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ट्रम्प प्रशासन के विरोध में अमेरिका में ‘नो किंग्स’ आंदोलन का प्रदर्शन


१४ चैत, काठमांडू। अमेरिका के सभी ५० राज्यों और विश्व के अन्य १६ देशों में शनिवार को ‘नो किंग्स’ अभियान के तहत लाखों लोग सड़कों पर उतरे।

ट्रम्प प्रशासन की ‘तानाशाही’ शैली और अप्रवास नीति के खिलाफ यह प्रदर्शन अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन होने का आयोजकों ने दावा किया है।

देशभर ३,००० से अधिक स्थानों पर कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं, जिनमें श्रमिक यूनियन, ‘इंडिविज़िबल’ और ‘५०५०१’ जैसे जमीनी स्तर के संगठन भाग ले रहे हैं।

प्रदर्शन का मुख्य केंद्र मिनेपोलिस और सेन्ट पॉल, मिनेसोटा बनाया गया है। यह क्षेत्र हाल ही में अप्रवास एजेंट की कड़ी कार्रवाई और संघीय एजेंटों द्वारा मारे गए नागरिक रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी के न्याय के लिए ‘प्रतिरोध का प्रतीक’ बन चुका है।

सेन्ट पॉल की रैली में सीनेटर बर्नी सैंडर्स, प्रसिद्ध अभिनेत्री जेन फोंडा और गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन जैसे प्रमुख व्यक्तित्वों ने भाग लिया। बढ़ती महंगाई, गैस की बढ़ती कीमतें और ईरान के साथ ‘गैरकानूनी युद्ध’ के कारण अमेरिकी जनता में तीव्र रोष व्याप्त है।

सुरक्षा की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आयोजकों ने अहिंसात्मक प्रदर्शन पर जोर दिया है। हालांकि, प्रदर्शन स्थलों पर अप्रवास एजेंट की मौजूदगी और ‘एंटीफ़ा’ का आरोप लगाकर नियंत्रण की संभावना को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने प्रदर्शनकारियों को सावधान रहने की चेतावनी दी है।

ट्रम्प प्रशासन ने पहले ही ऐसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी जारी कर रखी है।

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