क्रिस्टियानो रोनाल्डो की विश्व कप यात्रा: ६ बार खेलने के बावजूद उपाधि से रहे दूर
क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने विश्व कप में रिकॉर्डत्मक रूप से ६ अलग-अलग संस्करणों में गोल किए हैं। लेकिन विश्व कप की ट्रॉफी जीतने के सबसे करीब वह साल २००६ में पहुंच पाए थे। इसी वर्ष उन्होंने विश्व कप में पदार्पण किया और पुर्तगाल सेमीफाइनल तक पहुंचने में कामयाब रहा। अंतिम विश्व कप मैच रोनाल्डो के लिए पसंदीदा साबित नहीं हुआ। स्पेन के खिलाफ राउंड ऑफ १६ के मुकाबले में १-० से हार के बाद फुटबॉल इतिहास के इस महान खिलाड़ी का बड़ा खिताब (विश्व कप) बिना ही करियर समाप्त हो गया। डालास में हुए इस मैच में मिकेल मेरिनो ने दूसरे हाफ की इंजुरी टाइम में गोल किया, जिससे पुर्तगाल के पड़ोसी स्पेन क्वार्टरफाइनल में पहुंच गया। हार के बाद रोनाल्डो की आंखें भी आंसुओं से भर गईं।
पांच बार के बैलोन डी’ओर विजेता, पांच बार चैंपियंस लीग विजेता और यूरो २०१६ के चैंपियन रोनाल्डो ने अपने क्लब और देश के लिए विश्व स्तर पर ९७६ गोल किए हैं। उन्होंने विश्व कप में ६ अलग-अलग संस्करणों में गोल किए, जो एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड है। लेकिन विश्व कप की ट्रॉफी जीतने के लिए वह सबसे करीब २००६ में थे, जब पुर्तगाल सेमीफाइनल तक पहुंचा था। यह विश्व कप उनके आखिरी होने की घोषणा पहले ही हो चुकी थी। मैच के बाद अपने राष्ट्रीय टीम में खेलने या न खेलने के विषय पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं परिवार के साथ बैठकर शांति से निर्णय लूंगा।’’
विश्व कप ट्रॉफी जीतने के लिए क्या पुर्तगाल को हर मैच की शुरुआती ११ में रोनाल्डो को रखना चाहिए था या नहीं, इस पर विवाद जारी रहा। लेकिन टेक्सास में स्थित पूर्व इंग्लैंड स्ट्राइकर क्रिस सटन ने बीबीसी रेडियो ५ लाइव के लिए कहा, ‘‘वे मैदान पर जैसे दादा जी लगते हैं, यही पुर्तगाल के बाहर होने का मुख्य कारण है। क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कुछ खास नहीं किया।’’ सटन ने कोच की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘रोबर्टो मार्टिनेज क्या कर रहे हैं? कैसे एक खिलाड़ी के सामने आत्मसमर्पण कर सकते हैं? पुर्तगाल का बाहर होना रोबर्टो मार्टिनेज की वजह से हुआ।’’
मुख्य कोच मार्टिनेज ने मैच के बाद अपना पद छोड़ने की घोषणा करते हुए रोनाल्डो की प्रशंसा की। ‘‘इस विश्व कप में जो प्रयास उन्होंने दिखाए, उसके लिए हमें उनका धन्यवाद करना चाहिए,’’ उन्होंने कहा। ‘‘विश्व कप जीतना उनका सपना था और उन्होंने इसका शानदार उदाहरण पेश किया। वे फुटबॉल और मैदान के बाहर की मानवता दोनों के एक अद्भुत उदाहरण हैं।’’