
जल्दी उदास और जल्दी खुश होने वाले बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करें?
समाचार सारांश: अभिभावकों को बच्चों की संवेदनशीलता को कमजोरी नहीं बल्कि ताकत समझकर उन्हें प्रोत्साहन और सम्मान देना चाहिए। हर बच्चे का स्वभाव अलग होता है। वे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के तरीके भी भिन्न होते हैं। कुछ बच्चे अपनी भावनाओं को खुले तौर पर व्यक्त करते हैं, जबकि कुछ शायद व्यक्त नहीं कर पाते। कुछ बच्चों को समूह में रहना पसंद होता है तो कुछ अकेले रहना पसन्द करते हैं। कई बच्चे छोटी-छोटी बातों पर भी भावनात्मक बदलाव दिखाते हैं। अत्यधिक संवेदनशील बच्चे जल्दी खुश होते हैं और जल्दी उदास भी। दूसरों को हुए दुख, किसी बुरे घटना या परिस्थिति से वे असहज हो सकते हैं और रो पड़े सकते हैं। कोलाहलपूर्ण वातावरण उन्हें विचलित कर देता है। खूबसूरत चीजें या किसी का दयालु व्यवहार उन्हें प्रेरित करता है। हालांकि, इस तरह के स्वभाव से उन्हें समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। कभी-कभी साथी या अन्य लोग उनकी संवेदनशीलता का मज़ाक उड़ाते हैं या उन्हें परेशान करते हैं।
ऐसे बच्चों की सहायता के लिए अभिभावकों को क्या करना चाहिए? – उनकी भावनाओं का सम्मान करें। – जब बच्चा रोए तो उसे चुप रहने के लिए डांटें नहीं। – उन्हें अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए हौसला दें। – समझाएं कि दूसरों के प्रति संवेदनशील होना एक अच्छा गुण है। – उनकी गहराई से सोचने की क्षमता को ताकत बताएं। – यदि कोई शिक्षक, परिवार के सदस्य या सहपाठी आपके बच्चे की संवेदनशीलता का मज़ाक उड़ाता है या अपमान करता है तो उसे रोकना जरूरी है। ऐसे व्यवहार का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए।