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अमिताभ कान्त ने नेपाल की आर्थिक समृद्धि के लिए नई नीतियों का सुझाव दिया

२० वैशाख, काठमाडौँ । भारतीय नीति विश्लेषक अमिताभ कान्त ने नेपाल की आर्थिक समृद्धि के लिए साहसिक नीतिगत सुधार, डिजिटल पूर्वाधार में निवेश और उच्च मूल्य वाले पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। बाह्रखरी मीडिया द्वारा शनिवार को काठमाडौँ में आयोजित ‘‘नेपाल की अर्थव्यवस्था: संभावनाओं का खुलासा’’ विषयक विचार गोष्ठी में उन्होंने कहा कि सरकार को नियामक नहीं, बल्कि सहजकर्ता की भूमिका निभानी चाहिए। ‘‘अधिकाधिक लाइसेंस, निरीक्षण और कर्मचारी प्रशासनिक अधिकार भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं,’’ कान्त ने कहा, ‘‘सरकार को नियामक नहीं, बल्कि सहजकर्ता बनना चाहिए। नेपाल को व्यवसायों के लिए विश्व का सबसे सरल देश बनाना होगा।’’ उन्होंने कहा कि नेपाल को आने वाले तीन दशकों में वार्षिक ९ से १० प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य रखना चाहिए। हाल की चुनाव प्रक्रिया और युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी सुशासन, ईमानदारी और आर्थिक परिवर्तन की मांग कर रही है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को प्राप्त जनादेश के सफल कार्यान्वयन के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कान्त ने नेपाल और भारत के बीच मित्रता एवं सहयोग को और मजबूत करने पर बल दिया।

लगभग एक दशक पहले भारत विश्व के पांच कमजोर अर्थव्यवस्थाओं (फ्रैजाइल फाइव) में से एक था, याद दिलाते हुए कान्त ने कहा कि संरचनात्मक सुधारों, व्यापक डिजिटलाइजेशन और अवसंरचना निर्माण की बदौलत भारत आज विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने कहा कि ये अनुभव नेपाल के लिए भी प्रासंगिक हो सकते हैं। नेपाल की भौगोलिक जटिलताओं को आसान बनाने में डिजिटल पूर्वाधार सबसे प्रभावकारी माध्यम होगा। उन्होंने भारत के ‘डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर’ के उदाहरण के रूप में बताया कि इससे ७१० से अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे आम नागरिकों के बैंक खातों तक राज्य ने पहुँचाया है, जिससे भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार के रिसाव को लगभग समाप्त किया जा सका है। नेपाल को भी टेलिकॉम और आईटी क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए फाइव-जी तकनीक में तेजी से उन्नति करनी होगी, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव आएगा, कान्त ने कहा।

नेपाल के विकास में बाधक पुराने कानून, नियम और जटिल प्रक्रियाओं को समाप्त करने के लिए उन्होंने नियामकीय कटौती की अवधारणा पेश की। पर्यटन को नेपाल की ‘फ़ोर्स मल्टिप्लायर’ के रूप में परिभाषित करते हुए कान्त ने सुझाव दिया कि नेपाल को ‘‘बजट ट्रेकिंग डेस्टिनेशन’’ से ऊपर उठाकर ‘‘लक्ज़री’’ पर्यटन स्थल बनाना चाहिए। ‘‘नेपाल जैसे अद्वितीय पर्यटन क्षेत्र को कम कीमत पर बेचना उचित नहीं है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें कम से कम प्रति रात १५०० डॉलर खर्च करने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पूर्वाधार और ब्रांडिंग पर ध्यान देना होगा।’’ उन्होंने अयोध्या और जनकपुर को जोड़ने वाले ‘‘रामायण सर्किट’’ जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन परियोजनाओं से लाभ उठाने की बात कही। इसके अतिरिक्त, नेपाल को १०० प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग पर जोर देते हुए विश्व में स्थायी और हरित विकास का उदाहरण बनना चाहिए। उन्होंने जलविद्युत, कृषि प्रसंस्करण और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे तुलनात्मक लाभ वाले क्षेत्रों पर केंद्रित होने का आग्रह किया। आर्थिक विकास का नेतृत्व निजी क्षेत्र को करना चाहिए, परंतु इसके साथ ईमानदारी अनिवार्य है, कान्त ने कहा। राजनेताओं और व्यवसायियों के बीच अपारदर्शी गठजोड़ देश के विकास में बाधा डालता है, इसलिए उन्होंने युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने की सलाह दी। नेपाल के विकास में भारत का पूर्ण समर्थन रहेगा, यह भरोसा दिलाते हुए कान्त ने नेपाल की भौगोलिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर आगे बढ़ने का सुझाव दिया।

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