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लोपोन्मुख रैथाने मछली संरक्षण के लिए सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय अनुदान मंजूर किया

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात् तैयार किया गया।

  • सरकार ने मध्य त्रिशूली नदी बेसिन में पाए जाने वाले लोपोन्मुख रैथाने मछली संरक्षण के लिए 1.45 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान स्वीकृत किया है।
  • मंत्रिपरिषद् की बैठक में असला, कत्ले और सहर जैसे रैथाने मछलियों के संरक्षण हेतु ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क फंड से अनुदान मंजूर किया गया।
  • परियोजना 2026 से 2029 तक नुवाकोट के स्थानीय स्तरों पर संचालित होगी और जैव विविधता संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों के सतत् स्वरोजगार को बढ़ावा देगी।

२५ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने मध्य त्रिशूली नदी बेसिन में पाए जाने वाले लोपोन्मुख रैथाने मछली के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुदान स्वीकृत किया है।

२२ वैशाख को हुई मंत्रिपरिषद् की बैठक में असला, कत्ले और सहर जैसी रैथाने मछलियों की प्रजातियों के संरक्षण हेतु वैदेशिक अनुदान की मंजूरी दी गई।

यह अनुदान विश्व पर्यावरण सुविधा (GEF) के तहत ‘ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क फंड’ (GBF) से 1.45 मिलियन अमेरिकी डॉलर, लगभग 21 करोड़ 82 लाख रुपये के बराबर प्राप्त होगा। तकनीकी सहायता के खर्च को घटाकर बची हुई राशि 1.27 मिलियन अमेरिकी डॉलर अर्थात लगभग 19 करोड़ 11 लाख रुपये सरकार के संघीय कोष से परिचालित की जाएगी।

यह परियोजना कृषि तथा पशुपालन विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाएगी और इसका शीर्षक है ‘मध्य त्रिशूली नदी बेसिन में ठंडे पानी में पाई जाने वाली लोपोन्मुख प्रजाति की मछलियों का संरक्षण एवं मछली पकड़ने वाले समुदाय का सतत् जीविकोपार्जन’। परियोजना नुवाकोट जिले के स्थानीय स्तरों पर केंद्रित होगी।

यह तीन वर्षीय कार्यक्रम 2026 से 2029 तक चलेगा, जिसमें जैव विविधता के अनुकूल प्रथाओं का विस्तार, संकटग्रस्त मछलियों का उत्पादन एवं पुनर्स्थापन के साथ-साथ आधुनिक एक्वाकल्चर की स्थापना की जाएगी।

इस परियोजना का उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देना तथा नदी पर आश्रित स्थानीय समुदायों के जीविकोपार्जन में भी योगदान देना है।

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