बैंक के नेतृत्व के कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए पाँच वर्षों के दृष्टिकोण के साथ बनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कर्ज़ा विस्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं होता तो मौद्रिक नीति को असफल नहीं कहा जा सकता।

डॉ. अर्याल ने कहा कि कोविड-१९ महामारी के दौरान लागू की गई कुछ शिथिल मौद्रिक व्यवस्थाएं तत्कालीन संकट प्रबंधन के लिए आवश्यक थीं, परन्तु उन्हें निरंतरता देना उचित नहीं होगा। उन्होंने मौद्रिक नीति के प्रभावी होने के लिए वित्त नीति के साथ समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उनके अनुसार, वर्तमान में बैंकिंग प्रणाली में अधिक तरलता की समस्या है जिसे बजट द्वारा पर्याप्त रूप से हल नहीं किया गया है। पूंजीगत व्यय कमजोर होने से अर्थव्यवस्था में अपेक्षित सुधार करना चुनौतीपूर्ण बनेगा।

नेपाल राष्ट्र बैंक के कार्यकारी निदेशक मुक्तिनाथ सापकोटाले वित्तीय स्थिरता को राष्ट्र बैंक का प्रमुख लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति द्वारा निर्धारित सभी लक्ष्य पूरी तरह हासिल न होने पर भी इसे असफल नहीं कहा जाना चाहिए।

सापकोटाले बताया कि हाल के वर्षों में कर्ज़ा विस्तार अपेक्षा के अनुरूप न होने के बावजूद बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता मौजूद है। उन्होंने कहा कि कोविड काल में दी गई पुनःकर्जा सुविधा अस्थायी थी और इसे स्थायी रूप से जारी नहीं रखा जा सकता। उन्होंने उद्योगपतियों और व्यापारियों से इस सुविधा के वास्तविक उद्देश्य को समझने की अपील की।

‘२०७७ साल की मौद्रिक नीति में पुनःकर्जा नीति शामिल थी,’ उन्होंने कहा, ‘कोविड के समय एक सीमित अवधि के लिए यह सुविधा दी गई थी, यह हमेशा जारी नहीं रह सकती।’

नेपाल राष्ट्र बैंक के पूर्व कार्यकारी निदेशक देवकुमार ढकाल ने वित्तीय क्षेत्र की नीतियों को लेकर आम जनता की बढ़ती रुचि का उल्लेख करते हुए कहा कि बाजार को अधिक तरलता प्रबंधन की क्षमता विकसित करनी होगी।

नेपाल बैंकर्स संघ के पूर्व अध्यक्ष अनिलकुमार उपाध्याय ने कहा कि पहले लागू की गई कठोर नीतियां अब अर्थव्यवस्था पर प्रभाव दिखा रही हैं। उन्होंने कहा कि कोविडकाल में कर्ज़ा विस्तार अधिक हुआ पर विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट के कारण कड़ाई आवश्यक हो गई थी।

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