
तमिलनाडु में विजय थलापति की पार्टी को सरकार गठन में कठिनाई का सामना
भारत के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेता विजय थलापति की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने सबसे ज्यादा सीटें जीतकर द्रविड़ पार्टियों की दशकों पुरानी विरासत को तोड़ दिया है। लेकिन, २३४ सदस्यीय विधानसभा में टीवीके ने १०८ सीटें हासिल की हैं। संसद की सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद थलापति को सरकार बनाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। २३४ सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए कम से कम ११८ सीटें चाहिए होती हैं। चुनावी परिणाम आने के तीन दिन बाद भी वे अभी तक सरकार बनाने के लिए बहुमत प्राप्त करने में सफल नहीं हो पाए हैं। तमिलनाडु राजभवन (राज्यपाल कार्यालय) ने गुरुवार को एक बयान जारी कर बताया कि टीवीके अभी तक विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाई है।
‘तमिलनाडु के माननीय राज्यपाल थिरु राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने आज (७ मई) टीवीके के अध्यक्ष थिरु सी. जोसेफ विजय (विजय थलापति) को चेन्नई स्थित लोक भवन में बुलाकर उनसे मुलाकात की है। इस दौरान माननीय राज्यपाल ने सरकार गठन के लिए आवश्यक तमिलनाडु विधानसभा बहुमत के समर्थन स्थापित न होने की जानकारी दी है,’ राज्यपाल के बयान में कहा गया है। १०८ सीटों वाली टीवीके को बहुमत सिद्ध करने के लिए अभी और १० सीटों की आवश्यकता है। कांग्रेस ने पांच सीटें हासिल कर सहयोग का वादा किया है, लेकिन अभी भी पांच सीटें जुटानी बाकी हैं। टीवीके बहुमत में सफल न हो पाने के कारण राज्यपाल आर्लेकर ने अभी तक विजय थलापति को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया है। चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी को राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए क्यों नहीं बुलाया, इस विषय पर तमिलनाडु में तीव्र बहस छिड़ी हुई है।
विजय के सामने सीमित विकल्प हैं। जब कोई भी दल या गठबंधन स्पष्ट बहुमत नहीं पाता है, ऐसी विधानसभा को ‘हंग एसेम्बली’ या ‘त्रिशंकु संसद’ कहा जाता है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भी ऐसी त्रिशंकु संसद बनी है, जिसने सबसे बड़ी पार्टी टीवीके के लिए सरकार गठन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे हालात में राज्यपाल का बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका न देना कई सवाल पैदा करता है। साथ ही, टीवीके को दरकिनार करके परंपरागत प्रतिद्वंदी डीएमके और एआईएडीएमके के गठबंधन से सरकार बनने की संभावना की चर्चा भी हो रही है। टीवीके अभी भी सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहा है।
इस तरह टीवीके प्लस की संख्या ११९ तक पहुंचने की संभावना है, जो बहुमत के लिए आवश्यक संख्या से अधिक है। टीवीके का दूसरा विकल्प अल्पमत सरकार बनाना हो सकता है। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल टीवीके को सरकार बनाने के लिए बुला सकते हैं। सरकार बनने के बाद टीवीके अन्य पार्टियों को अपने पक्ष में लाने की रणनीति अपना सकता है। विजय की जीत से चुनौती बढ़ी? टीवीके बहुमत से १० सीटें पीछे है, लेकिन सरकार बनाने के लिए कम से कम १२ अतिरिक्त विधायक चाहिए। क्योंकि १०८ सीटों में से दो सीटें तिरुचिरापल्ली ईस्ट और पेराम्बुर हैं, जहाँ विजय थलापति स्वयं जीते हैं। नियम के अनुसार उन्हें एक सीट खाली करनी पड़ेगी, जिससे टीवीके की सीट संख्या १०७ रह जाएगी। इसके अलावा एक सभापति का भी चुनाव होगा। विश्वासमत के समय सभापति मतदान नहीं करता, इसलिए टीवीके के मतदान करने वाले सांसदों की संख्या १०६ हो जाएगी।