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सिंहदरबार में जातीय मानसिकता के कारण दलित थर सूचीकरण में बाधा

काठमाडौँ। राष्ट्रीय दलित आयोग ने दलित समुदाय के थर सूचीकरण की लंबी अवधि से रुकी हुई प्रक्रिया का मुख्य कारण उच्च अधिकारियों की सोच और मानसिकता को बताया है। आयोग ने सरकार को सात बार थर सूचीकरण की सिफारिश की है, लेकिन अब तक यह कार्य पूरा नहीं हो सका है। सक्रिय दलित पत्रकार संघ नेपाल के समन्वय में आयोजित राष्ट्रीय दलित आयोग के साथ साक्षात्कार कार्यक्रम में आयोग के अध्यक्ष देवराज विश्वकर्मा ने बताया कि सिंहदरबार के अंदर असहजता उत्पन्न होने के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित हुई है। फिलहाल प्रक्रिया सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और सरकार से जल्द ही निर्णय की उम्मीद जताई गई है।

आयोग के सचिव झनककुमार खत्री ने बताया कि २०७७ साल से थर सूचीकरण को प्राथमिकता के रूप में लेकर आयोग लगातार कार्यरत है। उन्होंने बताया कि गत जेठ २६ तक आयोग ने सरकार को सात बार औपचारिक सिफारिश की है। प्रारंभ में यह मामला सामान्य प्रशासन मंत्रालय के अंतर्गत था, लेकिन अब इसे महिला, बालबालिका, लैंगिक तथा यौनिक अल्पसंख्यक एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय में स्थानांतरित किया गया है, इसीलिए सरकार से शीघ्र निर्णय की उम्मीद है।

आयोग अध्यक्ष विश्वकर्मा ने बताया कि आयोग में दर्ज ६२ शिकायतों में से अधिकांश का निपटारा हो चुका है। हालांकि अदालत में विचाराधीन मामलों पर टिप्पणी करना उचित नहीं है, लेकिन आवश्यक मामलों में संबंधित संस्थानों का ध्यानाकर्षण कराते रहे हैं। उनके अनुसार शिकायतें केवल लिखित नहीं, बल्कि टेलीफोन, सोशल मीडिया या समाचार माध्यमों में प्रकाशित रिपोर्टों के रूप में भी आयोग के द्वारा प्राप्त होकर आवश्यक जांच और पहल की जाती है। इस वर्ष ११ दलितों की असामान्य मौत हुई हैं, जिन मामलों में आयोग गंभीरता से कार्यरत है।

आयोग गठन के बाद जातीय भेदभाव की घटनाओं में लगभग ५० प्रतिशत कमी आई है, यह भी उन्होंने दावा किया। आयोग सदस्य मेहल पार्की ने बताया कि संविधान संशोधन में दलित समुदाय के अधिकारों को लेकर विस्तृत सुझाव सरकार को भेज दिए गए हैं। यदि सरकार इन सुझावों को कार्यान्वित करती है तो दलित समुदाय के संवैधानिक अधिकार और सुनिश्चित होंगे। आयोग सदस्य मीना सोव ने बताया कि आयोग के पदाधिकारी हाल ही में विभिन्न दलित बस्तियों का स्थलगत निरीक्षण कर चुके हैं और वर्तमान कार्यकाल में सूचीकरण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

कार्यक्रम में आयोग के पदाधिकारियों ने दलित समुदाय के हक, अधिकार, न्याय तक पहुंच, जातीय भेदभाव नियंत्रण और कानूनी सुधार के क्षेत्र में आयोग द्वारा सरकार के साथ समन्वय और दबावकारी भूमिका लगातार निभाई जा रही है, इसकी जानकारी दी।

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