
तेल मूल्य वृद्धि की सूचना लीक होने पर आयल निगम को करोड़ों का घाटा
नेपाल आयल निगम ने मूल्य वृद्धि से पहले पेट्रोल पंपों को दैनिक औसत के लगभग दोगुना तेल वितरण करने के आंकड़े सार्वजनिक किए हैं। १ चैत को पेट्रोल में १५ और डिजेल में १० रुपये की मूल्य वृद्धि के बाद ईंधन की बिक्री में गिरावट आई, बावजूद इसके डीलरों ने बड़ी मात्रा में तेल खरीदा। उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता माधव तिमल्सिनाले निगम की अनियमितता की जांच के लिए सार्वजनिक लेखा समिति और भ्रष्टाचार अनुसन्धान आयोग से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
१० वैशाख, काठमांडू। सामान्यतया नेपाल आयल निगम प्रतिदिन पेट्रोल पंपों को २० से २५ लाख लीटर पेट्रोल और ४५ से ५० लाख लीटर डिजेल वितरित करता है। लेकिन, २८ फागुन २०८२ को निगम ने ३० लाख ५५ हजार लीटर पेट्रोल तथा ८३ लाख ४५ हजार लीटर डिजेल दिया। २९ फागुन को पेट्रोल पंपों ने ४२ लाख ५२ हजार लीटर पेट्रोल और ९६ लाख ६५ हजार लीटर डिजेल उठाए। ३० फागुन शनिवार होने के कारण ईंधन बिक्री नहीं हुई। १ चैत को ४८ लाख ६ हजार लीटर पेट्रोल और ९० लाख ९० हजार लीटर डिजेल बिक्री हुई।
तीन दिन लगातार निगम ने औसत से दोगुना तेल वितरण किया, जिसके बाद १ चैत की रात को पेट्रोल और डिजेल के दाम में भारी वृद्धि की गई। निगम का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक आई कीमत वृद्धि तथा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा मूल्य बढ़ाए जाने की वजह थी। लेकिन, व्यापारियों और निगम के कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के दामों की जानकारी होते हुए भी तीन दिनों में डीलरों ने अनुचित मात्रा में तेल जमा किया। यह तथ्यांक निगम को करोड़ों का घाटा होने की पुष्टि करता है।
निगम ने १ चैत को मूल्य वृद्धि के बाद वित्तीय विवरण जारी किया था जिसमें बताया गया कि कीमत बढ़ने के बावजूद संस्थान को १५ दिनों में ३ अरब ९३ करोड़ रुपये का घाटा होना पड़ेगा। आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि घाटा सिर्फ अंतरराष्ट्रीय दामों के कारण नहीं, बल्कि मूल्य वृद्धि के पूर्व डीलरों ने ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ कर गैरकानूनी लाभ कमाया, जिससे निगम को अतिरिक्त करोड़ों का नुकसान हुआ।
निगम का तर्क है कि “शनिवार अवकाश होने के कारण शुक्रवार और रविवार को तेल की मांग अधिक होती है।” लेकिन आंकड़े बताते हैं कि मूल्य बढ़ने से पहले डीलरों ने औसत से दोगुना तेल उठाया था और मूल्य वृद्धि के बाद बिक्री कम हो गई। १ चैत को मूल्य बढ़ने के बाद पेट्रोल की बिक्री १६ लाख १४ हजार लीटर और डिजेल ५५ लाख लीटर पर गिर गई। ३ चैत को पेट्रोल २३ लाख ४५ हजार और डिजेल ५१ लाख ७० हजार लीटर रही, जबकि ४ चैत को पेट्रोल १३ लाख ७८ हजार और डिजेल ४२ लाख १० हजार लीटर तक सीमित हुई।
ऐसा क्यों हुआ? सरल उत्तरः डीलरों ने मूल्य वृद्धि से पहले सस्ते दाम १५४ रुपये प्रति लीटर में तेल खरीदकर महंगे १७२ रुपये में बेचकर बड़ा मुनाफा कमाया। इससे निगम का पैसा फिजूल खर्च हुआ। बाद के दिनों में तेल की बिक्री सामान्य स्थिति में वापस आ गई। ५ चैत को पेट्रोल २२ लाख २६ हजार और डिजेल ५४ लाख ९३ हजार लीटर, जबकि ६ चैत को पेट्रोल २४ लाख ९० हजार और डिजेल ६६ लाख ४० हजार लीटर बिक्री हुई।
निगम आमतौर पर हर अंग्रेजी महीने के १ और १६ तारीख को IOC से मूल्य सूची मिलने पर नेपाल में मूल्य समायोजन करता है। १ चैत को मूल्य वृद्धि के बाद ११ चैत को दोबारा मूल्य बढ़ा दिया गया और यह सूचनाएं व्यापारियों को पहले से लीक हुईं लगती हैं। १० चैत को डिजेल की बिक्री ६० लाख लीटर से अधिक हुई, जबकि ११ को ६१ लाख लीटर जुटा। उसी दिन शाम निगम ने पेट्रोल और डिजेल दोनों पर १५-१५ रुपये की वृद्धि लागू की और अगले दिन से ईंधन बिक्री सामान्य हुई। अब निगम का “शुक्रवार को अधिक बिक्री” का तर्क लागू नहीं होता।
१३ चैत, शुक्रवार होने के बावजूद मूल्य पहले से बढ़ जाने की वजह से व्यापारियों ने तेल जमा नहीं किया और बिक्री गिर कर पेट्रोल १२ लाख ३७ हजार तथा डिजेल २३ लाख ३० हजार लीटर रह गई। १४ चैत को शनिवार आंशिक खुला था, केवल एक लाख लीटर के आसपास तेल की बिक्री हुई। चैत के मध्य में फिर एक बार गैर सामान्य खेलखिलाड़ी शुरू हुए। १५ चैत, रविवार को पेट्रोल ३७ लाख ३६ हजार और डिजेल ९७ लाख ३० हजार लीटर की असामान्य बिक्री हुई। १६ चैत सोमवार को भी बिक्री अधिक रही (पेट्रोल २९ लाख, डिजेल ७५ लाख लीटर), १७ चैत मंगलवार को हवाई ईंधन की कीमत बढ़ने पर पेट्रोल ३१ लाख ७४ हजार और डिजेल ६८ लाख ५० हजार लीटर वितरण हुआ।
१८ चैत बुधवार को बिक्री घट कर पेट्रोल मात्र ९ लाख ५५ हजार और डिजेल ३६ लाख २५ हजार लीटर रही। १९ चैत, गुरुवार को १५ रुपये मूल्य वृद्धि वाले दिन पेट्रोल २१ लाख १४ हजार और डिजेल ५८ लाख लीटर बिका, जबकि २० चैत शुक्रवार को क्रमशः २० लाख ८६ हजार और ४९ लाख लीटर की बिक्री हुई। २१ चैत शनिवार के अवकाश के बाद २२ चैत रविवार को पेट्रोल २६ लाख ७२ हजार और डिजेल ६५ लाख ७ हजार लीटर की बिक्री हुई।
२३ से २५ चैत तक दैनिक बिक्री क्रमशः घटती गई, पेट्रोल २१ लाख से १४ लाख लीटर और डिजेल ४९ लाख से ३२ लाख लीटर रह गई। नए साल की शुरुआत में डिजेल में ३० रुपये की मूल्य खेलबाड़ २ वैशाख को स्पष्ट हुई। नवीन वर्ष १ वैशाख की छुट्टी के बाद २ वैशाख को निगम ने पेट्रोल का मूल्य स्थिर रखते हुए केवल डिजेल में ३० रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की। मूल्य वृद्धि से पहले उसी दिन पेट्रोल की बिक्री ३४ लाख ६ हजार और डिजेल ६२ लाख ६८ हजार लीटर थी। इससे बाद ३ वैशाख को डिजेल की बिक्री गिरकर ४२ लाख ८२ हजार और पेट्रोल २५ लाख ५८ हजार लीटर रह गई।
निगम का ‘ERP’ सॉफ्टवेयर साफ तौर पर बताता है कि किस पंप की कितनी भंडारण क्षमता है और दैनिक औसत कितनी बिक्री होती है। आंकड़े दर्शाते हैं कि सामान्य दिनों में बिक्री सामान्य होती है, लेकिन मूल्य वृद्धि से पहले पंप पर असामान्य मांग होती है और निगम के कर्मचारी मिलकर उतनी मात्रा उपलब्ध कराते हैं। निगम मूल्य वृद्धि से पहले इस असामान्य बिक्री को रोकने के लिए ‘औसत कोटा प्रणाली’ सख्ती से लागू नहीं करता। इस प्रकार सूचना लीक कर सस्ते में तेल खरीदकर महंगे दाम पर बेचने से व्यापारियों को करोड़ों का लाभ होता है और निगम को भारी घाटा उठाना पड़ता है।
उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि निगम घाटा वहन कराते हुए आम जनता को महंगे ईंधन के जाल में फंसाया जा रहा है। माधव तिमल्सिनाले मूल्य वृद्धि से पहले अनियमित तेल वितरण को ‘गंभीर अपराध’ मानते हुए संसद की सार्वजनिक लेखा समिति, उपसमिति, भ्रष्टाचार निवारण आयोग और प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच और कार्रवाई का दबाव बनाया है। उनके अनुसार ‘राज्य और उपभोक्ताओं को घाटा पहुंचाकर कुछ निजी व्यक्तियों को फायदा पहुंचाना तेल वितरण के विरोधाभासी कार्य का हिस्सा है, इसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।’
उन्होंने बताया कि उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय के सचिव तथा निगम के संचालक समिति के अध्यक्ष समेत शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदार हैं। निगम द्वारा मूल्य वृद्धि से पहले कितनी मात्रा में तेल वितरित किया गया और सामान्य दिनों में मांग कितनी थी, इस पर जांच आवश्यक है।
नेपाल आयल निगम के कार्यकारी निदेशक डा. चंडिका प्रसाद भट्ट ने प्रारंभ में कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी, लेकिन अगर मूल्य वृद्धि से पहले पंपों को अत्यधिक तेल वितरण पाया गया तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए कहा कि वे तुरंत आंकड़े देख कर जांच करेंगे।
डा. भट्ट ने कहा, ‘मुझे ऐसा नहीं लगा, लेकिन मैं डिपो के रिकॉर्ड देखूंगा और अगर पाया गया तो जांच कर कड़ी कार्रवाई करेंगे।’ उन्होंने दावा किया कि निगम ईंधन वितरण में नियंत्रण और कटौती भी कर रहा है। वे बताते हैं, ‘हम बिक्री में कटौती कर रहे हैं और पिछले वित्त वर्ष की तुलना में २० प्रतिशत कम तेल वितरण करने के निर्देश प्राप्त हुए हैं।’
डा. भट्ट ने बताया कि मूल्य वृद्धि से पहले डीलरों द्वारा बड़ी मात्रा में तेल खरीदने के मामले में डिपो रिकॉर्ड मांग कर जांच करने का निर्णय लिया है।