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केराको मूल्य नबढाएको किसानको स्पष्टीकरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य तोक्न र बजार अनुगमन माग

किसान का केरा मूल्य नबढ़ाने का स्पष्टिकरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार नियमन की मांग

नेपाल केरा उत्पादक महासंघ ने स्पष्ट किया है कि किसानों ने केरा का मूल्य नहीं बढ़ाया है, बल्कि बाजार में दलालों ने कीमत अत्यधिक बढ़ाई है। महासंघ के अध्यक्ष विष्णुहरि पन्त ने बताया कि किसान मालभोग केरा प्रति दर्जन ७० से ८५ रुपये और हाइब्रिड केरा ५० से ६० रुपये में बेच रहे हैं। महासंघ ने सरकार से बाजार निगरानी, न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण और कृषि बीमा प्रणाली में सुधार की मांग की है। ८ वैशाख, काठमाडौं।

केरा उत्पादक किसानों ने केरा के मूल्य नबढ़ाने का स्पष्ट करते हुए नेपाल केरा उत्पादक महासंघ ने कहा है कि बाजार में दलालों के अत्याचार के कारण केरा किसान और उपभोक्ता दोनों ठगे जा रहे हैं। किसान प्रति दर्जन ५० से ८५ रुपये में केरा बेचते हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को खुदरा बाजारों में ४ सौ रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं, जिससे गुस्सा और नाखुशी बढ़ी है। इस कारण महासंघ ने तत्काल बाजार नियमन की मांग सरकार से की है।

महासंघ की तदर्थ समिति के अध्यक्ष विष्णुहरि पन्त के अनुसार, पिछले १५-१६ वर्षों में किसान को प्रति दर्जन केरा का मूल्य मात्र ६ से ८ रुपये ही बढ़ा है, जबकि बाजार में उपभोक्ता मूल्य काफी बढ़ा है। ‘‘हम अपनी भुजामा मालभोग केरा प्रति दर्जन ७० से ८५ रुपये और हाइब्रिड केरा ५० से ६० रुपये में बेच रहे हैं, लेकिन बाजार में कृत्रिम रूप से अभाव पैदा करके ३५० से ४०० रुपये तक बेचा जा रहा है,’’ अध्यक्ष पन्त ने बताया।

महासंघ के अनुसार नेपाल में वार्षिक लगभग ९ लाख टन केरा की मांग है, लेकिन वर्तमान में करीब ७ लाख टन ही देश में उत्पादन हो रहा है। २ लाख टन की कमी के कारण विशेषकर वैशाख, जेठ और असार महीनों में बाजार में केरा की कमी महसूस होती है। ‘‘वर्तमान सत्र में उत्पादन कुछ कम है, लेकिन साउन से पुस तक नेपाली केरा पूरी तरह बाजार की मांग को पूरा करेगा,’’ अध्यक्ष पन्त ने कहा।

देश भर में वर्तमान में १५,७०० हेक्टेयर क्षेत्र में केरा की खेती हो रही है। यदि ६ से ७ हजार हेक्टेयर क्षेत्र और जोड़ा जाए तो केरा में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है, उन्होंने कहा। सरकार ने केरा की खतरनाक बीमारी ‘पानामा टीआर फोर’ के जोखिम को ध्यान में रखते हुए जैव सुरक्षा के लिए भारतीय केरा के आयात पर रोक लगा रखी है।

महासंघ ने बाजार में दलालों के अत्यधिक हस्तक्षेप को रोकने के लिए शीघ्र प्रभावी बाजार निगरानी की आवश्यकता जताई है और विभिन्न मांगें सरकार के समक्ष रखी हैं। किसान और उपभोक्ता दोनों को ठगा न जाने देने के लिए केरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण, कृषि बीमा प्रणाली का सरल एवं प्रभावी बनाना, उच्च गुणवत्ता वाले टिश्युकल्चर पौधे तथा रासायनिक उर्वरकों की सरल उपलब्धता आवश्यक होने पर महासंघ ने जोर दिया है।

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