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सम्पत्ति जांच आयोग का कार्यालय स्थापित, औपचारिक रूप से कार्य शुरू

सरकार ने भ्रष्टाचार और दंडहीनता नियंत्रण करने के उद्देश्य से सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रकुमार भंडारी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय सम्पत्ति जांच आयोग का गठन किया है। आयोग ने आज से औपचारिक रूप से कार्य शुरू किया है और सार्वजनिक पदाधिकारियों तथा उनके परिवारों की सम्पत्ति विवरण एकत्रित कर गहन जांच करेगा। आयोग को अपनी जांच रिपोर्ट प्रधानमंत्री एवं मन्त्रिपरिषद के कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी और सरकार को ४५ दिनों के भीतर इसे लागू करना होगा।

९ वैशाख, काठमांडू। भ्रष्टाचार और दंडहीनता कम करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा गठित ‘सम्पत्ति जांच आयोग’ ने आज से औपचारिक रूप से अपना कार्य आरंभ कर दिया है। वैशाख २ को हुई मन्त्रिपरिषद की बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रकुमार भंडारी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय आयोग गठन किया गया था। आयोग का कार्यालय केशरमहल में स्थापित किया गया है। नव नियुक्त अध्यक्ष भंडारी ने आज ही प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल के समक्ष पद और गोपनीयता की शपथ ली।

अन्य सदस्यों में तत्कालीन पुनरावेदन अदालत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पुरुषोत्तम पराजुली, उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश चण्डीराज ढकाल, पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक गणेश केसी और चार्टर्ड एकाउंटेंट प्रकाश लम्साल शामिल हैं। अध्यक्ष भंडारी ने इन्हें भी शपथ दिलाई है। जांच अधिनियम २०२६ के तहत काम करने वाली आयोग की कार्यप्रणाली (टीओआर) भी स्वीकृत हो चुकी है।

एक वर्ष के कार्यकाल के लिए गठित इस आयोग का कार्य सार्वजनिक पद पर वर्तमान में कार्यरत, सेवानिवृत्त या पद से हट चुके पदाधिकारियों और उनके परिवारों की देश-विदेश में स्थित सम्पत्तियों की जानकारी जुटाकर गहन जांच करना होगा। आयोग को किसी भी व्यक्ति की जांच पूरी होते ही रिपोर्ट प्रधानमंत्री एवं मन्त्रिपरिषद् के कार्यालय में प्रदान करनी होगी और सरकार को ४५ दिनों के भीतर उसे मजबूरन लागू करना होगा। आयोग ने पूर्ण स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं व्यावसायिक तरीके से कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई है तथा किसी के दबाव या प्रभाव में आए बिना जिम्मेदारी निभाने का आश्वासन दिया है।

आयोग लिखित, मौखिक, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम, सामाजिक नेटवर्किंग या किसी अन्य किसी भी माध्यम से शिकायतें एकत्रित करेगा। आवश्यकतानुसार विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सलाह ले सकता है, लेकिन हित-विरोध से ग्रस्त विशेषज्ञों को आमंत्रित करने की अनुमति नहीं होगी, जिसके लिए सख्त नियम बनाये गए हैं। यह आयोग २०८२ चैत १३ को हुई मन्त्रिपरिषद की बैठक में स्वीकृत ‘शासन सुधार से जुड़ी १०० कार्यसूची’ के अंक ४३ में उल्लिखित भ्रष्टाचार विरोधी प्रतिबद्धता के अनुरूप गठित किया गया है। वर्तमान में प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय द्वारा आयोग में कार्यरत ३२ आवश्यक कर्मचारियों के चयन की प्रक्रिया जारी है। आयोग के कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए कर्मचारियों को अपनी सम्पत्ति विवरण एक सप्ताह के भीतर सार्वजनिक करने का नियम बनाया गया है।

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