सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी अब डिजिटल प्रणाली के माध्यम से, एकीकृत पोर्टल शुरू
२४ आसार, काठमांडू। ऊर्जा जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय ने राष्ट्रीय महत्व की सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति, बजट उपयोग और समस्या प्रबंधन का वास्तविक समय में अनुगमन करने के लिए एकीकृत डिजिटल निगरानी पोर्टल शुरू किया है। मंत्रालय के अनुसार, पहले चरण में सिक्टा, रानी जमरा–कुलरिया, भेरी–बबई, सुनकोशी–मरिण, महाकाली एवं बबई सिंचाई परियोजनाओं को इस पोर्टल में शामिल किया गया है। आगामी चरणों में अन्य सिंचाई परियोजनाओं को भी इसी प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने हाल ही में सिक्टा, रानी जमरा–कुलरिया, भेरी–बबई एवं बबई सिंचाई परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद परियोजना प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह प्रणाली लागू की है। पोर्टल शुरू होने के बाद मंत्री और मंत्रालय के सचिव अपने कार्यालय से ही परियोजना की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, बजट व्यय, ठेका प्रबंधन, निर्माण की स्थिति तथा परियोजना में आई समस्याओं की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। मंत्रालय को अपेक्षा है कि इससे उच्च स्तरीय नियमित निगरानी और आवश्यक निर्णय प्रक्रिया सुगम होगी।
पहले परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति मुख्यतः स्थलीय निरीक्षण या वित्तीय वर्ष के अंत में मिलने वाली रिपोर्ट के माध्यम से ही ज्ञात होती थी। कई बार परियोजनाओं की अवधि बढ़ने के कारण प्रगति का समय पर मूल्यांकन कठिन होता था, लेकिन नई प्रणाली इस समस्या को समाप्त करेगी। नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक परियोजना प्रमुख को प्रत्येक सप्ताह भौतिक प्रगति, वित्तीय स्थिति, ठेका कार्यान्वयन, दावे-बिवाद, निर्माण में आई बाधाओं और समाधान प्रयासों का विवरण अनिवार्य रूप से पोर्टल में दर्ज करना होगा।
मंत्रालय के अनुसार डिजिटल प्रणाली परियोजना में आई समस्याओं को नक्शे सहित प्रस्तुत करेगी, स्वचालित प्रगति रिपोर्ट तैयार करेगी, साथ ही यह दर्शाएगी कि किस पैकेज में क्यों देरी हुई, समस्या कितने समय से बनी हुई है और उसके समाधान की जिम्मेदारी किस निकाय या व्यक्ति पर है। पोर्टल को भविष्य में प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद् कार्यालय और राष्ट्रीय योजना आयोग के निगरानी प्रणाली से भी जोड़ा जाएगा। इससे विभिन्न सरकारी संस्थान एक ही आंकड़ों के आधार पर निर्णय ले सकेंगे, जिससे एकीकृत वातावरण बनेगा, मंत्रालय को इसे लेकर अपेक्षा है।
इसके अलावा आगामी वित्तीय वर्ष के लिए मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत बजट प्रस्ताव भी इसी प्रणाली से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित होंगे। प्रत्येक परियोजना की प्रगति, व्यय क्षमता और मौजूदा बाधाओं के प्रमाण के आधार पर बजट का अनुरोध किया जाएगा, मंत्रालय ने बताया। पोर्टल संचालन के अवसर पर मंत्री श्रेष्ठ ने कहा कि डिजिटल डैशबोर्ड निर्माण कार्य न पूरा होने पर महीनों तक फाइलों में सीमित रहने वाली समस्या का समय रहते पता लगाकर निर्णय प्रक्रिया को शीघ्र बनाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि अब अंतर-मंत्रालय समन्वय वाले विषयों को वित्तीय वर्ष के अंत तक प्रतीक्षा करने की आवश्यकता समाप्त होकर साप्ताहिक रूप से पहचान एवं समाधान प्रक्रिया में प्रस्तुत किया जा सकेगा, यह मंत्रालय की आशा है।