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कर्मचारी झर्केर बोल्छन्, परीक्षण गर्न निजीमा पठाउँछन् – Online Khabar

कर्मचारी झुंझलाते हैं, परीक्षण निजी में भेजे जाते हैं – स्वास्थ्य मंत्रालय में शिकायतों का घनघोर दोहराव

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा पश्चात तैयार।

  • स्वास्थ्य मंत्रालय की हेलो हेल्थ सेवा के माध्यम से प्रतिदिन १०० से अधिक अस्पताल कर्मियों के व्यवहार, औषधि की कमी तथा सेवा व्यवस्था सम्बन्धी शिकायतें आ रही हैं।
  • स्वास्थ्य बीमा बोर्ड ने सेवा प्रदाताओं को १६ अरब से अधिक भुगतान करने से वापस रखा है, जिसके कारण कई अस्पतालों ने बीमा सेवा बंद करनी शुरू कर दी है।
  • अस्पताल सुधार कार्यविधि–२०८२ लागू होने के बाद शिकायतों में सुधार देखा गया है और गंभीर शिकायतों को संबंधित निकायों को भेजा जा रहा है।

२५ वैशाख, काठमांडू। स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय के ‘हेलो हेल्थ’ में देश के विभिन्न हिस्सों से शिकायतें आ रही हैं। कुछ लोग अस्पतालों की लंबी कतारों की समस्या बताते हैं, तो कुछ औषधि की कमी और कर्मचारियों के खराब व्यवहार की व्यथा साझा करते हैं।

मंत्रालय के सूचना अधिकारी डॉ. भक्तबहादुर केसी के मोबाइल पर मंगलवार को नुवाकोट से ऐसी ही एक शिकायत आई।

फोन करने वाले की ७० वर्षीय माँ को उच्च रक्तचाप और हृदय रोग है। वह लंबे समय से वीर अस्पताल में इलाज करा रही हैं। पहले स्वास्थ्य बीमा से दीर्घ रोगियों को तीन महीने तक की औषधि दी जाती थी और परिवार डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन लेकर उसे हासिल कर सकता था।

पर अब अस्पताल ने नया नियम लागू किया है – अब केवल एक महीने की औषधि दी जाएगी और मरीज को स्वयं उपस्थित होना होगा। वृद्ध महिला को काठमांडू लाने में एम्बुलेंस किराया, रहने खाने का खर्च आदि आ जाते हैं, जो औषधि की कीमत से ज्यादा हैं।

फोन करने वाले ने शिकायत की, “बीमार को वीर अस्पताल ले जाना कठिन है। काठमांडू आना भारी खर्चीला है। नजदीक कहीं औषधि उपलब्ध कराने का विकल्प होना चाहिए।”

डॉ. केसी ने स्थानीय अस्पताल से समस्या हल करने का आश्वासन दिया।

एक सप्ताह पहले स्वास्थ्य सेवा विभाग (टेकेयू) में कॉल सेंटर (१११५) के कर्मचारियों के खराब व्यवहार की भी शिकायत आई थी।

त्रिवि शिक्षण अस्पताल के बिल काउंटर पर कार्यरत कर्मचारियों द्वारा महिला को धक्का देने का आरोप लगा। महिला ने कहा, ‘काउंटर के कुछ कर्मचारियों ने आवश्यक जानकारी नहीं दी, उल्टे फोन पर झुंझलाया। डॉक्टर से पूछने पर भी झुंझलाने का सामना करना पड़ा।’

ऐसे कर्मचारियों के व्यवहार से सेवा लेने वाले असहज महसूस कर रहे हैं। महिला ने स्वास्थ्य मंत्रालय से कर्मचारी प्रबंधन में सुधार कर सेवाग्राही-मित्र व्यवहार सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

स्वास्थ्य मंत्रालय में हेलो हेल्थ, कॉल सेंटर, फोन, हेलो सरकार, ईमेल और व्हाट्सएप पर प्रतिदिन १०० से अधिक शिकायतें आती हैं। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में स्वास्थ्य सेवा, बीमा, अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारी व्यवहार संबंधी शिकायतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सिर्फ चैत्र में ही ४ हजार से अधिक लोगों ने शिकायत की है, जबकि जनवरी में मात्र १०० शिकायतें दर्ज हुई थीं।

सावन में ७४, भाद्र में ८८, आश्विन में ८४, कार्तिक में ९१, मंसिर में १०५, पौष में ८३, माघ में ९३ और फाल्गुन में १०४ सेवाग्राहियों ने स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें की थीं। स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता ने प्रतिदिन बढ़ते फोन कॉल के कारण सभी कॉल न उठाए जा पाने को स्वीकार करते हुए व्हाट्सएप से शिकायतें भेजने का आग्रह किया था, जिससे शिकायतों में वृद्धि हुई है।

‘सबसे अधिक शिकायत कर्मचारी व्यवहार पर है’

मंत्रालय के सूचना अधिकारी डॉ. केसी के अनुसार सबसे अधिक शिकायतें अस्पताल कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर हैं। ‘कर्मचारी गुस्से में बोलते हैं, झुंझलाते हैं, जवाब नहीं देते, धक्का मारते हैं जैसी कई शिकायतें हैं। हम इन्हें इकट्ठा करके संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को सुधार के लिए पत्र भेजते हैं।’

टिकट, टोकन तथा भीड़ प्रबंधन करने वाले कर्मचारियों के संबंध में भी शिकायतें अधिक आती हैं। पहली संपर्क में ही समस्या नजर आती है।

अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी भी गंभीर समस्या बन गई है। कुछ अस्पतालों में वीडियो एक्स-रे कराने वाले चिकित्सकों की कमी की शिकायत दर्ज हुई है।

पाटन अस्पताल की समस्या लेकर कुछ दिन पूर्व मंत्रालय में एक सेवाग्राही ने भी शिकायत की थी।

उन्होंने बताया, ‘मेरी बेटी के गले में समस्या थी, इसलिए पाटन गए थे। डॉक्टर ने वीडियो एक्स-रे कराने को कहा, लेकिन १० दिन बाद आने को कहा गया। सामान्य वीडियो एक्स-रे के लिए सप्ताहों तक इंतजार करना पड़ता है, मरीज की हालत क्या होगी?’

पैथोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट के कार्यालय समय में अनुपस्थिति, कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों की लंबी छुट्टियां या अन्य कारणों से अनुपस्थिति की भी शिकायतें मिल रही हैं।

सबसे अधिक शिकायतें वीर अस्पताल से आ रही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वीर, पाटन और त्रिवि शिक्षण अस्पतालों में अधिक भीड़ के कारण शिकायतें ज्यादा आती हैं।

राष्ट्रीय ट्रॉमा सेंटर, निजामती अस्पताल, प्रसूति गृह, शहीद गंगालाल राष्ट्रीय हृदय केंद्र, कांती बाल अस्पताल, बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान, कर्णाली स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान, भक्तपुर कैंसर अस्पताल, भरतपुर अस्पताल, शहीद धर्मभक्त राष्ट्रीय प्रत्यारोपण केंद्र सहित अन्य स्थानों से भी शिकायतें प्राप्त होती हैं।

कुछ सेवाग्राही यह भी शिकायत करते हैं कि डॉक्टर अपनी बात स्पष्ट रूप से समझाते नहीं हैं।

गंगालाल अस्पताल गई एक सेवाग्राही ने बताया, ‘बड़े इंतजार के बाद पिता के ऑपरेशन का समय मिला, लेकिन सुबह से भूखा रखा गया, १० हजार रुपये की दवाएं खरीदने को कहा गया। दोपहर तक ऑपरेशन नहीं हुआ, अगले दिन शिफ्ट कर दिया गया। डॉक्टरों के ऐसे व्यवहार ने मरीज को शारीरिक और मानसिक दर्द बढ़ाया है।’

अस्पताल के भीतर कर्मचारियों के बीच समन्वय और संवाद की कमी भी समस्या के रूप में उभर रही है। कई सेवाग्राहियों को अस्पताल में कहाँ जाना है और कौन सी सेवा कहाँ उपलब्ध है, इसकी सामान्य जानकारी नहीं होती। संवाद कौशल की कमी के कारण भी शिकायतें बढ़ती हैं।

मरीज की पीड़ा को धैर्यपूर्वक सुनकर सरल तरीके से समझाना आवश्यक है। डॉक्टर के साथ संक्षिप्त या कमजोर संवाद उपचार को प्रभावित करता है।

सबसे अधिक अविश्वास चिकित्सकों के प्रति होता है। मरीज, परिजन तथा चिकित्सक के बीच लगातार संवाद या काउंसिलिंग कमजोर होने के कारण अविश्वास बढ़ता है।

लेकिन डॉक्टर यदि मरीज की बात ध्यान से सुनते हैं तो मरीज की पीड़ा आधी हो जाती है। ऐसा माहौल रोग की जल्दी पहचान और उपचार खर्च तथा अस्पताल में रहने का समय कम करता है।

डॉ. केसी कहते हैं, ‘अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा सौहार्दपूर्ण और पारदर्शी संवाद से कई समस्याओं का समाधान संभव है। अधिकांश शिकायतें कर्मचारियों के खराब व्यवहार से जुड़ी होती हैं।’

‘बीमा के तहत सेवा प्राप्त नहीं हो पा रही है’

स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम से जुड़ी शिकायतें भी बहुत हैं। कई अस्पतालों ने भुगतान न मिलने के कारण सेवा में कटौती या बंद कर दी है, जिससे मरीजों को सीधे परेशानी हो रही है।

स्वास्थ्य बीमा बोर्ड ने अब तक सेवा प्रदाताओं को १६ अरब से अधिक भुगतान बकाया रखा है। डॉ. केसी के अनुसार सरकार द्वारा अस्पतालों को भुगतान न कर पाने के कारण बीमा सेवाएं रुकी हुई हैं।

‘राशि भुगतान नहीं होने से कई अस्पतालों ने सेवा बंद की है, तो कई ने कम कर दी है। बीमा से सेवा न मिलने की शिकायतें बहुत हैं।’ डॉ. केसी कहते हैं।

कई सेवाग्राहियों को बीमा कैसे इस्तेमाल करना है, कहाँ जाना है और क्या सेवा मिलेगी, इसकी जानकारी नहीं है।

‘बहुत से लोग नहीं जानते कि बीमा जरूरी है, कैसे लेना है यह भी पता नहीं है। रोगी को खर्च, प्रक्रिया और सेवा के बारे में स्पष्ट जानकारी दिए जाने से शिकायतें कम हो सकती थीं।’

मशीन खराबी, औषधि की कमी और सफाई में कमजोरी

अस्पतालों के उपकरण खराब होने, मशीनों के काम न करने, औषधि की कमी और सफाई कमजोर होने की शिकायतें भी नियमित आती रहती हैं। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त औषधि की कमी अधिक है।

कुछ ने अस्पताल में भोजन की गुणवत्ता खराब होने, शौचालय गंदे रहने और वातावरण अस्वस्थ होने की भी शिकायत की है।

स्वास्थ्य मंत्रालय में केवल अस्पताल से ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित शिकायतें भी आ रही हैं। स्थानीय क्षेत्रों में उद्योगों से उत्पन्न धूल, धुआं, पानी और ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि को लेकर निगम में शिकायत की जाती है।

‘उद्योग से निकलने वाली धूल और गंदगी ने वातावरण को नष्ट किया है, पानी प्रदूषित हो रहा है’ ऐसी शिकायतें आती हैं, डॉ. केसी कहते हैं।

सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों द्वारा मरीजों को अनावश्यक रूप से निजी डायग्नोस्टिक सेंटर या अन्य अस्पतालों में भेजने की भी शिकायतें अधिक हैं।

मधेश विज्ञान प्रतिष्ठान में भी इस प्रकार की शिकायतें आई हैं। एक सेवाग्राही ने कहा, ‘छेद से पसीना आ रहा है, अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिलते। मशीन क्लिनिक भेजता है जहाँ ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। क्या डॉक्टर नजदीक होकर काम नहीं कर सकता?’

मंत्रालय ने बताया है कि हाल ही में ‘अस्पताल सुधार कार्यविधि–२०८२’ लागू की गई है और इसके बाद सुधार देखने को मिला है। शिकायतें आने पर संबंधित निकाय को पत्राचार और फोन द्वारा लिखा जाता है।

‘फोन और पत्र भेजकर निगरानी बढ़ाई है और सुधार हुआ है,’ डॉ. केसी कहते हैं। ‘कुछ मामलों में अस्पताल ने जवाब लिखकर सुधार करने की प्रतिबद्धता भी जताई है।’

भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता या गंभीर लापरवाही से जुड़ी शिकायतें सुशासन तथा जांच एजेंसियों को भेजी जाती हैं।

डा. केसी कहते हैं, ‘हम स्वास्थ्य सेवा सुधार और गंभीर प्रकरणों पर अधिक ध्यान देते हैं और संबंधित पक्षों को भेजते हैं।’

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