
कक्रोच जनता पार्टी के ‘संसद चलो’ अभियान ने गरमाया भारतीय राजनीतिक माहौल
समाचार सारांश
संपादकीय रूपमा समीक्षा गरिएको।
- ककरोच जनता पार्टी ने शिक्षामंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया, जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया।
- विपक्षी नेताओं ने पुलिस दमन की कड़ी निंदा की और सरकार से प्रदर्शनकारियों की मांगों को सुनने का आग्रह किया।
- सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा और प्रदर्शनकारियों पर दमन का आरोप लगाया।
४ असार, काठमाडौं। कक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा जन्तर-मन्तर में शुरू किया गया ‘चलो संसद्’ अभियान ने राजनीतिक माहौल को नया आयाम दिया है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने आज सामाजिक मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए बताया कि सरकार ने उनसे वार्ता के लिए बुलावा दिया है।
दास ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ ली गई तस्वीर साझा करते हुए कहा कि शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित अन्य विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि वार्ता मंत्री निवास पर सुबह १२ बजे से चल रही है। दास ने कहा कि मांग पर सुनवाई हुई लेकिन कोई निश्चित प्रतिबद्धता नहीं मिली।
मंत्री जेपी ने इस मुद्दे को उचित स्तर पर उठाने की बात कही है। सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकान्त के युवामुखी टिप्पणी से उत्पन्न हुई इस पार्टी ने नेताओं, सेलिब्रिटीज, कलाकारों और कार्यकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है। पिछले महीनों से जन्तर-मन्तर पर सीजेपी शिक्षामंत्री प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए आंदोलन कर रही है। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनाम वाङचुक २३ दिन से भूख हड़ताल पर हैं।
सीजेपी के अध्यक्ष अभिजित दीपके शनिवार से भूख हड़ताल पर थे, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्होंने सोमवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया।
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जेपी नड्डा के साथ हुई वार्ता में प्रवक्ता सौरभ दास ने तीन प्रमुख मांगों वाला ज्ञापन प्रस्तुत किया।
पहली मांग थी सोनाम वाङचुक को अस्पताल से छुट्टी दिलाना और आंदोलन में उनपर कोई कड़ी कार्रवाई न होने देना। दूसरी मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या बर्खास्तगी की है। तीसरी मांग NIT 2026 पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की थी।
प्रवक्ता सौरभ दास ने एक्स पर बताया कि उन्हें जेपी नड्डा से मिलने के लिए दो घंटे से अधिक इंतजार करना पड़ा और अभी कोई प्रतिबद्धता प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘मांग पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।’’
सोमवार सुबह से शुरू हुए प्रदर्शन के लिए प्रदर्शनकारी रविवार से ही पहुंचे हुए थे। सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनाम वाङचुक ने भी संसद मार्च में शामिल होने की अनुमति मांगी थी और खुद को ठीक महसूस कर रहे थे।
उन्होंने अस्पताल को लिखे पत्र में कहा था, “मैं आज पूरी तरह ठीक हूं। मेरी सेहत के सभी मानदंड सामान्य हैं। कृपया मुझे अस्पताल से जाने की अनुमति दें। मैं आज के संसद चलो मार्च में शामिल होना चाहता हूं। इसके लिए मैं आपका आभारी रहूंगा।”
इसके पहले उन्होंने सोमवार को एक और पत्र जारी किया था जिसमें अपने अनशन खत्म करने की शर्तें रखी थीं।
पत्र में उन्होंने कहा था कि सरकार को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की विफलता की जिम्मेदारी लेनी चाहिए या सांसदों को संसद में इसे उठाने का आश्वासन देना होगा। यदि शर्तें पूरी की गईं तो वह २० जुलाई को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर देंगे। लेकिन स्वास्थ्य कारणों से मार्च में भाग लेने की अनुमति नहीं मिली।
लेकिन संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने प्रदर्शनकारियों से भिड़ंत की। पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर उन्हें नियंत्रण में लिया।
सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने दिल्ली पुलिस पर संस्थापक अभिजित दीपके को गिरफ्तार करने का आरोप लगाया था, जिसे दिल्ली पुलिस ने खारिज कर दिया। बाद में दास ने एक नए पोस्ट में कहा कि अभिजित दीपके को हिरासत में नहीं लिया गया है।
सीजेपी ने एक और दावा करते हुए कहा, “दिल्ली पुलिस ने गीतांजलि अंगमो के बाल खींचकर अभद्रता की है।” उन्होंने कहा, “एक १२ साल के बच्चे का सिर फटा है और ४०-५० लोगों के सिर पर चोटें आई हैं।”
लेकिन दिल्ली पुलिस ने इन दावों को गलत बताते हुए सोशल मीडिया पर फैल रही गलत सूचनाओं का खंडन किया। उन्होंने कहा, “गीतांजलि नाम की १२ वर्षीय लड़की पर कोई मारपीट नहीं हुई है और ४०-५० लोगों के सिर पर चोट लगने की सूचना भ्रामक है।”
“ये दावे सच्चाई पर आधारित नहीं हैं। कृपया भ्रामक या गलत सूचना न फैलाएं और अतिशयोक्ति न करें।”
इसके बाद सौरभ दास ने एक नए पोस्ट में सोनाम वाङचुक की पत्नी के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया, हालांकि उन्होंने ४०-५० लोगों के सिर फटने या १२ वर्ष की लड़की को चोट पहुंचने का दावा पुनः नहीं किया।
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सीजेपी के उदय के समय टीएमसी जैसे दलों ने समर्थन दिया था, लेकिन अन्य विपक्षी दल एवं नेता शुरू में इस आंदोलन से दूर रहे। बाद में कुछ नेता व्यक्तिगत रूप से जुड़े।
रविवार को पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया धरना स्थल पहुँचे। उन्होंने जनता से पार्टी से ऊपर उठकर मार्च में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “यह मार्च देश के बच्चों के भविष्य के लिए है। भारत को शिक्षा माफियाओं से मुक्त कराने का मार्च है।”
समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज भी रविवार को जन्तर-मन्तर पहुंचीं और मंच से लोगों को शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने सोमवार के मार्च में भाग लेने का संकल्प भी ले लिया है।
समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय और इक़रा हसन भी रविवार को पहुँचे। राजीव राय ने मंच से कहा कि समाजवादी पार्टी और उसके सभी कार्यकर्ता सीजेपी के आंदोलन का समर्थन करेंगे।
शुक्रवार को कांग्रेस प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा सोनाम वाङचुक और प्रदर्शनकारियों से मिलने जन्तर-मन्तर पहुंचे थे।

पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा, “लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। जब नागरिक भूख हड़ताल करते हैं तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। नागरिकों को भूलना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह सरकार का मूल कर्तव्य है।”
उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस पार्टी की ओर से मैं जन्तर-मन्तर में सोनाम वाङचुक और प्रदर्शनकारियों से मिला तथा खराब होते स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अनशन तोड़ने का आग्रह किया। किसी भी आंदोलन में कार्यकर्ता खोकर उसे मजबूत नहीं बनाया जा सकता। हमें संघर्ष जारी रखने के लिए जिंदा रहना होगा।”
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संसद में भी सीजेपी के मुद्दे को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। भारतीय कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को राज्यसभा में सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर पुलिस लाठीचार्ज को जोरदार तरीके से उठाया।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में जन्तर-मन्तर पर जमा हजारों प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार युवाओं की आवाज दबाना चाहती है।
कक्रोच जनता पार्टी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अध्यक्ष खड़गे को धन्यवाद दिया जिन्होंने सदन में युवाओं के पक्ष में आवाज उठाई।
संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में खड़गे ने कहा कि दिल्ली में युवाओं की मांगों को दबाना गलत है।
इसी तरह, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने एक्स पर वीडियो संदेश जारी कर सरकार से अहंकार छोड़कर युवाओं से संवाद करने का आग्रह किया।
युवाओं पर हो रहे दमन को लेकर केजरीवाल ने कहा, “बाल-बच्चे न्याय मांगने सड़क पर निकले हैं और उन्हें पीटा जा रहा है। मैं मोदी जी से आग्रह करता हूं कि युवाओं के आक्रोश को समझें, नहीं तो यह आपके लिए बड़ा संकट होगा।”
उन्होंने एक्स पर लिखा, “यह देश के बच्चे हैं जो न्याय के लिए सड़क पर आए हैं। अहंकार त्यागिए और उनकी बात सुनिए।”