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मध्यपूर्व संकट के बीच मूल्य वृद्धि के बावजूद निगम को हुआ भारी घाटा, ऋण लेने की संभावना बढ़ी

पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर होने के बावजूद नेपाल आयल निगम को प्रति पखवाड़े लगभग ८ अरब रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है, यह जानकारी निगम के प्रमुख ने दी है। यदि मध्यपूर्व में जारी तनाव सामान्य नहीं हुआ तो सरकार या वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने की स्थिति बन सकती है, ऐसा उन्होंने चेतावनी दी है।

अमेरिका और इज़राइल द्वारा पिछले महीने ईरान पर हमले के बाद नेपाल आयल निगम ने कम से कम ४ बार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं। शुक्रवार मध्यरात्रि से लागू नई कीमतों के अनुसार प्रति लीटर पेट्रोल में १७ रुपए, डीजल और मिट्टी के तेल में २५ रुपए, खाना पकाने वाले गैस सिलेंडर में १०० रुपए तथा हवाई ईंधन में प्रति लीटर ६ रुपए की वृद्धि की गई है, लेकिन इसके बावजूद निगम को प्रति पखवाड़े ७ अरब ८१ करोड़ रुपए का घाटा होने का अनुमान है।

हाल की बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत २१६.५० से २१९ रुपए के बीच पहुंच गई है जबकि डीजल का मूल्य २०४ से २०७ रुपए कायम हुआ है। उपभोक्ताओं को १४.२ किलोग्राम वजन वाले गैस सिलेंडर २०१० रुपए में खरीदना होगा। कुछ दिन पहले मंत्रिपरिषद् ने पेट्रोल, डीजल और मिट्टी के तेल के आयात पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी और आधारभूत विकास कर में ५० प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया था।

नेपाल आयल निगम के कार्यकारी निदेशक चণ্ডिकाप्रसाद भट्ट ने शुक्रवार को जारी किए गए सार्वजनिक आह्वान में ईंधन की खपत कम करने एवं संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा, “यदि एक बाइक चालक रोजाना एक लीटर पेट्रोल बचाता है तो सरकार को प्रतिदिन लगभग २२ करोड़ रुपए की बचत होगी।” उन्होंने आगे कहा, “१५ दिनों में ३ अरब ९० करोड़ रुपए की बचत की संभावना है, इसलिए सभी से पेट्रोलियम उत्पादों में संयम बरतने का आग्रह है।”

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