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उपसभामुख ठाकुर ने प्रधानन्यायाधीश की सिफारिश कार्यक्षमता पर आधारित होने की बात कही

२६ वैशाख, काठमाडौं। प्रतिनिधिसभा की उपसभामुख रुबीकुमारी ठाकुर ने प्रधानन्यायाधीश की सिफारिश कार्यक्षमता के आधार पर की गई होने का दावा किया है। शनिवार को फेसबुक के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने इस विषय में किसी भी प्रकार का कोई ‘किन्तु-परंतु’ आवश्यकता नहीं होने को स्पष्ट किया। ‘न्याय प्रणाली को लेकर जनता लंबे समय से शिकायत कर रहे हैं – मुकदमे इतने वर्षों लगे, इतने वर्षों लगे,’ उपसभामुख ठाकुर ने बताया। ‘किसी मामले के निर्णय में अत्यधिक समय लगना न्याय प्रणाली के लिए गंभीर समस्या है।’

वह कहती हैं, जब नियुक्ति कार्यक्षमता और योग्यताओं के बजाय दल या पार्टी के आधार पर की जाती है, तो इसका नकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकता है। ‘प्रधानन्यायाधीश की नियुक्ति कार्यक्षमता के मूल्यांकन के आधार पर की गई है। इस विषय में कोई किन्तु-परंतु आवश्यक नहीं है,’ उन्होंने लिखा। उनका यह भी कहना है कि राज्य के सभी अंग देश, जनता और राष्ट्र के हित में कार्य करने चाहिए। ‘यहाँ किसी का आदेश-उपदेश नहीं, बल्कि संविधान, कानून और जनहित सर्वोपरि होना चाहिए। निष्पक्ष, सक्षम और जिम्मेदार न्याय प्रणाली ही लोकतंत्र की वास्तविक आधार है,’ उन्होंने आगे कहा।

उन्होंने अपने फेसबुक स्टेटस में प्रधानन्यायाधीश के उम्मीदवार न्यायाधीशों के संबंध में च्याटजीपीटी द्वारा तैयार की गई टिप्पणी का स्क्रीनशॉट भी साझा किया है।

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