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अर्ली निर्वाचन घोषणा से लेकर निलंबन तक : एन्फा अपने ही फैसलों से पराजित

हाल ही में अर्ली निर्वाचन की घोषणा के बाद आंतरिक विवादों में फंसने और मामले के अदालत तक पहुंचने के कारण नेपाली फुटबॉल नकारात्मक रूप से चर्चा में रहा।

समाचार सारांश

  • राष्ट्रीय खेलकूद परिषद ने अखिल नेपाल फुटबल संघ को चुनाव प्रक्रिया नियमावली का पालन न करने के कारण तीन महीने के लिए निलंबित किया है।
  • एन्फा ने राखेप द्वारा दिए गए ११ निर्देशों का पालन न करते हुए माघ २८ को झापा में अर्ली चुनाव कराने का निर्णय लिया था।
  • निलंबन अवधि के दौरान एन्फा कोई भी फुटबॉल गतिविधि नहीं कर सकेगा और राखेप के निर्देशों को पूरा करना होगा।

११ चैत, काठमाडौँ। सत्ता पक्ष हमेशा खुद को सही मानता है और अपने सभी कार्यों को अच्छा समझता है चाहे वे अच्छे हों या बुरे। लेकिन उन्हें खराब पक्ष की जानकारी कम ही होती है।

बाहरी लोग सत्ता पक्ष की आलोचना करते हैं और सुधार की अपील करते हैं, पर सत्ता पक्ष विरोध को नगण्य मानता है। इससे स्थिति में जब तीव्र बदलाव आता है तब ही बड़े नुकसान दिखते हैं।

ठीक ऐसा ही हाल अखिल नेपाल फुटबल संघ (एन्फा) में देखा गया है।

नेपाल का सबसे बड़ा खेल संगठन फुटबॉल संघ है जिसे कई संस्थान अच्छे बुनियादी ढांचे और बजट के उदाहरण के रूप में देखते हैं, पर नेतृत्व द्वारा अभिभावक की जिम्मेदारी पूरी न करने के कारण कई समस्याएं सामने आई हैं।

हाल ही में घोषित अर्ली चुनाव के बाद फुटबॉल में विवाद बढ़ा और मामला अदालत तक पहुंचा।

मैदान के अंदर फुटबॉल खेल जारी था लेकिन खेल मैदान के बाहर की राजनीति के कारण नेपाली खेलकूद के कार्यकारी निकाय राष्ट्रीय खेलकूद परिषद (राखेप) और एन्फा के बीच पत्राचार तेज हो गया।

राखेप द्वारा मांगी गई स्पष्टीकरण न मिलने पर बुधवार को एन्फा को तीन महीने के लिए निलंबित करना पड़ा। अब एन्फा अपने ही फैसलों से खुद को भारी पड़ता देख रहा है।

खेलकूद विकास नियमावली २०७७ की धारा २९(२) के तहत राखेप की बैठक ने निलंबन का निर्णय लिया है।

अब तीन महीने तक एन्फा की कार्यसमिति निलंबित रहेगी।

फाइल तस्वीर

अर्ली चुनाव घोषणा से लेकर निलंबन तक की कहानी

निलंबन का मूल कारण एन्फा ने माघ १६ को घोषित किया गया अर्ली चुनाव है।

इस फैसले के बाद नेपाली फुटबॉल में बड़ा विवाद उभरा, जिसमें संघ के बाहर के लोग और क्लबों ने इसे नियमों के विपरीत बताया।

लेकिन एन्फा नेतृत्व ने बहुमत से लिए फैसले के तहत माघ २८ को झापा में साधारण सभा और अर्ली चुनाव कराने का दावा किया।

उसके बाद राखेप ने एन्फा को ११ बिंदुओं के निर्देश दिए लेकिन एन्फा ने उनका पालन नहीं किया, विवाद अदालत और चुनाव स्थगन तक पहुंच गया।

राखेप ने जिला स्तर से चुनाव कर के केंद्र में ले जाने का निर्देश दिया था, लेकिन एन्फा ने फिफा और एएफसी के निर्देशों के अनुसार करने का हवाला दिया और सही आचरण नहीं किया।

राखेप ने निर्देशों का पालन न करने और बिना स्वीकृति चुनाव आगे बढ़ाने के कारण कड़ा कदम उठाकर निलंबन किया।

फिर भी एन्फा ने चैत १३ को चुनाव कराने की योजना बनाई और फिफा-एएफसी के प्रतिनिधि नेपाल आए हैं।

इस संदर्भ में एन्फा के अध्यक्ष, महासचिव तथा प्रवक्ता से संपर्क के प्रयास विफल रहे।

एन्फा को निलंबित क्यों किया गया?

१. राष्ट्रीय खेलकूद विकास अधिनियम, २०७७ और नियमावली का पालन न करना और परिषद के निर्देशों की अवहेलना।

२. बिना स्वीकृति गैरकानूनी रूप से चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना।

३. राखेप के निर्देशों का पालन नहीं करना और पत्राचार में असंतोषजनक उत्तर देना।

४. स्वयं अनुपालन किए बिना अपने तरीके से कार्य करना।

५. राष्ट्रीय कानून की तुलना में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के निर्देशों को प्राथमिकता देना।

६. राष्ट्रीय खेलकूद परिषद की स्वीकृत विधान के अनुसार कर्तव्य नहीं पूरा करना।

७. नियामक संस्थाओं के लेखा-जोखा और विधान पालन के जवाब नहीं देना।

८. राष्ट्रीय खेलकूद विकास नियमावली के अनुरूप व्यवहार नहीं करना।

निलंबन के बाद क्या होगा?

राखेप ने बुधवार को एन्फा को तीन महीने के लिए निलंबित करने की सूचना दी है। एन्फा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

निलंबन काल में एन्फा कोई भी फुटबॉल संबंधित गतिविधि नहीं कर सकेगा, जिसका नेपाली फुटबॉल पर प्रभाव स्पष्ट होगा।

एन्फा ने पहले ही राष्ट्रीय लीग, शहीद स्मारक महिला लीग और निर्धारित नेपाल-हॉन्गकॉन्ग मैत्रीपूर्ण मैच को स्थगित कर दिया है।

नेपाल की महिला टीम थाईलैंड में होने वाले FIFA सीरीज २०२६ को भी इस निलंबन का असर पड़ेगा।

निलंबन फुकुआ होने की संभावना कितनी है?

राखेप ने केवल तीन महीने के लिए निलंबन किया है और इस दौरान यदि एन्फा सभी निर्देशों का पालन करता है तो निलंबन फुकुआ हो सकता है।

खेलकूद विकास अधिनियम २०७७ की धारा २९ (३) के अनुसार यदि निर्देशों का पालन हुआ तो परिषद निलंबन फुकुआ कर सकता है।

निलंबन फुकुआ के लिए क्या करना होगा?

राखेप द्वारा जारी ९ बिंदुओं के निर्देशों का पालन करते हुए परिषद को इस बारे में जानकारी देनी होगी, तभी फुकुआ संभव होगा।

एन्फा को पहले भी कई बार निर्देश पालन के लिए कहा गया था, पर न करने के कारण अब चुनौती और बढ़ गई है।

ये ९ बिंदु हैं :

१. राष्ट्रीय खेल संघ महासंघ के विधान में स्थिरता बनाए रखना और परिषद की स्वीकृति के बाद नया विधान लागू करना।

२. संघ के विधान में राष्ट्रीय खेलकूद विकास अधिनियम २०७७ की व्याख्या जोड़ना।

३. संघ के विधान में राष्ट्रीय खेलकूद विकास नियमावली २०७९ की व्याख्या स्पष्ट करना।

४. विधान में हर चार वर्ष लोकतांत्रिक चुनाव का प्रावधान रखना।

५. पदाधिकारी और सदस्यों के चुनाव नियम अनुसार करने की व्यवस्था।

६. संघ के प्रदेश और जिला स्तर संरचना बनाकर विधान में प्रतिनिधित्व व्यवस्था करना।

७. वित्तीय वर्ष समाप्ति के बाद तीन महीने के भीतर साधारण सभा आहूत करना और चार वर्ष में नियमित चुनाव करवाना।

८. आवश्यक संशोधन एवं सुधार लागू करना।

९. चुनाव सम्बन्धी विधान के अनुसार स्वीकृति प्राप्त कर प्रक्रिया अमल में लाना।

यदि निलंबन फुकुआ नहीं हुआ तो क्या होगा?

यदि एन्फा निर्देशों का पालन नहीं करता है तो राखेप तदर्थ समिति गठित कर सकता है।

खेलकूद विकास अधिनियम २०७७ की धारा २९ (४) के अनुसार ऐसी स्थिति में वर्तमान कार्यसमिति को भंग कर तीन महीने में नई समिति गठित करनी पड़ेगी।

यदि तदर्थ समिति भी तीन महीने में नई समिति नहीं बनाएगी तो परिषद संघ का पंजीकरण रद्द कर सकता है।

साथ ही परिषद संबंधित अंतरराष्ट्रीय संस्था, नेपाल ओलंपिक कमेटी तथा मंत्रालय को भी सूचित करेगा।

खेलकूद विकास अधिनियम २०७७ संघ को अपनी सफाई प्रस्तुत करने का अवसर भी देता है, जो न देने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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