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चिया निर्यात समस्याओं के समाधान के लिए गठित कार्यदल ने प्रस्तुत किया रिपोर्ट

नेपाल के चिया क्षेत्र में उत्पन्न समस्याओं के समाधान और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए गठित ९ सदस्यीय कार्यदल ने मंत्री गौरीकुमारी यादव को रिपोर्ट सौंप दी है। भारतीय चिया बोर्ड की नई निर्देशिका द्वारा निर्यात में उत्पन्न रुकावट के कारण सरकार ने तात्कालिक, मध्यकालीन एवं दीर्घकालीन उपाय सुझाए हैं। आर्थिक वर्ष २०८१/८२ में नेपाल से ४ अरब ५९ करोड़ रुपये के बराबर १५,५९९ टन चिया का निर्यात हुआ है। २६ असार, काठमांडू।

विशेष अध्ययन कार्यदल ने उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्री गौरीकुमारी यादव को मंत्रालय के सहसचिव बुद्धबहादुर गुरुङ की अध्यक्षता में दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तैयार कर हस्तांतरित की है। नेपाली चिया का मुख्य बाजार माना जाने वाला भारत द्वारा हाल ही में लागू नई व्यवस्था और इसके चिया क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव को देखते हुए कार्यदल ने तत्कालीन, मध्यकालीन एवं दीर्घकालीन उपायों की सिफारिश की है।

रिपोर्ट सौंपते हुए मंत्री यादव ने कहा कि चिया क्षेत्र सुधार और निर्यात में सामने आने वाली नीतिगत तथा व्यावहारिक बाधाओं को दूर करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और कार्यदल के सुझावों को प्राथमिकता के साथ लागू किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक वर्ष २०८१/८२ में नेपाल में २०,६०२ हेक्टेयर क्षेत्र से २ करोड ६१ लाख किलो से अधिक तैयार चिया उत्पादन हुआ था। उत्पादित चिया में से ४ अरब ५९ करोड़ रुपये के बराबर १५,५९९ टन निर्यात हुआ, जिसमें ८६.७७ प्रतिशत हिस्सा केवल भारत को गया।

यह दर्शाता है कि नेपाली चिया का निर्यात भारत पर अत्यधिक निर्भर है। भारतीय चिया बोर्ड ने १ मई २०२६ से अनिवार्य गुणवत्ता परीक्षण हेतु नई निर्देशिका लागू कर दी है, जिससे नेपाली चिया निर्यात में गंभीर रुकावटें आई हैं। प्रयोगशाला परीक्षण में देरी, उच्च परीक्षण शुल्क और सीमा पर रोकावट के कारण चिया उद्योगपति, निर्यातक, छोटे किसान और मजदूरों की आजीविका पर प्रत्यक्ष नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जो रिपोर्ट में उल्लेखित है।