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इजरायल के विरोधी गैर-राज्यवादी संगठन: हिजबुल्लाह

लेबनान मुख्यालय वाले शिया मुस्लिम संगठन हिजबुल्लाह इजरायल के साथ संघर्ष में सशस्त्र और राजनीतिक दोनों भूमिकाओं में सक्रिय है। वर्ष २०२४ में हिजबुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की हत्या के बाद नया महासचिव नइम कासिम ने संगठन का नेतृत्व संभाला है। वर्ष २०२३ में हमास द्वारा इजरायल पर आक्रमण के बाद हिजबुल्लाह ने भी रॉकेट और ड्रोन के माध्यम से इजरायल पर हमले शुरू किए हैं। लेबनान में हिजबुल्लाह को ‘राज्य के भीतर राज्य’ के रूप में जाना जाता है। इसका गठन १९७५ से १९९० तक चले लेबनानी गृहयुद्ध के दौरान हुआ, जिसमें इसने शुरू से ही इजरायली अस्तित्व को अस्वीकार किया।

ईरान ने हिजबुल्लाह को सैन्य तकनीक और उपकरणों की मदद दी है। इसी कारण इसे ईरान का सबसे प्रभावशाली ‘प्रॉक्सी’ समूह माना जाता है। अमेरिका और कई अन्य देशों ने हिजबुल्लाह को आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता दी है। ७ अक्टूबर २०२३ को गाजा पट्टी से हमास ने इजरायल पर हमला किया था, इसके बाद इस समूह का नाम बार-बार पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण घटनाओं में सुनाई देता है। हिजबुल्लाह के रॉकेट और ड्रोन हमलों के जवाब में इजरायली सेना (आईडीएफ) ने और भी आक्रामक होकर लेबनान की जमीन पर हमले किए हैं।

२०२४ में आईडीएफ ने हिजबुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की हत्या की। इसके बाद आईडीएफ ने दक्षिणी लेबनान में स्थलव्यापी सैन्य कार्रवाई शुरू की। उसी वर्ष के अंत में युद्धविराम समझौता हुआ, जो अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हिजबुल्लाह ने तोड़ा था। २८ फरवरी २०२६ को अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खमनेई की हत्या हुई। इसके जवाब में हिजबुल्लाह ने इजरायल पर पुनः हमले किए और राजनीतिक सक्रियता को फिर से कायम रखा है।

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