
जाँचबुझ आयोग की रिपोर्ट: केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक की भूमिका क्या है?
जेन जी आंदोलन संबंधी जाँचबुझ आयोग की रिपोर्ट लागू करने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और गृहमंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार किए जाने के बाद, इस रिपोर्ट में इन दोनों नेताओं की भूमिकाओं को लेकर व्यापक चिंता बढ़ गई है। सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर प्रकाशित करने से पहले ही यह रिपोर्ट मीडिया में अनौपचारिक रूप से लीक हो गई, जिसमें सरकार की पक्षपातपूर्ण भूमिका पर संकेत देते हुए कहा गया है कि “सुरक्षा स्थिति की जानकारी होते हुए भी समय पर आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि “भदौ २३ तारीख को गोलीबारी में कुछ लोगों की मौत हो चुकी थी, लेकिन उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री सहित किसी भी उच्च पदाधिकारी की सक्रिय पहल नहीं देखी गई और इस लापरवाही एवं उक्साहटपूर्ण व्यवहार के कारण भारी मानव क्षति हुई।” हालांकि, इस रिपोर्ट की आधिकारिक पुष्टि संबंधित अधिकारियों ने अभी तक नहीं की है और यह केवल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक हुई है।
रिपोर्ट में ओली और लेखक के साथ-साथ तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक चंद्रकुबेर खापुङ को भी समान स्तर पर लेकर कार्रवाई की सिफारिश की गई है, लेकिन खापुङ को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। रिपोर्ट में उल्लेख है, “सरकार के विरोधी प्रदर्शन में अत्यंत आवश्यक होने पर ही अंतिम बल (धातु की गोली) का उपयोग किया जाना चाहिए, यह गंभीर जिम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों की है।”
शुक्रवार को हुई मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में निर्णय लिया गया कि जाँचबुझ आयोग की रिपोर्ट लागू करने के लिए सुरक्षा विभाग से जुड़ी विषयों पर एक अध्ययन समिति गठित की जाएगी, जिसकी सिफारिशों के आधार पर और आयोग की अन्य सिफारिशों को तुरंत लागू किया जाएगा, जैसा कि सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने जानकारी दी है।