
सरकार जल्दी पकने वाले धान की जातों की खोज कर रही है
26 चैत्र, धनुषा। धनुषा के हर्दिनाथ में स्थित राष्ट्रीय धानबाली अनुसंधान कार्यक्रम ने कम समय में पकने और उच्च उत्पादन देने वाली धान की विभिन्न जातों के परीक्षण शुरू किए हैं। ‘कोपिया परियोजना’ के तहत धनुषा के बटेश्वर में किसानों के साथ सहयोग में यह परीक्षण चलाया जा रहा है। नेपाल कृषि अनुसंधान परिषद् (नार्क) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पल्लवी सिंह के अनुसार जलवायु परिवर्तन से कृषि प्रणाली में आए चुनौतियों को समाधान करने के लिए जल्दी पकने और अधिक उत्पादन क्षमता वाली धान जातों की खोज और परीक्षण शुरू किया गया है। उन्होंने कहा, ‘यदि परीक्षण सफल होता है तो न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि समय पर फसल कटाई भी संभव होगी जिससे किसानों को सीधे लाभ होगा।’
सिंह के अनुसार किसानों के अनुभवों को अनुसंधान से जोड़ने के लिए बटेश्वर में सीधे खेतों में धान के पौधे लगाये गए हैं। परीक्षण में सहभागी किसान अपने खेतों में विभिन्न जातों के धान लगाकर उनकी वृद्धि, उत्पादन क्षमता और रोगप्रतिरोधी स्थिति का निरीक्षण कर रहे हैं। किसानों के अनुभव, आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर उपयुक्त जातों के चयन की व्यवस्था की गई है। अनुसंधान कार्यक्रम हर्दिनाथ के सूचना अधिकारी एवं वरिष्ठ तकनीशियन रवेन्द्रप्रसाद साह ने बताया कि अब तक कम समय में उत्पाद देने वाले धान में ‘हर्दिनाथ–1’ प्रमुख जाति है। साह ने कहा कि हर्दिनाथ–1 जाति का धान लगभग 105 दिनों में पक जाता है।
उन्होंने कहा, ‘इससे कम अवधि में पकने वाली धान जाति की पहचान करने के उद्देश्य से परीक्षण चलाया जा रहा है।’ अनुसंधान केंद्र के परिसर के साथ ही चयनित किसानों के खेतों में भी अलग-अलग धान जातों के पौधे लगाकर परीक्षण किया जा रहा है। इससे प्रयोगशाला तक सीमित अनुसंधान को खेतों तक पहुंचाकर किसानों के व्यावहारिक अनुभवों को अनुसंधान प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। स्थानीय जलवायु के अनुसार अनुकूल, कम पानी में उत्पादन देने वाली और जलवायु परिवर्तन के लिए अनुकूलित धान जातियों की पहचान में यह परीक्षण सहायक होगा। विशेषकर चैते धान के उत्पादन को बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है। सूचना अधिकारी साह ने कहा कि इससे पूरे वर्ष धान उत्पादन प्रणाली को मजबूत बनाने, खाद्य सुरक्षा में योगदान देने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। –रासस