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स्वामित्व वापसी के लिए प्रधानमंत्री को कावा मेयर का पत्र

समाचार सारांश

  • धरान उपमहानगरपालिकामा नगर अस्पताल न होने के कारण लगभग 2 लाख की आबादी बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान में उपचार के लिए बाध्य है।
  • पुराने धरान अस्पताल की जमीन बीपी प्रतिष्ठान के नाम होने से नगर अस्पताल स्थापना में विवाद छिड़ा है और जमीन वापसी की मांग हो रही है।
  • धरान के कार्यवाहक मेयर बेघाले ने प्रधानमन्त्री को पत्र लिख कर पुराने अस्पताल की जमीन नगरपालिका को वापिस दिलाने का अनुरोध किया है।

25 चैत, धरान। लगभग 2 लाख आबादी वाले धरान उपमहानगरपालिकामें नगर अस्पताल का अभाव है। सामान्य उपचार के लिए भी नगर वासियों को बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान जाना पड़ता है। इस अस्पताल में रोजाना 4 हजार मरीज उपचार के लिए आते हैं और सामान्य सेवा लेने के लिए पूरे दिन लाइन लगाना पड़ता है।

स्वास्थ्य बीमा वाले लोग बीपी प्रतिष्ठान को प्राथमिक सेवा केन्द्र मानते हैं, लेकिन अब यह सेवा केवल तीन महीने ही बाकी है। उसके बाद बीमित लोग वापस उसी सेवा का लाभ कहां से लेंगे, यह अनिश्चियत है।

तीन महीने बाद धरान के लगभग दो लाख नागरिकों को अन्य सरकारी अस्पतालों में पहुँचकर प्राथमिक सेवा का सिफारिश पत्र बनवाना होगा और बीपी प्रतिष्ठान द्वारा निर्धारित शुल्क देकर उपचार लेना होगा।

स्वास्थ्य बीमा के तहत प्राथमिक सिफारिश करने वाला सरकारी अस्पताल नगर में न होने के कारण पुराना धरान अस्पताल और उसकी जमीन विवाद का कारण बनी है।

राणाकाल में स्थापित और अब खंडहर बने धरान अस्पताल की जमीन पर नगर अस्पताल बनाने की योजना आई है, जिससे जमीन का विवाद और बढ़ गया है। उक्त जमीन फिलहाल बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान के स्वामित्व में है।

धरान-16 में स्थित पंचायत आधारभूत विद्यालय (भकारी स्कूल) को चन्द्र संस्कृत माध्यमिक विद्यालय में विलय कर वहां धरान नगर अस्पताल चलाने की बात सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से फैलने पर जमीन की चर्चा बढ़ी है।

राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक नेता उपमहानगरपालिका के कार्यवाहक मेयर आइन्द्रविक्रम बेघाले पर इस जमीन को वापस लेकर नगर अस्पताल स्थापित करने का दबाव दे रहे हैं।

नगर अस्पताल संचालन के लिए धरान उपमहानगरपालिका में हुई चर्चा

धरान के अधिकांश हितधारकों ने पुरानी अस्पताल की जमीन नगरपालिका को लौटाकर वहीँ नगर अस्पताल बनवाने की मांग की है। भकारी स्कूल में अस्पताल चलाने के प्रस्ताव पर संदेह जताते हुए उन्होंने पुरानी अस्पताल की जमीन की स्वामित्व वापसी के लिए आवश्यक मंत्रालय जाकर खर्च खुद वहन करने और आंदोलन करने को तैयार रहने की बात कही है।

नागरिक समाज की सलाह पर धरान के कार्यवाहक मेयर बेघाले ने कहा, “मैं भी इस पक्ष में हूँ कि पुराने अस्पताल के स्थान पर ही नगर अस्पताल बनना चाहिए। लेकिन 2074 साल में यह जमीन बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान के नाम दर्ज होने की सच्चाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

पुराने धरान अस्पताल की जमीन

राणा प्रधानमंत्री जुद्धशमशेर के दौर में 1992 साल में समाजसेवी सुब्बा रत्नप्रसाद श्रेष्ठ ने कलकत्ता से चिकित्सक मंगाकर उपचार सेवा को सरल बनाया।

सुब्बा रत्नप्रसाद को धरान बाजार विस्तारक माना जाता है। चिकित्सक आने के बाद छताचोक के पास की जमीन पर धरान अस्पताल बनाने का निर्णय हुआ। स्थानीय समुदाय ने अस्पताल के लिए जमीन दान की। शुरू में एक छोटा अस्पताल चला। दान की गई जमीन की सटीक माप रिकॉर्ड में नहीं है, लेकिन अब लगभग एक बिघा 13 कठ्ठा जमीन श्रेष्ठ परिवार के नाम दिखती है।

1950 के दशक में इस अस्पताल को सरकारी अस्पताल घोषित किया गया। स्थानीय विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र शर्मा ने कहा, “1970 में यह जमीन धरान अस्पताल के नाम नापी करके ली गई।”

1993 से धरान में बीपी प्रतिष्ठान स्थापित होने के बाद धरान नगर अस्पताल की सेवाएँ भी बीपी प्रतिष्ठान को दे दी गईं। चूंकि यह स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन था, जमीन का स्वामित्व भी मंत्रालय को दिया गया।

राणा सरकार और आम लोगों की पहल से संचालित इस अस्पताल को विराटनगर के धनी जगन्नाथ डेढराज के परिवार ने 2026 साल माघ 18 को 2 लाख 11 हजार रुपए दान दे कर मातृसेवा सदन (प्रसूति भवन) बनवाया।

शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री कीर्तिनिधि विष्ट ने किया था और उद्घाटन 2029 जेठ 7 को तत्कालीन रानी ऐश्वर्य ने राजा वीरेन्द्र की मौजूदगी में किया था। फिलहाल उक्त भवन खंडहर में है।

अस्पताल को स्तरीय बनाते हुए पूर्वांचल क्षेत्रीय अस्पताल के रूप में विकसित किया गया। 1993 में बीपी प्रतिष्ठान के स्थापना के बाद क्षेत्रीय अस्पताल विराटनगर स्थानांतरित हो गया। अस्पताल की मशीनरी और जनशक्ति भी वहां ले गई गई।

धरान अस्पताल भुलाए जाने लगे। नगरपालिका के जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दल और नगरवासी भी गुमराह हुए। जमीन बेकार पड़ी, कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर घर बना लिए। प्रसूति भवन खंडहर हुआ और झाड़ी से भरा होने के कारण यह नशेड़ी और अवांछित गतिविधियों का केन्द्र बन गया।

धरान में सरकारी नगर अस्पताल की आवश्यकता महसूस हो रही थी, छताचोक में पुरानी अस्पताल ही नगर अस्पताल बनाने की तैयारी हो रही थी, तभी स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2074 साल में ही जमीन बीपी प्रतिष्ठान के नाम हस्तांतरण कर दी। यह तथ्य सार्वजनिक हुआ।

अब नगर अस्पताल के लिए जमीन का स्वामित्व नगरपालिका में लौटाने की मांग के दबाव में धरान के कावा मेयर बेघाले की भूमिका अहम है।

मेयर बेघाले ने बीपी प्रतिष्ठान के उपकुलपति प्रो. डॉ. विक्रम श्रेष्ठ से जमीन वापस लेने का आग्रह किया, लेकिन उपकुलपति ने कह दिया कि उनके पास उसे लौटाने की क्षमता नहीं है।

उपकुलपति श्रेष्ठ सुब्बा रत्नप्रसाद के पौत्र हैं, जिन्होंने राणाकाल में कोलकाता से चिकित्सक लाकर धरान में आधुनिक स्वास्थ्य सेवा प्रारंभ की थी।

बेघाले ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा

नागरिक समाज के दबाव में धरान के कावा मेयर बेघाले ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को धरान नगर अस्पताल स्थापना हेतु पुरानी जमीन को वापस दिलाने के लिए पत्र लिखा है। प्रधानमंत्री सचिवालय ने इस पत्र को प्राप्त करने की जानकारी दी है।

नागरिक समाज और बुद्धिजीवियों के तरफ से डॉ. राजेंद्र शर्मा ने पुराने अस्पताल की जमीन पर धरान अस्पताल निर्माण के लिए मंत्रालय या मन्त्रिपरिषद का निर्णय आवश्यक बताने के बाद बेघाले ने प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र लिखा।

पुराने धरान अस्पताल की जमीन बीपी प्रतिष्ठान के नाम होने से इसे धरान नगर अस्पताल के नाम में वापसी कराने की व्यवस्था करने का निवेदन किया है। बेघाले ने कहा, “स्वास्थ्य सेवा से कोई वंचित न हो, इस उद्देश्य से पुरानी अस्पताल की जमीन उपलब्ध कराने के लिए अनुरोध पत्र भेजा गया है।”

मन्त्रिपरिषद के 2075 साउन 11 के निर्णय अनुसार वह जमीन बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान के नाम स्थानांतरित की गई है, जिससे कानूनी अड़चन आ रही है। इसलिए आवश्यक प्रबंध कराने के लिए प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया है।

बेघाले ने आगे कहा, “इस विषय पर धरान के प्रतिनिधिमंडल काठमांडू जाने को तैयार है। जमीन वापसी का निर्णय केवल मन्त्रिपरिषद से संभव है इसलिए प्रधानमंत्री तक यह पत्र भेजा गया है।”

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