
तारागाउँ नेक्स्ट में ‘फर्म्स ऑफ एब्स्ट्रैक्शन’ प्रदर्शनी का शुभारंभ
काठमाडौं। काठमाडौं के बौद्ध स्थित तारागाउँ नेक्स्ट में नेपाली एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग कला को प्रदर्शित करते हुए ‘फर्म्स ऑफ एब्स्ट्रैक्शन’ नामक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। यह प्रदर्शनी गुरुवार से शुरू होकर सोमवार तक जारी रहेगी। सराफ फाउंडेशन फर हिमालयन ट्रेडिशन एंड कल्चर के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी में नेपाल के 26 कलाकारों की 49 एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं। तारागाउँ नेक्स्ट के निदेशक रोशन मिश्र ने बताया कि नेपाली एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग कला का गहरा संबंध नेपाली इतिहास और परंपराओं से है। उन्होंने कहा, “इतिहास और परंपरा से जुड़ी इस कला को हम सभी के सामने लाना आवश्यक है।” उन्होंने आगे कहा, “इस प्रकार की प्रदर्शनी अद्भुत कलाकारों को पहचान दिलाने और अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।”
उन्होंने बताया कि युवाओं में भी एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग काफी लोकप्रिय है, इसलिए इस तरह की प्रदर्शनी से ज्ञान और समझ बढ़ाने में मदद मिलती है। निर्देशक मिश्र ने इस प्रदर्शनी को अब तक की सबसे बड़ी और सर्वाधिक प्रतिभागिता वाली प्रदर्शनी बताया।
नेपाली एब्स्ट्रैक्ट कला की शुरुआत 1960 के दशक में लैनसिंह बांदेल ने की थी। पेरिस में आधुनिक कला का अवलोकन कर लौटे बांदेल ने रंग, बनावट और भावनाओं के माध्यम से नेपाल में एक नई कला प्रवाह स्थापित की। इसके बाद गेहेन्द्रमान अमात्य, लक्ष्मण श्रेष्ठ, उत्तम नेपाली, गोविन्द डंगोल, कृष्ण मानन्धर, किरण मानन्धर, लया मैनाली, शरद रंजीत जैसे कलाकारों ने इस कला को निरंतरता दी। प्रदर्शनी में शामिल कलाकारों ने नेपाल के इतिहास, आध्यात्म, संस्कृति और प्रकृति को रंगों व कलात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत किया है। कई कलाकृतियों में ज्यामिति और वास्तुकला के प्रभाव भी दिखाई देते हैं। प्रदर्शनी ने स्वर्गीय लैनसिंह बांदेल, उत्तम नेपाली, बालकृष्ण सम, इन्द्र प्रधान, प्रशांत श्रेष्ठ समेत अमूर्त कला के क्षेत्र में योगदान देने वाले पुरानी पीढ़ी के कलाकारों को विशेष सम्मान से नवाज़ा है।
प्रदर्शनी में भाग लेने वाले कलाकारों में बिधाता केसी, नविन्द्रमाण राजभण्डारी, विजय महर्जन, एनबी गुरुङ, विनोद प्रधान, नेमबहादुर तामांग, चन्द्र श्रेष्ठ, प्रमिला बज्राचार्य, गोविन्द डंगोल, रमेश खनाल शामिल हैं। इसके अलावा जीवन राजोपाध्याय, रत्नकाजी शाक्य, किरण मानन्धर, रीता मानन्धर, केके कर्माचार्य, सागर मानन्धर, कृष्ण मानन्धर, संगीत श्रेष्ठ, लया मैनाली, शरद रंजीत, मदन चित्रकार, सुनिता राना, मुकेश मल्ल, सुष्मा राजभण्डारी, नबेन्द्र लिम्बू और विजय थापा भी इस प्रदर्शनी में प्रतिभागी हैं। आयोजकों और निदेशक मिश्र के अनुसार नेपाल में लगभग 65 वर्षों से एब्स्ट्रैक्ट कला का अभ्यास हो रहा है, लेकिन इस क्षेत्र में विशेष चर्चा कम हुई है और ध्यान भी कम मिला है।