
केन्द्रीय बैंक ने सीईओ को केवल चेतावनी पर अयोग्य न ठहराने का सुझाव दिया
बैंकरों ने बैंक के सीईओ या संचालकों को केवल सामान्य चेतावनी मिलने के आधार पर अयोग्य घोषित करने की व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की है। नेपाल बैंकर्स संघ के अध्यक्ष संतोष कोईराला ने विधेयक में सीईओ को गवर्नर बनने से रोकने के प्रावधान पर असंतोष व्यक्त करते हुए विकल्प खुला रखने का सुझाव दिया है। सिबिफिन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश उपाध्याय ने अपराध की प्रकृति के अनुसार सजा का वर्गीकरण करने और सहकारी संस्थाओं के नियमन की जिम्मेदारी राष्ट्र बैंक को सौंपने की मांग की है।
३ साउन, काठमाडौं। बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं के संचालक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को राष्ट्र बैंक द्वारा केवल चेतावनी या स्पष्टीकरण मांगने के आधार पर अयोग्य घोषित नहीं किया जाना चाहिए, यह बैंकरों का कथन है। प्रतिनिधिसभा की अर्थ समिति में राष्ट्र बैंक विधेयक पर हुए विचार-विमर्श में बैंकरों ने ऐसे सुझाव प्रस्तुत किए।
नेपाल राष्ट्र बैंक ऐन, २०५८ में संशोधन के लिए तैयार विधेयक में स्पष्ट रूप से यह निर्धारण नहीं किया गया है कि बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं के संचालक और सीईओ किन परिस्थितियों में अयोग्य घोषित होंगे, जिस पर बैंकरों ने स्पष्टता एवं अपराध के प्रकारानुसार दंड व्यवस्था की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है। साथ ही, वाणिज्य बैंक के सीईओ को गवर्नर बनने से रोकने के प्रावधान पर भी उन्होंने असहमति जताई है।
नेपाल बैंकर्स संघ के अध्यक्ष संतोष कोईराला ने कहा कि विधेयक के अनुसार बैंक के सीईओ को गवर्नर बनने से रोकना आवश्यक नहीं है, इसलिए विकल्प खुला रखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि कुलिंग पीरियड रखकर विकल्प खुले रखे जा सकते हैं बजाय इस प्रतिबंध के। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े सहकारी संस्थाओं को भी राष्ट्र बैंक के नियमन में लाने से सहकारी क्षेत्र की समस्याओं का समाधान संभव होगा।
बैंक तथा वित्तीय संस्था परिसंघ नेपाल (सिबिफिन) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश उपाध्याय ने कहा कि बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं के प्रति दंडात्मक कार्रवाई करते समय अपराध की प्रकृति के अनुसार सजाय का वर्गीकरण आवश्यक है। सामान्य चेतावनी या सलाह देने जैसी मामूली बातों को गंभीर अपराध के रूप में नहीं लेना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘अपराधों का वर्गीकरण आवश्यक है, सामान्य चेतावनी या सलाह को गंभीर अपराध जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, विधेयक के परिभाषा में जनता से निक्षेप इकठ्ठा करने वाले सभी सहकारी और वित्तीय संस्थाओं को शामिल किया गया है, इसलिए सहकारी संस्थाओं का नियमन भी राष्ट्र बैंक द्वारा होना चाहिए। बैंकिंग कारोबार करने वाले सहकारी संस्थाओं का नियमन संविधान और राष्ट्र बैंक के ऐन के तहत कवर किया जाना चाहिए।’’
नेपाल बैंकर्स संघ के उपाध्यक्ष सुरेन्द्रराज रेग्मी ने कहा कि कर्मचारियों की सामान्य गलतियों के कारण सीईओ या संचालक को अयोग्य घोषित करने की व्यवस्था हटानी चाहिए। तल्लो स्तर के कर्मचारियों की मामूली त्रुटि के आधार पर सीईओ या संचालक को अयोग्य ठहराना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने बताया कि तीन दशक से अधिक सेवा वाले व्यक्तियों को सीईओ पद पर रखा गया है और उन्हें इस मामले में अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विधेयक में ऐसे अनिश्चितताओं को दूर किया जाना चाहिए।
प्राइम कमर्शियल बैंक के सीईओ संजीव मानन्धर ने भी दंड संबंधी नियमों में लचीलापन लाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि केवल चेतावनी या सलाह की प्रकृति की कार्रवाई को पद से हटाने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि सर्वोच्च न्यायालय में दायर रिट में नेपाल राष्ट्र बैंक ने ऐसी कार्रवाइयों को सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में माना है, इसलिए राष्ट्र बैंक ऐन संशोधन विधेयक को भी उसी अनुसार संशोधित किया जाना चाहिए।