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दक्षिण चीन सागर विवाद के समाधान के लिए नए मध्यस्थता प्रयास

दक्षिण चीन सागर से जुड़ी ऐतिहासिक मध्यस्थता फैसले को 10 साल पूरे होने के बावजूद इसका क्रियान्वयन नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ता जा रहा है। 2016 में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने चीन के व्यापक समुद्री दावे को खारिज करते हुए फिलिपींस के सार्वभौम अधिकारों को मान्यता दी थी। चीन ने इस निर्णय को अस्वीकार किया है जबकि अमेरिका समेत 14 देशों ने इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी और अंतिम फैसला माना है।

दक्षिण चीन सागर विवाद लंबे समय से जारी है। 1947 में चीन की तत्कालीन राष्ट्रवादी सरकार ने 11 डैश वाले नक्शे को पहली बार सार्वजनिक किया था। बाद में ‘नाइन-डैश लाइन’ प्रचलित हुई, जो एक निरंतर रेखा नहीं बल्कि नौ अलग-अलग डैश को जोड़ती है। यह लगभग 3.5 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करती है, जो दक्षिण चीन सागर के लगभग 90% भाग के बराबर है।

फिलिपींस की सॉलिसिटर-जनरल डार्लिन मैरी बर्बेराबे के अनुसार, 2016 के फैसले ने फिलिपींस के तटीय क्षेत्रों में मछली पकड़ने के कानूनी अधिकारों को फिलिपींस का मान्यता दी है। इसी कारण फिलिपींस और चीन के बीच जहाजों की झड़पें तेज हुई हैं। 12 जुलाई 2026 को फिलिपींस मध्यस्थता फैसले का 10वां वार्षिकोत्सव मनाते हुए अमेरिका सहित 14 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर इस फैसले को कानूनी रूप से बाध्यकारी और अंतिम निर्णय माना है।

चीन के विदेश मंत्रालय ने फैसले के 10वें वार्षिकोत्सव पर कुछ देशों द्वारा प्रचार-प्रसार पर कड़ी नाराजगी जताई है और आरोप लगाया है कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता है तथा समस्या समाधान के बजाय तनाव ही बढ़ाता है। चीनी गृह मंत्रालय समर्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर साउथ चाइना सी स्टडीज के शोधकर्ता चेन सियांगमियाओ ने विवाद को सुलझाने के लिए सद्भावना और सहयोग आवश्यक बताया है।

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