
पाँचथर में पिछले वर्षों की तुलना में जल्दी रोपा गया चैते धान (तस्वीरें)
१२ चैत, पाँचथर। पूर्वी पहाड़ी जिले में इस वर्ष चैते धान पिछले वर्षों की तुलना में तेजी से रोपा गया है। फिदिम–२ के होक्माखोला के आसपास अधिकांश खेतों में चैते धान की रोपाई हो चुकी है।
यहां के किसान उपेन्द्र अर्याल के अनुसार पूर्व में १५ चैत के बाद ही रोपाई शुरू होती थी, लेकिन इस बार कई जगहों पर रोपाई पहले ही समाप्त हो चुकी है। ‘‘माघ महीने में बोया गया बीज जल्दी उग आया और रोपाई जल्दी हो गई। हम यहाँ कई वर्षों से खेती कर रहे हैं। इस बार गर्मी अधिक महसूस हुई है। पहले के मुकाबले अधिक गर्मी होने के कारण बीज जल्दी उगा है,’’ उन्होंने बताया।
खेत में मिली चन्द्रकुमारी श्रेष्ठ ने भी बताया कि इस बार धान जल्दी रोपा गया है। ‘‘यहां पानी की समस्या बड़ी है। जमीन गर्म होने पर बीज जल्दी उगता है। शायद इसी कारण भी रोपाई जल्दी हुई है,’’ उन्होंने कहा।
कुछ दिन पहले हुई वर्षा से चैते धान की खेती में सुविधा हुई है। औल क्षेत्र में चैते धान की खेती की जाती है। वहां दो बार धान उगाने की परंपरा है। पर्याप्त सिंचाई वाले स्थानों पर ही धान की खेती होती है।
कृषि ज्ञान केंद्र, पाँचथर के बाली संरक्षण अधिकारी केशर बहादुर मगराती ने बताया कि इस वर्ष पिछले वर्षों के मुकाबले कुछ सप्ताह पहले ही धान रोपना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘चैते धान की रोपाई चैत के पहले सप्ताह से ही शुरू हो गई है।’’ उनके अनुसार फिदिम नगरपालिका, फाल्गुनन्द, कुम्मायक, हिलिहाङ, मिक्लाजुङ क्षेत्रों में चैते धान की खेती चल रही है। ‘‘पिछले वर्ष पाँचथर में चैते धान की खेती कम हुई थी क्योंकि सिंचाई कल-कार्षक (कुलो) टूट जाने के कारण खेती में बाधा आई थी। इस बार कुलो की मरम्मत के बाद खेती बढ़ने की उम्मीद है,’’ उन्होंने कहा।
उनके मुताबिक, पिछले वर्ष चैते धान २,१३६ हेक्टेयर क्षेत्र में रोपा गया था।
