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वैदेशिक रोजगार में संकट: 20 लाख नेपाली प्रभावित

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने 17 लाख से अधिक नेपाली विदेशी कामगारों की नौकरी और सुरक्षा पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। सरकार ने जोखिम वाले देशों में नए श्रमिकों को भेजने पर रोक लगा दी है, जबकि 80 हजार से अधिक लोगों ने स्वदेश लौटने के लिए नामांकन किया है। संघर्ष के कारण विदेशी रोजगार पर प्रभाव पड़ने से घरेलू रोजगार संकट बढ़ने और दलालों की गतिविधियाँ सक्रिय होने का खतरा नजर आ रहा है। 10 चैत, काठमांडू।

पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ ही नेपाल के विदेशी रोजगार क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। खाड़ी देशों, इज़राइल, जॉर्डन, लेबनान, ईरान और फिलिस्तीन जैसे क्षेत्रों में लाखों प्रवासी श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें 20 लाख से अधिक नेपाली कामगार भी शामिल हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 17 लाख नेपाली उन देशों में हैं, जबकि अनौपचारिक रूप से निवास करने वालों को जोड़ने पर लगभग 20 लाख की संख्या होती है, ऐसा परराष्ट्र मंत्रालय ने बताया है।

संघर्ष ने नेपाली कामगारों के रोजगार, आमदनी और सुरक्षा पर प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाना शुरू किया है। विदेशी रोजगार विभाग के वित्तीय वर्ष 2081/82 के आंकड़ों के अनुसार 8 लाख 39 हजार 266 लोगों ने विदेशी रोजगार के लिए श्रम स्वीकृति प्राप्त की थी। इसे देखते हुए नेपाल के मुख्य श्रम गंतव्य देशों में जारी तनाव का विदेशी रोजगार पर प्रत्यक्ष प्रभाव साफ तौर पर नजर आ रहा है।

श्रम और प्रवासन विशेषज्ञ डॉ. जीवन बानियाँ ने कहा है कि ऐसे संघर्ष का विदेशी रोजगार पर प्रत्यक्ष असर होने की संभावना है। युद्ध लंबे समय तक चलता रहा तो नेपाल से जाने वाले श्रमिकों की संख्या स्वतः कम हो जाएगी और इससे नई जोखिमें उत्पन्न होंगी। सरकार ने जोखिमयुक्त क्षेत्रों में नए श्रमिक भेजने पर रोक लगाई है, इसलिए नेपाल से जाने वाले श्रमिकों की संख्या रुक सकती है तथा विदेश में मौजूद श्रमिकों के स्वदेश लौटने की स्थिति भी बन सकती है, उन्होंने बताया।

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