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सुन की चमक बनाए रखने का रहस्य उजागर

टुलन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सुन की सतह पर मौजूद परमाणुओं की विशेष संरचना खोज निकाली है, जो सुन को धुंधला होने से बचाती है। अध्ययन में यह पता चला है कि सुन की सतह पर स्वाभाविक रूप से बनने वाला सुरक्षात्मक आवरण ऑक्सीजन के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया को एक अरब से एक खरब गुना तक कम करता है। इस खोज ने औद्योगिक उत्पादन और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक में सुन को प्रभावी उत्प्रेरक (कैटालिस्ट) के रूप में उपयोग करने के नए मार्ग खोले हैं। 28 असार, काठमाडौं।

सुन अपनी चमक और दीर्घायु के कारण सदैव मूल्यवान माना गया है। टुलन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सुन के धुंधला न होने का एक महत्वपूर्ण कारण खोजा है। फिजिकल रिव्यू लेटर्स में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, सुन की टिकाऊपन केवल इसके रासायनिक गुणों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसकी सतह पर मौजूद परमाणुओं की संरचना भी एक अहम भूमिका निभाती है। सुन की सतह के परमाणु स्वाभाविक रूप से एक सुरक्षात्मक आवरण का निर्माण करते हैं, जो ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया होने से रोकता है।

यह नई विशेषता सुन के आभूषण एवं सिक्कों को दशकों तक चमकदार बनाए रखने में सहायक होती है। यह खोज औद्योगिक उत्पादन एवं स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी में सुन आधारित उत्प्रेरकों को और अधिक प्रभावी बनाने में वैज्ञानिकों की मदद करेगी। रासायनिक अभियांत्रिकी के सह-प्रोफेसर मैथ्यू मोंटेमोर और पोस्टडॉक्टोरल फेलो संतो विश्वास ने कम्प्यूटरीकृत सिमुलेशन के माध्यम से परमाणु और इलेक्ट्रॉन के व्यवहार का अध्ययन किया। उनके अनुसार पुनर्गठित सतह ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया को एक अरब से एक खरब गुना तक कम करने में सक्षम है। यह सुन की सतह पर एक सुरक्षात्मक आकृति बनाकर इसे लगातार चमकदार बनाये रखता है। यदि सुन को ऑक्सीजन से अलग रखने के लिए संशोधित किया जाए, तो यह कुछ रासायनिक प्रतिक्रियाओं में अत्यंत प्रभावी उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकता है। इस खोज ने सुन की सतह संरचना और परमाणु संगठन नियंत्रण कर कार्यक्षमता बढ़ाने के नए रास्ते दिखाए हैं।