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युट्युब और एक्स ने न्युडिफाइ एप्स के प्रवेश मार्ग के रूप में अहम भूमिका निभाई

समाचार सारांश की समीक्षा के बाद प्रस्तुत। इंटरनेट पर बिना अनुमति दूसरों की अश्लील सामग्री बनाने वाले न्युडिफाइ एप्स का खतरा युट्युब और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के कारण तेजी से बढ़ा है। आईएसडी की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2025 से मार्च 2026 तक सोशल मीडिया के जरिये इन साइट्स पर 57 लाख से अधिक विज़िट हुए हैं। न्युडिफाइ एप्स न सिर्फ यौन संतुष्टि हेतु, बल्कि लोगों की किरदार हत्या करने और जीवन बर्बाद करने जैसे घातक इरादे रखते हैं, यह शोध ने उजागर किया है। 32 असार, काठमांडू। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से विकास के साथ इंटरनेट पर बिना अनुमति दूसरों की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाने वाले ‘न्युडिफाइ’ एप्स का खतरा उल्लेखनीय रूप से बढ़ गया है। हाल ही में ‘इंस्टिट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक डायलॉग’ (आईएसडी) ने जारी किए गए एक रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तिजनक एप्स केवल इंटरनेट के डार्क वेब तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हम जो रोजाना उपयोग करते हैं जैसे युट्युब और एक्स (पूर्व ट्विटर) जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया नेटवर्क्स के माध्यम से भी वे बहुत आसानी से फैल रहे हैं। अध्ययन में पाया गया कि दिसंबर 2025 से मार्च 2026 की संक्षिप्त अवधि में ये समाजिक नेटवर्क इन साइट्स को 57 लाख से अधिक विज़िट प्रदान कर चुके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि ये प्लेटफॉर्म न्युडिफाइ एप्स के प्रसार में प्रमुख माध्यम बन गए हैं। न्युडिफाइ वेबसाइटों पर उपयोगकर्ताओं को ले जाने वाला सबसे बड़ा स्रोत युट्युब है, जहां कुल ट्रैफ़िक का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा, लगभग 18 लाख 20 हजार विज़िट दर्ज किए गए थे। इसके बाद एलन मस्क के स्वामित्व वाले ‘एक्स’ ने दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बनकर 13 लाख से अधिक विज़िट उत्पन्न किए। शोधकर्ताओं के अनुसार, युट्युब पर न्युडिफाइ एप्स से जुड़ी खोज करने पर ऐसे वीडियो आसानी से मिल जाते हैं, जो न केवल इन एप्स का प्रचार करते हैं बल्कि इन्हें फ्री में इस्तेमाल करने के लिए ‘प्रोमो कोड’ भी उपलब्ध कराते हैं। वायर्ड की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 1 डॉलर जैसी मामूली कीमत पर एआई की सहायता से किसी की भी तस्वीर को बिना कपड़े के बना देने वाले इस तरह के एप्स की व्यापक उपयोगिता के कारण ये साइटें वार्षिक रूप से लगभग 36 मिलियन डॉलर की कमाई करती हैं। ये एप खासतौर पर प्रेमिका या रिश्तेदार स्त्रियों को निशाना बनाते हैं, जिनका मकसद केवल यौन संतुष्टि नहीं बल्कि उनकी किरदार हत्या करना, नौकरी से निकालवाना और जीवन को बर्बाद करना होता है, जो कि शोध के निष्कर्षों से प्रमाणित है। सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर अश्लील सामग्री या इन वेबसाइटों के लिंक पर प्रतिबंध लगाती हैं, लेकिन यह नीति प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाई है, ऐसा आईएसडी की सीनियर डायरेक्टर ऑफ पॉलिसी एंड रिसर्च मेलानी स्मिथ ने बताया। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए युट्युब के प्रवक्ता बूट बुलविंग्कल ने कहा कि उनके प्लेटफॉर्म पर ऐसी आपत्तिजनक सामग्री और बाहरी लिंक पर रोक लगाने की कड़ी नीति है और यदि किसी ऐसे वीडियो को पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाया जाता है।